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‘लाठी’ की मजबूती से चहुंओर खुशहाली

-800 बीघा आबादी क्षेत्र में 5 हजार लोगों को दे रहा आश्रय

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'लाठी' की मजबूती से चहुंओर खुशहाली

'लाठी' की मजबूती से चहुंओर खुशहाली

-जैसा नाम है, उतना ही आर्थिक लिहाज से मजबूत है यह गांव

-तारकोल की काली स्याह सड़क से बदल गई गांव की तकदीर
जैसलमेर. करीब 5 हजार की आबादी को 800 बीघा आबादी क्षेत्र में आश्रय देने वाला लाठी गांव की तकदीर एक सड़क बनने के साथ ही बदल गई। इंसान तो क्या पशु-पक्षियों, यहां तक की प्रवासी पक्षी कुरजां को भी लाठी क्षेत्र का माहौल काफी रिझाता है। लाठी कस्बे सहित आसपास के क्षेत्र की भूमि उपजाऊ है, यहां के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती है। सौन्दर्य व संभावनाएं पहले भी थी, लेकिन देश-दुनिया के बाशिंदे रु-ब-रु अब हो रहे हैं। नलकूपों से भी सिंचाई होने लगी है, वहीं हर व्यक्ति के पास रोजगार है। यहां बस स्टैण्ड पर उतरने वाले पर्यटक को प्राचीन कलात्मक छतरियां चुम्बकीय आकर्षण से रिझाती है। जिला मुख्यालय से 65 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-11 के किनारे स्थित लाठी गांव का नाम किसी से छिपा नहीं है। जैसा नाम है, उतना ही आर्थिक लिहाज से मजबूत है यह गांव। नाम भले ही लाठी हैं, लेकिन यहां शांति व सुकून के साथ लोग जीते हैं। महज पांच दशक पहले साधन-संशाधनों का टोटा था, आवागमन तो राम भरोसे ही रहता। स्वर्णनगरी व परमाणुनगरी को जोडऩे वाला यह गांव एक सड़क बनते ही विकास की धारा से न केवल जुड़ा, बल्कि यह पथ उसे प्रगति पथ पर अग्रसर कराने में सहायक साबित हुआ। जैसलमेर-जोधपुर मार्ग पर एक स्टेशन के तौर पर पहचान बनाने के बाद लाठी को पहचान दिलाई उसकी ऐतिहासिक धरोहरों व धार्मिक स्थलों की निकटता है। उसकी ख्याति को ऊंचाई मिली,भादरिया ओरण तथा वन-विभाग के वृहद रूप से फैले आरक्षित क्षेत्र के कारण, जहां वन्य प्राणी स्वच्छंद विचरण करते हैं तो लाठी के अधिकांश मोहल्लों में पशुओं की प्यास बुझाने को जीएलआर बनी है।
50 वर्ष में 'विकास पथ'
-लाठी प्रदेश के प्रमुख शहरों से रेल और सड़क परिवहन से जुड़ा तो उसकी किस्मत भी बदल गई।
-यात्रियों के साथ पर्यटकों व सैनिकों की बढ़ती आवक ने इसकी आर्थिक तंत्र को सुथार ही नहीं बल्कि मजबूत भी किया।
-गांव के निकटतम हवाई अड्डा जैसलमेर में स्थित है, जो यहां से 65 किमी दूर है। गांव में भादरिया लाठी नाम से रेलवे स्टेशन है, जिसमें देश के कई प्रमुख शहरों से सीधी ट्रेनें हैं।
-यहां से लोगों के आवागमन के लिए रेल व बस की सुविधा उपलब्ध है।
-ग्रामीण नेमीचंद दर्जी व धर्मेन्द्र पंवार बताते हैं कि लाठी कस्बे के पास शक्तिपीठ भादरिया माता मंदिर तथा फिल्ड फायरिंग रेंज होने के कारण यहां पर सैनिकों तथा यात्रियों का प्रतिदिन आवागमन रहता है।
-यहां के लोगों की आय विशेष रूप से व्यापार, कृषि कार्य, सैनिकों तथा यात्रा करने वाले यात्रियों पर निर्भर हैं। यहां के अधिकतर लोग व्यापारी कृषि कार्य यात्रियों तथा सैनिकों पर निर्भर है।
क्षेत्र की बड़ी पंचायत
लाठी पोकरण क्षेत्र की बड़ी ग्राम पंचायत है। यहां आसपास क्षेत्र के गांवों में घनी आबादी निवास करती है तथा नलकूप क्षेत्र होने के कारण बड़ी संख्या में किसानों आसपास के ग्रामीण इलाके धोलियाए भादरिया, लोहटा, रतन की बस्सी, केरालिया, सोढ़ाकोर, डेलासर, नेड़ान सहित कई आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का का आवागमन रहता है।
वन्य जीवों की विविधता
लाठी गांव के पास भादरिया ओरण तथा वनविभाग का बहुत बड़ा आरक्षित क्षेत्र होने के कारण यहां विभिन्न प्रजाति के पशु पक्षी जंगल में स्वच्छंद विचरण करते है। प्रवासी पक्षी कुरजां को लाठी क्षेत्र का माहौल काफी रिझाता है। चिंकारा हरिण, लोमड़ी, नील गाय, खरगोश जैसे जंगली जानवर तथा गोडावण, बाज, गिद्ध जैसे विभिन्न प्रजातियों के पशु पक्षी पाए जाते है। देश-प्रदेश से विभिन्न प्रकार की प्रजातियों के पक्षी भी यहां ऋतु के अनुसार आते हैं तथा कुछ महीनों तक यहां पर निवास करने के बाद वापस अपने देश चले जाते हैं। यहां पर पुलिस थाना स्थापित होने के बाद बड़ी-बड़ी वारदातें, चोरी, डकैती जैसी वारदातें घटी है।