23 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Jaisalmer: रेतीले धोरों में मूंगफली की खेती से बदल रही किसानों की तकदीर, बढ़ रही समृद्धि

इंदिरा गांधी नहर के सिंचित नाचना क्षेत्र में रेतीले धोरों के बीच मूंगफली की खेती किसानों की आर्थिक तस्वीर बदल रही है। पिछले आठ वर्षों से लगातार मिल रही बंपर पैदावार और बेहतर मुनाफे के चलते किसान परंपरागत फसलों की बजाय अब मूंगफली को खरीफ की प्रमुख नकदी फसल के रूप में अपना रहे हैं। आसपास के गांवों में भी इसका रकबा तेजी से बढ़ रहा है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जैसलमेर

•

image

Deepak Vyas

•

Updated: 18 Jun 2026, 8:56 PM IST

nachna news photo

नाचना क्षेत्र के खेतों में लहराती मूंगफली की फसल।

नाचना. कभी बाजरा, मूंग, मोठ और ग्वार की परंपरागत खेती के लिए पहचाना जाने वाला इंदिरा गांधी नहर का सिंचित नाचना क्षेत्र अब मूंगफली उत्पादन का नया केंद्र बनता जा रहा है। रेतीले धोरों में पिछले आठ वर्षों से लगातार मिल रही बंपर पैदावार ने किसानों की आय बढ़ाने के साथ खेती की तस्वीर भी बदल दी है। बेहतर उत्पादन और लाभ मिलने से अब आसपास के गांवों के किसान भी खरीफ मौसम में मूंगफली की खेती को प्राथमिकता देने लगे हैं। कभी इस क्षेत्र में मूंगफली की खेती सीमित थी, लेकिन किसानों ने प्रयोग के तौर पर इसकी बुवाई शुरू की। अनुकूल परिणाम मिलने के बाद इसका रकबा लगातार बढ़ता गया। मौजूदा समय में नाचना क्षेत्र में मूंगफली किसानों की सबसे भरोसेमंद नकदी फसलों में शामिल हो चुकी है।

हर बीघा दे रहा बेहतर उत्पादन

किसानों के अनुसार पर्याप्त नहरी सिंचाई और समय-समय पर होने वाली बारिश से एक बीघा भूमि में औसतन 8 से 10 क्विंटल तक मूंगफली का उत्पादन मिल रहा है। खेती पर बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, बिजली, डीजल, बुवाई और कटाई सहित लगभग 18 से 20 हजार रुपए खर्च आता है, लेकिन अच्छी पैदावार लागत के मुकाबले बेहतर मुनाफा दिला रही है। किसानों का कहना है कि मूंगफली की सफलता का सबसे बड़ा आधार समय पर मिलने वाला नहरी पानी है। यदि सिंचाई नियमित रहे और मौसम साथ दे तो यह फसल किसानों की आर्थिक स्थिति बदलने की क्षमता रखती है। इस वर्ष भी समय पर नहरी पानी मिलने से अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है।

अब बढ़ रहा खेती का दायरा

मूंगफली की लगातार सफलता का असर आसपास के गांवों में भी दिखाई देने लगा है। पहले जहां किसान परंपरागत खरीफ फसलों तक सीमित थे, वहीं अब अधिक मुनाफे की संभावना को देखते हुए बड़ी संख्या में किसान मूंगफली की खेती अपना रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यही रुझान बना रहा तो आने वाले वर्षों में नाचना क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख मूंगफली उत्पादक इलाकों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।

एमएसपी खरीद सीमा बढ़े तो मिलेगा पूरा लाभ

नाचना क्षेत्र में पिछले आठ वर्षों से मूंगफली की शानदार पैदावार हो रही है। सहकारी समिति हर वर्ष एमएसपी पर खरीद करती है, लेकिन प्रति किसान 40 क्विंटल की सीमा होने से पूरा लाभ नहीं मिल पाता। यदि खरीद सीमा बढ़ाकर 80 क्विंटल कर दी जाए तो किसानों की आय और बढ़ सकती है।

— लतीफ शेख, किसान, नाचना

बेहतर मुनाफे से बढ़ा किसानों का भरोसा

नहरी सिंचाई की उपलब्धता से लगातार अच्छी पैदावार मिल रही है। यही वजह है कि खरीफ सीजन में हर साल अधिक किसान मूंगफली की खेती अपना रहे हैं। आने वाले समय में इसका रकबा और बढ़ने की पूरी संभावना है।

— मुरलीधर सुथार, किसान, नाचना