
पर्यटननगरी में सर्दी के मौसम में हजारों लोग पीने के पानी का संकट झेलने के लिए विवश बने हुए हैं। शहर के ज्यादातर इलाकों में पिछले 4 से 6 दिनों तक नल सूखे पड़े हैं और लोग 500 से 1000 रुपए खर्च कर पानी के टैंकर मंगवाकर और रोजाना 50 से 100 रुपए खर्च कर आरओ से पीने के पानी का बंदोबस्त करते हुए व्यवस्था को कोस रहे हैं। उधर, जिम्मेदारों के पास इस सब अव्यवस्थाओं को लेकर रटा-रटाया तकनीकी खामियों, विद्युत आपूर्ति में ट्रिपिंग व लाइन के लीकेज आदि के बहाने हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि मोहनगढ़ हैडवक्र्स से जैसलमेर शहर की जरूरत भर का पानी पिछले 6 दिनों में एकमात्र दिन को छोड़ कर मिल रहा है। शहरी उपभोक्ताओं का आक्रोश सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से सामने आ रहा है।
जैसलमेर शहर में प्रतिदिन पानी की खपत करीब 15 एमएल यानी 150 लाख लीटर तक होती है, जिसमें सर्दी का मौसम जोड़ कर देखा जाए तो यह पूर्णतया पर्याप्त है। जहां तक वर्तमान में जैसलमेर को मोहनगढ़ हैडवक्र्स से मिलने वाले पानी का सवाल है, उसमें एक दिन को छोड़ कर कोई बहुत बड़ी कमी नहीं आई है। सूत्रों के अनुसार जैसलमेर में गत 1 जनवरी को 15.21, 2 तारीख को 15.01, 3 को 15.07, 4 को 14.71, 5 को 5.31 और 6 तारीख को 9.2 मिलियन लीटर पानी मिला। सवाल यह उठता है कि जल उत्पादन में बड़ी समस्या तो 5 जनवरी को हुई तो उससे पहले के दिनों में संकट की स्थितियां क्यों बनी?
वर्तमान में पिछले कई महीनों से शहर की जलापूर्ति व्यवस्था समय-समय पर डगमगाती रही है। इसके लिए अलग-अलग कारणों का हवाला दिया जाता है। जबकि वास्तविकता यह है कि जलदाय विभाग के अधिकारी जलापूर्ति व्यवस्था के प्रबंधन में विफल साबित हो रहे हैं। अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल भी नहीं है। वे आमजन की समस्या के प्रति जवाबदेही भी नहीं दर्शाते हैं। उन्हें 4-6 दिनों बाद की जलापूर्ति में भी कोई खोट नजर नहीं आती। जबकि गत सोमवार को विधायक छोटूसिंह भाटी ने भी पेयजल संकट की स्थिति को स्वीकार किया था।
लाइनों में लीकेज और अन्य तकनीकी कारणों से जलापूर्ति में कमी आई है। हालांकि अब शहर के सभी क्षेत्रों में सामान्य ढंग से जलापूर्ति की जा रही है।
Published on:
07 Jan 2025 11:36 pm
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