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Mock drill:  सैन्य स्टेशन पर हवाई हमला, युद्ध स्तर पर किया बचाव कार्य

ऑपरेशन शील्ड के तहत शनिवार सायं जैसलमेर के सैन्य स्टेशन पर दुश्मन देश की तरफ से हवाई हमला और उसके तुरंत बाद उत्पन्न हालात में राहत व बचाव कार्य करने से जुड़ी मॉक ड्रिल की गई।

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ऑपरेशन शील्ड के तहत शनिवार सायं जैसलमेर के सैन्य स्टेशन पर दुश्मन देश की तरफ से हवाई हमला और उसके तुरंत बाद उत्पन्न हालात में राहत व बचाव कार्य करने से जुड़ी मॉक ड्रिल की गई। इसके तहत शहर में शाम 7 बजे सायरन की आवाज गूंजी। दूसरी ओर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर जोधपुर मार्ग पर अवस्थित सैन्य स्टेशन पर हमले का मॉक ड्रिल किया गया। मॉक ड्रिल शुरू होने पर जैसलमेर से तय समय पर रवाना हुई एम्बुलेंस और दमकल की गाडिय़ां सायरन बजाती हुई एक के बाद एक तेज गति से स्टेशन में दाखिल हुईं। उनके साथ ही प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी वहां पहुंचे। हथियारबंद पुलिस के जवान भी मौके पर पहुंचे। उनके साथ नागरिक सुरक्षा की टीम भी वाहन में सवार होकर सैन्य स्टेशन पहुंची। रात करीब 7.55 बजे सैन्य स्टेशन से दो एम्बुलेंस में च्घायलोंज् को बाहर लाया गया। उन्हें सेना के अस्पताल ले जाया गया। बताया जाता है कि सैन्य क्षेत्र में यह मॉक ड्रिल युद्ध काल में हमले से जुड़ी थी। जिसमें सेना और पुलिस व प्रशासन सहित विभिन्न विभागों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। मॉक ड्रिल के दौरान जोधपुर मार्ग पर वाहनों का तांता लग गया। यातायात पुलिस ने वाहनों की आवाजाही को सुचारू करवाया। जिला कलक्टर प्रताप सिंह और पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी सहित अन्य अधिकारी मौके पर रहे।

शहर में रहा चर्चाओं का दौर

इस मॉक ड्रिल को लेकर शनिवार सुबह से शहरवासियों के बीच चर्चाओं का दौर जोरों पर रहा। मॉक ड्रिल कहां होगा, यह तथ्य गोपनीय रहा। लोग इसके बारे में पूछताछ करते रहे। साथ ही ब्लैकआउट को लेकर भी लोगों में संशय की स्थितियां रही। गौरतलब है कि इस माह के पहले सप्ताह में भी केंद्र सरकार के निर्देशानुसार सोनार दुर्ग के पास एक काल्पनिक होटल मेंहमले से जुड़ी मॉक ड्रिल को अंजाम दिया गया था। बाद में प्रशासन ने ब्लैकआउट भी करवाया था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैसलमेर में लगातार पांच दिनों तक ब्लैकआउट रखवाया गया था। 7 व 8 मई को जैसलमेर के विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन व मिसाइल हमले की खबरें भी आई। ड्रोन के झुंड को भारतीय सेना के एयर डिफेंस सिस्टम ने आकाश में ही खत्म कर दिया था। उसके बाद लोगों में दहशत का वातावरण भी बना। हालांकि जल्द ही सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों ने भय पर काबू पा लिया और सीमा प्रहरी होने का कर्तव्य निभाया।