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90 फीसदी रिसोर्ट्स पर लगे ताले, धोरों पर छाई वीरानी

-व्यवसायियों से लेकर कामगारों के लिए कठिन समय

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90 फीसदी रिसोट्र्स पर लगे ताले, धोरों पर छाई वीरानी

90 फीसदी रिसोट्र्स पर लगे ताले, धोरों पर छाई वीरानी

जैसलमेर. गर्मी का प्रकोप शुरू होने के साथ ही जैसलमेर का पर्यटन व्यवसाय ठंडा पड़ गया है। इसकी सीधी मार जिला मुख्यालय से 42 किलोमीटर दूर स्थित सम सेंड ड्यून्स क्षेत्र में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हजारों लोगों के रोजगार पर पड़ी है। कुल करीब 110 रिसोट्र्स और कैम्प्स में वर्तमान में मुश्किल से 10 रिसोट्र्स खुले हैं, शेष पर ताले जड़ दिए गए हैं। उनमें काम करने वाले कामगारों का रोजगार फिलहाल छिन गया है और अब उन्हें कम से कम जुलाई-अगस्त तक ठाले बैठ इंतजार करना होगा या किसी छोटे-मोटे काम की शरण लेनी होगी। ऐसे ही रेगिस्तान के जहाज पर सैलानियों को सैर करवाने वाले सैकड़ों ऊंट चालकों के ऊंट खड़े हैं। किसी.किसी को मामूली रकम आने वाले इक्का-दुक्का सैलानियों को घुमाने से मिल जाती है। उतने में ऊंट का खर्चा निकलना भी मुश्किल है। ऊंट मालिक का अपना परिवार पलना तो दूर की बात है। दूसरी ओर सीजन में सैलानियों से गुलजार रहने वाले मखमली रेत के धोरों पर प्रायरू सन्नाटा छाया हुआ है।
खुल गए टेंट, नजर आ रही रेत ही रेत
इन दिनों दामोदरा से सम सेंड ड्यून्स तक स्थित ज्यादातर रिसोट्र्स तीन-चार महीनों के लिए अस्थायी तौर पर बंद कर दिए गए हैं। उनमें लगे टेंट्स को मौसम की मार से बचने के लिए समेट दिया गया है। इससे चारों तरफ रेत ही रेत नजर आ रही है। जबकि सीजन समय में सेंड ड्यून्स के दूसरे वाले भाग में रोशनियों से नहाए हजारों टेंट्स की वजह से वहां किसी शहर का आभास होता है। रिसोर्ट्स चलाने वालों का कहना है कि वर्तमान में गिनती के लोग घूमने के लिए सम पहुंच रहे हैं। इससे उनके लिए स्टाफ रखकर व्यवसाय जारी रखना संभव नहीं रह गया। लिहाजा उन्होंने अप्रेल माह के आरंभ से बड़े पैमाने पर टेंट्स समेट लिए। अब जो आठ-दस रिसोर्ट्स खुले हैं, वे ज्यादातर स्थानीय बाशिंदों के हैं। उनके सामने भी चुनौतियां कम नहीं हैं। लिहाजा वहां भी स्टाफ की छंटनी का दौर तो शुरू हो ही चुका है। यदि सैलानियों की तादाद ऐसे ही कम बनी रही तो वे भी प्राय: समेट ही दिए जाने हैं क्योंकि क्षेत्र में मई और जून माह में चलने वाली धूल भरी आंधियों व कभी कभार आने वाले तूफान की वजह से उन्हें पूर्व में बहुत नुकसान झेलना पड़ा है।
गुजारा करना दूभर
सम के रिसोर्ट्स में सैलानियों के सामने अपने वादन, गायन और नृत्य का हुनर दिखा कर पेट पालने वाले लोक कलाकारों के लिए भी यह बहुत मुश्किल दौर है। जब रिसोर्ट्स ही बंद हो गए तो उनकी रोजी-रोटी भी ठप हो चुकी है। करीब 800 कलाकार यहां रोजगार पाते रहे हैं। उनकी जरूरत अब तीन-चार महीने बाद पड़ेगी। वह भी धीरे-धीरे सीजन के जोर पकडऩे पर उन्हें पूरे तौर पर रोजगार मिलेगा। ऐसे ही सीजन में एक हजार से ज्यादा ऊंट सम सेंड ड्यून्स में मेहमानों को घूमाने के काम में आते हैं। उनकी संख्या अभी घट कर 50 के आसपास रह गई है। उनमें से भी कुछ को काम मिलता है। पालकों के सामने ऊंटों के भरण पोषण की विकट समस्या है। जिन लोगों ने रिसोट्र्स संचालन के लिए किराए पर जमीन ले रखी हैए उनके लिए भी दिक्कतें कम नहीं हैं। बंद जगहों का किराया चुकाना तथा तीन महीनों बाद पुनरू रिसोर्ट आदि को शुरू करने में उन्हें लाखों रुपए की व्यवस्था करनी होती है। पर्यटन नक्शे पर मशहूर हो चुके सेंड ड्यून्स पर बने प्रतिष्ठानों में काम करने वाले ज्यादातर कामगारों को साल में सात-आठ महीने ही रोजगार मिलने की व्यवस्था है। बाहरी शेफ, कर्मचारी और प्रबंधन से जुड़े अन्य लोग अपने मूल निवास की तरफ लौट चुके हैं।

फैक्ट फाइल
-42 किलोमीटर दूर है जैसलमेर से सम सेंड ड्यून्स
-03 महीनों तक लगभग बंद रहेगा सम का पर्यटन व्यवसाय
-08 लाख लोग सालाना पहुंचते रहे हैं सेंड ड्यून्स पर

ऑफ सीजन की बड़ी चुनौती
सम क्षेत्र में व्यवसाय करने वाले लोगों तथा काम करने वालों के लिए ऑफ सीजन हमेशा से बड़ी चुनौती साबित होता रहा है। इस दौरान रोजगार नहीं के बराबर मिलता है। इससे सभी स्तर के लोग प्रभावित होते हैं।
-कैलाश कुमार व्यास, अध्यक्ष, सम रिसोट्र्स वेलफेयर सोसायटी