
जैसलमेर में प्रतिवर्ष लाखों की तादाद में आने वाले देशी सैलानियों के लिए आने वाले समय में पाकिस्तान की सीमा से सटे चमत्कारी तनोटराय देवी का मंदिर व उसके आसपास का क्षेत्र सबसे बड़ा आकर्षण बन सकेगा। मौजूदा समय में भी तनोटराय के दर्शन करने वर्ष पर्यंत श्रद्धालु राजस्थान के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचते हैं। यह सिलसिला आने वाले समय में और तेज होगा, इसके लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें कटिबद्धता जता रही हैं। जैसलमेर के पड़ोसी जोधपुर सांसद और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने राज्यसभा में बताया कि राजस्थान में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले 3 वर्षों में 2856.62 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है। उन्होंने बताया कि इसमे सबसे प्रमुख रूप से तनोट कॉम्प्लेक्स, जैसलमेर सेक्टर में सीमा पर्यटन के विकास के लिए सर्वाधिक 1767.66 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई। जिसमें से 883.83 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा चुकी है।
जैसलमेर के भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनोटराय मंदिर के प्रति देश-प्रदेश के लोगों में श्रद्धा का भाव है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे होने के अलावा इस मंदिर क्षेत्र में युद्ध के दौरान पाकिस्तान की तरफ से गिराए गए हजारों बमों के नाकाम साबित हो जाने के कारण यह देवी मंदिर चमत्कारिक माना जाता है। मंदिर की प्रसिद्धि मनौतीपूर्ण करने के तौर पर भी है। इन्हीं सब कारणों से जैसलमेर भ्रमण पर आने वाले देशी सैलानियों का बहुत बड़ा हिस्सा तनोटराय के दर्शन करने पहुंचता है। सीमा सुरक्षा बल के प्रबंधन में संचालित तनोटराय मंदिर क्षेत्र के विकास को लेकर देश व सूबे की सरकारों का रुख देखते हुए स्पष्ट है कि आने वाला समय इस मंदिर सहित समूचे तनोट कॉम्पलेक्स को ऊंचाइयों पर ले जाने वाला होगा। गौरतलब है कि गत राज्य सरकार ने जिले की सम तहसील के तनोट गांव में राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम-1956 की धारा 102 के अंतर्गत 2.19 बीघा भूमि नि:शुल्क आवंटन किया था। दो साल पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तनोट मंदिर परिसर परियोजना की आधारशिला रखी थी। मंदिर क्षेत्र में इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैफेटेरिया, प्रतीक्षालय व चित्र दीर्घा का निर्माण करवाया जाना प्रस्तावित है।
Published on:
13 Feb 2025 11:31 pm
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