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खाकी की ‘अग्नि परीक्षा’ , 35 डिग्री में गर्म वर्दी में पहरा !

सीमावर्ती जिलों में सूरज के तेवर अभी से तीखे होने लगे हैं, लेकिन खाकी की ऋतु अभी भी कागजों में सर्दी पर ही टिकी है। मार्च के पहले सप्ताह में ही पश्चिमी राजस्थान का पारा 35 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है, लेकिन पुलिस के बेड़े में अभी तक ठंडी वर्दी पहनने के आदेश जारी नहीं हुए हैं।

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सीमावर्ती जिलों में सूरज के तेवर अभी से तीखे होने लगे हैं, लेकिन खाकी की ऋतु अभी भी कागजों में सर्दी पर ही टिकी है। मार्च के पहले सप्ताह में ही पश्चिमी राजस्थान का पारा 35 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है, लेकिन पुलिस के बेड़े में अभी तक ठंडी वर्दी पहनने के आदेश जारी नहीं हुए हैं। हालत यह है कि तपती धूप में ड्यूटी कर रहे जवान गर्म वर्दी के भीतर पसीने से तर-बतर हो रहे हैं, लेकिन अनुशासन की बेडिय़ां उन्हें यह उतारने की इजाजत नहीं दे रही हैं।

परंपरा और नियमों का पेंच

राजस्थान पुलिस में वर्दी बदलने की प्रक्रिया दशकों पुरानी परंपरा और सख्त नियमों पर आधारित है। पुलिस महकमे में सर्दी और गर्मी के लिए अलग-अलग कपड़े की वर्दी निर्धारित है। हालांकि दोनों का रंग खाकी ही होता है, लेकिन बुनावट और कपड़े की मोटाई में जमीन-आसमान का अंतर होता है। नियम के मुताबिक, जब तक पुलिस महानिदेशक कार्यालय जयपुर से आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक प्रदेश का कोई भी सिपाही या अधिकारी अपनी मर्जी से वर्दी का प्रकार नहीं बदल सकता।

बदल गया मौसम चक्र, पर नहीं बदले नियम

पिछले कुछ वर्षों में पश्चिमी राजस्थान में मौसम का मिजाज तेजी से बदला है। अब फरवरी के दूसरे पखवाड़े से ही गर्मी अपना असर दिखाना शुरू कर देती है और मार्च की शुरुआत तक भीषण गर्मी जैसे हालात बन जाते है। पुलिस सूत्रों के अनुसार बीते कुछ वर्षों से 15 नवंबर से गर्म वर्दी और 15 मार्च से ठंडी वर्दी पहनने के आदेश जारी होते है। पश्चिमी राजस्थान में बदलते मौसम और गर्मी के बढ़ते असर में गर्म वर्दी में ड्यूटी करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

असहज दिख रहे पुलिसकर्मी

सरहदी जिलों में तापमान 35 डिग्री से अधिक होने लगा है। ऐसे में दोपहर में मौसम भीषण गर्मी का हो जाता है। चौराहों, नाकों और फील्ड ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी गर्म वर्दी पहनकर खासे असहज नजर आ रहे है। ऊनी अंश वाली यह वर्दी शरीर की गर्मी को बाहर नहीं निकलने देती। जिससे पुलिसकर्मियों के बीमार होने का खतरा भी बढ़ गया है।

जिलेवार निकले आदेश तो मिले राहत

राजस्थान जैसे भौगोलिक विविधता वाले राज्य में एक ही तारीख पूरे प्रदेश के लिए सही नहीं हो सकती। अन्य जिलों की अपेक्षा जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी, जोधपुर जैसे जिलों में गर्मी फरवरी माह के दूसरे पखवाड़े में शुरू हो जाती है। ऐसे में जिला स्तर पर इन आदेशों में बदलाव की छूट मिले तो पुलिसकर्मियों को राहत मिल सकती है।