
लोकतांत्रिक तरीके से जताया विरोध, सरकार ने नहीं संवाद: लखारा
जैसलमेर. विभिन्न शिक्षक समस्याओं के निराकरण को लेकर राज्य सरकार के कथित तौर पर उपेक्षापूर्ण निर्णय को लेकर राष्ट्रीय शिक्षण संघ के आंदोलन के क्रम में रविवार को पत्रकार वार्ता का आयोजन हुआ। प्रदेश महामंत्री महेन्द्र लखारा ने बताया कि संगठन की ओर से बार-बार आग्रह करने व लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताए जाने के बाद भी सरकार ने न तो संगठन से कोई संवाद स्थापित किया और न ही अपने स्तर पर कोई कार्यवाही की। संगठन ने गत वर्षों में लगातार राज्य सरकार के समक्ष सभी स्तरों एवं माध्यमों द्वारा संपर्क कर आग्रह किया, लेकिन समस्याओं को हल करने को लेकर कोई सार्थक प्रयास नहीं हुए। ऐसे में व्यथित प्रदेश के शिक्षक अब आंदोलन की राह अपनाने को बेबस है। जिलाध्यक्ष अनोपसिंह ने कहा कि अंतिम प्रयास के रूप में संगठन ने गत 23 फरवरी से 5 मार्च के बीच विधायकों को गठन का 11 सूत्री मांगों का ज्ञापन प्रेषित कर आग्रह किया कि शिक्षकों की न्यायोचित मांगों के निराकरण के लिए सरकार से उचित निराकरण करवाने में सहयोग करें। इस दौरान 11 सूत्रीय मांगों के बारे में जानकारी देते हुए जिला मंत्री नटवर व्यास ने कहा कि संगठन ने शिक्षक हित की समस्याओं का समाधान करने के लिए आंदोलन की राह अपनाई है। उन्होंने वेतन विसंगतियों के निराकरण के लिए गठित सांवत एवं खेमराज कमेटियों को तत्काल सार्वजनिक कर लागू करने, सभी राज्य कर्मचारियों को 8-16-24-32 वर्ष पर एसीपी का लाभ देकर पदोन्नति लाभ देने, एनपीएस कार्मिकों के लिए लागू हुई पुरानी पेंशन योजना की तकीनिकी खामियों को दुरुस्त करते हुए एनपीएस फंड की राशि शिक्षकों को देने के साथ-साथ जीपीएफ के खाता संख्या जारी करने, संम्पूर्ण सेवा काल में परिवीक्षा अवधि एक बार एक वर्ष के लिए हो और नियमित वेतन शृंखला में फिक्सेशन के समय परिवीक्षा अवधि को भी जोडऩे, शिक्षा विभाग की ऑनलाइन निर्भरता को देखते हुए राज्य के सभी शिक्षकों एवं संस्था प्रधानों को मासिक इंटरनेट भत्ता व एंड्राइड फोन उपलब्ध करवाने, राज्य कर्मचारियों को सेवा निवृत्ति के समय 300 उपार्जित अवकाशों की सीमा को समाप्त करने तथा सेवानिवृति के बाद 65,70 एवं 75 वर्ष की आयु पूर्ण कर क्रमश: 5,10 व 15 प्रतिशत पेंशन वृद्धि करने सहित 11 सूत्रीय मांगों की जानकारी दी। जिलाध्यक्ष अनोपसिंह ने बताया कि राज्य की समस्त शिक्षक संवर्ग की समस्त मांगों का तत्काल निराकरण नहीं कराए जाने पर संगठन को उग्र आंदोलन के लिए विवश होना पड़ेगा।
Published on:
12 Mar 2023 07:55 pm
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