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फिर कैसे हो पोकरण में दिल बाग-बाग ? जब इनकी नही हो रही सार-संभाल

-पुराने उद्यान हो रहे बदहाल, जिम्मेदारों को नहीं ध्यान

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jaisalmer

फिर कैसे हो पोकरण में दिल बाग-बाग ? जब इनकी नही हो रही सार-संभाल

पोकरण. परमाणुनगरी के रूप में ख्याति अर्जित कर चुके पोकरण में एक भी पार्क ऐसा नहीं है, जहां स्थानीय लोग या फिर सैलानी शांति व सुकून के दो पल ही बिता सके।
गौरतलब है कि कस्बे की ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक व सामरिक पहचान के चलते यहां आने वाले हजारों देशी विदेशी पर्यटकों के लिए ठहरने, मनोरंजन व बड़े उद्यान नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों व यहां आने वाले पर्यटकों को मायूस होना पड़ रहा है। हालांकि कस्बे में नेहरु बालोद्यान के नाम से एक पुराना उद्यान है, जिसका निर्माण 50 वर्ष पूर्व नगरपालिका की ओर से करवाया गया था। अब यह उद्यान कस्बे के बीचोंबीच आबादी क्षेत्र में होने, इसके चारों तरफ कियोस्क आवंटन कर दिए जाने आसपास क्षेत्र में अतिक्रमण हो जाने, इसका रख रखाव नहीं होने के कारण उद्यान का कोई महत्व, औचित्य नहीं रह गया है। यह उद्यान अब शराबियोंं, जुआरियों व समाजकंटकों की आराम स्थली बन गया है।मनचलों का अड्डा बन गया है। ऐसे में यहां पर्यटकों व स्थानीय लोगों के मनोरंजन व विश्राम के लिए एक सुंदर, आकर्षक व बड़े उद्यान की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है।
फैक्ट फाइल
- 25 हजार आबादी निवास करती है पोकरण नगर में
- 5 किमी से अधिक क्षेत्र में फैला है कस्बा का दायरा
- 10 से अधिक पर्यटन स्थल यहां रिझाते है मेहमानों को
- 10 लाख से अधिक श्रद्घालु व सैलानी आते है हर साल