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कराहती चिकित्सा व्यवस्था पर मरहम, मिलेेंगे 10 नए चिकित्सक

-वर्तमान में चिकित्सकों व चिकित्साकर्मियों की कमी की मार झेल रहा जिला-विषम हालात वाले विशाल जिले की बड़ी समस्या है चिकित्सा सुविधाओं में कमी
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

•

Updated: 24 Jul 2020, 4:46 PM IST

कराहती चिकित्सा व्यवस्था पर मरहम,  मिलेेंगे 10 नए चिकित्सक

कराहती चिकित्सा व्यवस्था पर मरहम, मिलेेंगे 10 नए चिकित्सक

जैसलमेर. चिकित्सकों और चिकित्साकर्मियों की कमी के कारण विगत लम्बे अर्से से कराह रही सीमावर्ती जैसलमेर जिले की चिकित्सा व्यवस्था पर राज्य सरकार ने पोस्ट ग्रेजुएट करने के बाद एपीओ चल रहे दस चिकित्सकों को जैसलमेर जिले में नियुक्ति प्रदान की है। इनमें सबसे ज्यादा चार विशेषज्ञ चिकित्सकों को जिला मुख्यालय स्थित जवाहर चिकित्सालय में पदस्थापित किया गया है। अन्य चिकित्सक पोकरणए भणियाणा और रामगढ़ के साथ जैसलमेर के टीबी अस्पताल में लगाए गए हैं। इससे पहले राज्य सरकार ने जवाहर चिकित्सालय में एक फिजिशियन और एक दंतरोग विशेषज्ञ को गत दिनों नियुक्ति प्रदान की थी।
इन्हें लगाया जैसलमेर में
राज्य सरकार के चिकित्सा विभाग ने बीती देर रात कुल 565 चिकित्सकों को पदस्थापित किया है। जिनमें जैसलमेर जिले को 10 नए चिकित्सक मिले हैं। जिला अस्पताल में एफएम डॉण् छोटेलाल गढ़वालए ट्रोमा सेंटर में ऑर्थो विशेषज्ञ डॉण् गौरव कुमार रेडियोलॉजिस्ट, डॉ. अनिल कुमार पालीवाल और सर्जन डॉ. विनोद साहू को लगाया गया है। ऐसे ही सीएचसी भणियाणा में डॉ. परमेश्वर चौधरी, पोकरण सीएचसी के ट्रोमा सेंटर में डॉ. आशीष गौड़, रामगढ़ पीएचसी में डॉ. अजीत जोया, जैसलमेर में आरसीएचओ डॉ. कुणाल साहूए टीबी हॉस्पीटल जैसलमेर में डॉ. नंदकिशोर मीना और खंड चिकित्सा अधिकारी रामगढ़ के पद पर डॉ. बालकिशन प्रजापत को लगाया गया है। जिला अस्पताल सहित पोकरणए भणियाणा, रामगढ़ और टीबी अस्पताल में रिक्त चल रहे पदों पर नए चिकित्सकों को पदस्थापित किए जाने से चिकित्सा सुविधाओं को तरसते जिलावासियों के लिए सुविधा बढऩे की उम्मीद जगी है।
हकीकत यह भी
-जैसलमेर जिले में चिकित्सा सुविधा की कमी सबसे विकट समस्या के तौर पर विगत वर्षों से बनी हुई है।
-जिले में चिकित्सकों के करीब आधे पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे ही नर्सेज सहित तकनीशियनों की भी बहुत बड़ी कमी के कारण लोग हैरान.परेशान बने हुए हैं।
-जैसलमेर में चिकित्सकों की नियुक्ति किए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल उनके यहां आकर कार्यभार ग्रहण करने और टिके रहने का आता है। -पूर्व में भी सरकार ने समय-समय पर कई चिकित्सकों को जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थापित किया है, लेकिन उनमें से एक-तिहाई भी कार्यभार संभालने नहीं आते।
-सरकार की सख्ती से जो चिकित्सक यहां आते हैं, वे कई कारणों से टिकना नहीं चाहते।
-अब देखना है कि हाल में लगाए गए कितने चिकित्सक यहां आकर कार्यभार संभालते हैं।
संवेदनहीनता दूर होगी
सीमावर्ती जिले में चिकित्सा क्षेत्र की एक प्रमुख समस्या आम रोगियों के प्रति चिकित्सा तंत्र की संवेदनहीनता भी है। पिछले अर्से के दौरान जैसलमेर और पोकरण में तीन.चार ऐसे मामले सामने आएए जिनमें चिकित्सकों पर लापरवाही के संगीन आरोप लगे। ये मामले पुलिस और प्रशासन तक भी पहुंचे हैं। जवाहर चिकित्सालय प्रशासन से लेकर जिले की चिकित्सा का मुख्य तौर पर जिम्मा संभालने वाले जिम्मेदार आमजन के स्वास्थ्य के प्रति स्वयं को उत्तरदायी ही नहीं समझते। कोविड.19 जैसे महामारी के संकट में भी चिकित्सा तंत्र की संवेदनहीनता खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। उम्मीद लगाई जा रही है कि अब समस्या का समाधान हो सकेगा।

फैक्ट फाइल
-39 हजार किमी में फैला जैसलमेर
-01 सरकारी जिला अस्पताल जिले में
-50 फीसदी से ज्यादा चिकित्साकर्मियों के पद चल रहे रिक्त