
जैसलमेर जिले के सांकड़ा ब्लॉक के 215 विद्यालयों को प्रति विद्यालय 2 लाख रुपए की राशि जारी की गई। समग्र शिक्षा के अंतर्गत एसडीआरएफ मद से निविदाएं आमंत्रित कर कार्य प्रारंभ किया गया। कागजों में मरम्मत तेज रफ्तार से पूरी बताई जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कई सवाल खड़े कर रही है। गौरतलब है कि गत वर्ष जुलाई में झालावाड़ जिले के पीपलोदी गांव में विद्यालय की छत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे के बाद प्रदेशभर में सरकारी स्कूल भवनों का सर्वे कराया गया था।
जर्जर और क्षतिग्रस्त भवनों की सूची बनाकर मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत किया गया, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। कई विद्यालयों में छत की पुरानी कंक्रीट हटाए बिना ही ऊपर नई सीमेंट की परत चढ़ा दी गई। दीवारों के जर्जर प्लास्टर को हटाने के बजाय सीधे नया प्लास्टर कर औपचारिकता निभाई गई। कमरों की दीवारों और पिल्लरों में पड़ी दरारें अब भी स्पष्ट दिख रही हैं। तय मानकों के अनुसार छत की परत तोडक़र नई कंक्रीट बिछानी थी, किनारों को दुरुस्त करना और वाटरप्रूफिंग अनिवार्य थी, लेकिन अधिकांश स्थानों पर इन नियमों की अनदेखी सामने आई है। मरम्मत कार्य पूर्ण दर्शाए गए कई विद्यालयों में स्थिति जोखिमपूर्ण बनी हुई है। आगामी बारिश में छत से पानी टपकने और संरचनात्मक कमजोरी के कारण बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
विद्यालय स्टाफ भी कार्य से संतुष्ट नहीं है। नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर शिक्षकों ने बताया कि दो लाख की स्वीकृत राशि में लगभग पचास हजार रुपए के आसपास ही खर्च दिखाई देता है। शेष राशि के उपयोग को लेकर पारदर्शिता नहीं है। अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक महेश बिस्सा ने शिकायतें मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि सहायक अभियंता को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
18 Feb 2026 11:14 pm
