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Jaisalmer: लाइट का ‘झटका’ लगते ही जलापूर्ति को मारता है ‘लकवा’…वैकल्पिक उपायों की कवायद

मोहनगढ़ हेडवर्क्स पर बिजली आपूर्ति बाधित होने से जैसलमेर शहर और आसपास के गांवों की पेयजल व्यवस्था बार-बार संकट में पड़ रही है। हालिया अंधड़ के बाद जलापूर्ति में तीन से पांच दिन तक का अंतराल आने से लोगों को निजी टैंकर और ट्रैक्टरों से पानी मंगवाने पर मजबूर होना पड़ा। अब जलदाय विभाग ने डाबला और राजवाई के ट्यूबवेलों को जोड़कर वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था विकसित करने की करीब दो करोड़ रुपए की योजना तैयार की है।
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जैसलमेर. पेयजल किल्लत होने पर ट्रेक्टर से पानी खरीदने की होती है मजबूरी।

जैसलमेर. जैसलमेर शहर सहित आसपास के गांवों की जलापूॢत मौजूदा समय में मुख्यत: बाड़मेर लिफ्ट परियोजना के मोहनगढ़ स्थित हेडवर्क्स पर निर्भर है। ऐसे में वहां पर बिजली आपूर्ति में आने वाले व्यवधान से जैसलमेर की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से डगमगा जाती है। जैसा, हाल में आए अंधड़ के दौरान देखने में आया। अंधड़ से मोहनगढ़ लाइन के टावर गिरने से हेडवर्क्स पर कई घंटों तक बिजली सप्लाई बंद रही। इससे जैसलमेर की जलापूर्ति व्यवस्था में कम से कम तीन दिन और और कहीं-कहीं चार से पांच दिन का अंतराल आ गया।

लोगों को सैकड़ों रुपए खर्च कर ट्रेक्टर से पानी मंगवाना पड़ा। दूसरी तरफ जैसलमेर के गजरूपसागर फिल्टर प्लांट से मोहनगढ़ हेडवर्क्स तक नई पाइप लाइन बिछाने और जल संग्रहण के बड़े पैमाने पर बंदोबस्त के लिए करीब 196 करोड़ रुपए की योजना को अमलीजामा में लगने वाले कम से कम दो साल की अवधि को देखते हुए वैकल्पिक उपायों की तरफ जिम्मेदारों का ध्यान गया है। जानकारी के अनुसार देवा-पोहड़ा पेयजल योजना लाइन के पिलर्स पर वर्षों से बेकार पड़े पाइपों को निकाल कर उन्हें डाबला और राजवाई गांवों में स्थित जलदाय विभाग के ट्यूबवैलों से जोड़ कर बबर मगरा और इंदिरा कॉलोनी स्थित टंकियों तक पानी पहुंचाए जाने की योजना तैयार की गई है। इस योजना का मसौदा बना कर विभागीय उच्चाधिकारियों के सामने पेश किया गया है। यह योजना करीब दो करोड़ रुपए की लागत से क्रियान्वित होनी है। जब मोहनगढ़ हेडवक्र्स पर विद्युत व्यवस्था बंद हुई थी, उसके कारण शहर व आसपास के गांवों की सप्लाई 3-4 दिनों के अंतराल में चली गई थी। आने वाले समय में जैसलमेर में पर्यटन सीजन की शुरुआत हो जाएगी। हजारों पर्यटकों की आवक होने से होटलों और रेस्टोरेंट्स से लेकर गेस्ट हाउस आदि में पानी की मांग बढ़ जाती है।

40 से 50 लाख लीटर पानी की व्यवस्था

विभागीय सूत्रों ने बताया कि देवा-पोहड़ा लाइन के पाइपों को डाबला व राजवाई ट्यूबवैलों से जोड़ कर जैसलमेर शहर में प्रतिदिन 40 से 50 लाख लीटर अतिरिक्त पानी पहुंचाया जा सकता है। जिससे बबर मगरा से इंदिरा कॉलोनी तक के क्षेत्र में जलापूर्ति हो सकेगी। गौरतलब है कि देवा-पोहड़ा पेयजल योजना कई वर्षों पहले नहरी पानी को गजरूपगसार तक पहुंचाने के लिए क्रियान्वित की जाती थी। कुछ साल पहले मोहनगढ़ स्थित हेडवर्क्स से गजरूपसागर तक पाइप लाइन बिछ जाने और उसके जरिए जलापूर्ति होने लगी, उसके बाद से देवा-पोहड़ा लाइन और वहां लगी पम्प मशीनरी बेकार पड़ी है।

फैक्ट फाइल -

- 18 एमएल पानी की रोजाना खपत

- 4-5 एमएल अतिरिक्त पानी नई योजना से संभव

- 60 किमी दूर है मोहनगढ़ हेडवर्क्स

बोले जिम्मेदार - योजना स्वीकृत होने पर शुरू हो सकेगा काम

बिजली व्यवस्था दुरुस्त होने से वर्तमान में मोहनगढ़ हेडवक्र्स से करीब 13.5 मिलियन लीटर पानी का प्रोडक्शन हो रहा है। जरूरत का शेष पानी डाबला और गजरूपसागर स्थित ट्यूबवैलों से मिल जाता है।

-गोपालसिंह मीणा, सहायक अभियंता, परियोजना खंड, जलदाय

योजना का प्रस्ताव बना कर उच्चाधिकारियों को सौंपा गया है। योजना स्वीकृत होने पर इस दिशा में काम शुरू हो सकेगा। जैसलमेर ़शहर में प्रतिदिन करीब 18 मिलियन लीटर पानी की जरूरत रहती है।

-निरंजन मीणा, अधिशासी अभियंता नगरखंड, जलदाय विभाग, जैसलमेर