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धर्म व संस्कृति का नाश होने से बचाता है क्षत्रिय: रोलसाहबसर

धर्म व संस्कृति का नाश होने से बचाता है क्षत्रिय: रोलसाहबसर
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

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Updated: 31 Aug 2021, 9:23 PM IST

धर्म व संस्कृति का नाश होने से बचाता है क्षत्रिय: रोलसाहबसर

धर्म व संस्कृति का नाश होने से बचाता है क्षत्रिय: रोलसाहबसर

झिनझिनयाली. क्षत्रिय युवक संघ की स्थापना से 22 दिसंबर 2021 को 75 वर्ष पूरे होने पर हीरक जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में 75 बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी शृंखला मे क्षत्रिय युवक संघ के संभाग जैसलमेर की ओर से संत मूलचंद की जयंती भगवंती मरु विकास संस्थान झिनझिनयाली के प्रांगण में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मनाई गई। मूलचन्द प्रोल में रात्रि जागरण का भी आयोजन हुआ। मूलचन्द जयंती दौरान यज्ञ के साथ मंगलाचरण से कार्यक्रम का विधिवत आगाज हुआ। जयंती समारोह कार्यक्रम में शरीक अतिथियों ने तनसिंह व मूलचन्द प्रोल के समक्ष चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। पुष्पांजलि के उपरांत क्षत्रिय कुल में जन्म दिया तो...प्रार्थना की गई। जयंती समारोह उद्धबोधन मे कैलाश कंवर ने कहा कि महान दानी पुरुष मूलचन्द की पावन तपोभूमि पर जन्म पाकर हम सभी गौरवांवित है। वर्षों बाद क्षत्रिय संघ की पहल पर गांव में मूलचन्द की जयंती समारोह मनाने का जो सौभाग्य मिला है। यह एक बेहद स्वर्णिम युग से कम नही है। उन्होंने सभा को सम्बोधित करते हुए क्षेत्र में बालिका शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि समय के साथ बालिका शिक्षा अतिआवश्यक है। क्षेत्र में बालिकाओ को अच्छी शिक्षा दे ताकि बालिकाएं स्वयं आत्मनिर्भर बने।उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यक्रमों को कभी राजनीतिक रूप से न जोड़ें। वरिष्ठ अध्यापक व इतिहासकार रिड़मलसिंह ने कहा कि मूलचन्द ने जयंती सभा को सम्बोधित करते कहा कि सिंध संवत 1772-73 में मरु प्रदेश सहित गुजरात मे भारी अकाल में कुछ परिवार उत्तर भारत जा रहे थे, तब झिनझिनयाली के पास रात्रि में वह अपनी सौ-दौ सौ संतानों को छोड़कर चले गए थे। रोते बिलखते बच्चों को जब मूलचन्द ने देखा तो दो साल तक अपनी प्रोल में लाकर पालन-पोषण के बाद परिवार को सुपुर्द किया था। इस दौरान सेवानिवृत्त डीआईजी एसपी मूलसिंह भाटी ने भी विचार व्यक्त किए। ख्याला मठाधीश गोरखनाथ ने जयंती समारोह में आगन्तुकों का सन्त के तौर पर मार्गदर्शन व आशीर्वाद देते हुए कहा कि हमेशा इंसान को सन्मार्ग की और चलना चाहिए। साधु संतो ने समाज को जीवन उद्धार के बारे में हमेशा सीख दी है। इस दौरान सहगायन राही जब से आया... भी प्रस्तुत किया। जयंती समारोह में क्षत्रिय संघ के मार्गदर्शक व संरक्षक भगवानसिंह रोलसाहबसर ने कहा कि समाज मे ऐसे संत महापुरुषों की जरूरत रहती है, जो एकांत में रहकर भी समाज, राष्ट्र, धर्म, मानवीयता का चिंतन करते रहते है। मूलचन्द भी ऐसे ही मानवीय इंसान थे। उन्होंने तनसिंह के बारे में कहा उन्होंने ने समाज को अपना क्षेत्र समझा। उन्होंने संघ की स्थापना कर सोचा कि जब तक मनुष्य का आंतरिक सुधार नही होगा, तब तक समाज विकसित नही होगा। उन्होंने बताया कि क्षत्रिय वह जो क्षय से बचाता है। क्षत्रिय वह है जो धर्म व संस्कृति का नाश होने से बचाता है। क्षत्रियों को सूर्य देव से सीख लेनी चाहिए जो निरन्तर चलता रहता है जो निरन्तर प्रकाश देता है। इस दौरान जयंती समारोह में उपस्थित बुजुर्गों जागृत युवाओं को यर्थात गीता भी भेंट की है। मूलचन्द जयंती कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने शिरकत की जिसमे पूर्व सांसद मानवेंद्रसिंह, चित्रासिंह, पूर्व विधायक छोटूसिंह व सांगसिंह भाटी भी मौजूद रहे।इस दौरान जयंती समारोह में जैसलमेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों सहित बाड़मेर जिले की शिव विधान सभा से भी हजारों लोगों ने जयंती समारोह में भाग लिया।