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सरहदी जिले के पोकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा सूअरों का स्वच्छंद विचरण से अब बच्चों व बुजुर्गों पर खतरा मंडरा रहा है। गुरुवार को एक बच्चे की मौत की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। कस्बे के विभिन्न गली मोहल्लों और मुख्य मार्गों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सूअरों का जमावड़ा लगा रहता है।
ये सूअर इतने उग्र हो चुके है कि अकेले जा रहे बच्चों और बुजुर्गों पर सीधे हमला कर देते है। बीते कुछ माह में ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी है। गुरुवार को सांकड़ा क्षेत्र के प्रतापपुरा खेलाना गांव में सूअर के हमले में एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि उसके ताऊ गंभीर घायल हो गए। इससे पूर्व भी क्षेत्र के अजासर गांव में एक महिला अपने बच्चे को बचाने के प्रयास में सूअर के हमले में घायल हो गई थी। इसके अलावा कस्बे में भी सूअरों के हमले की कई घटनाएं हो चुकी है। लगातार हो रही घटनाओं से कस्बेवासियों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे लोगों में भय व दहशत का माहौल है। गांवों में बढ़ती सूअरों की तादाद से ग्रामीण अपने बच्चों को विद्यालय भेजने से भी कतरा रहे है।
सूअरों का बढ़ता स्वच्छंद विचरण मुख्य सड़कों और चौराहों पर भी दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। आए दिन ये सड़कों पर दौड़ते वाहनों के नीचे आ जाते है। वाहन चालक इन्हें बचाने के प्रयास में अचानक ब्रेक लगाते है और असंतुलित होकर गिर जाते है। मुख्य सड़कों पर बड़े वाहनों व कार-जीप के भी दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके जिम्मेदारों की ओर से सूअरों को पकडऩे को लेकर कोई कवायद नहीं की जा रही है।
सूअरों के आतंक की मार केवल कस्बे तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के किसान भी इससे परेशान है। किसानों ने बताया कि झुंड के झुंड सूअर खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को जड़ों से उखाड़ फेंकते है। जिससे फसलें बर्बाद हो रही है और किसानों को लाखों का नुकसान हो रहा है।
ये जानवर कस्बे व गांवों में गंदगी भी फैला रहे है। नालियों और कीचड़ में मुंह मारने के बाद सूअर कचरा सड़कों पर फैला देते है, जिससे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है। गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। ऐसे में बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है।
क्षेत्र में सूअरों के बढ़ते स्वच्छंद विचरण पर अधिकारियों को पाबंद किया गया है। कस्बे में नगरपालिका और ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत समिति के माध्यम से सूअरों को पकडऩे और आबादी से दूर जंगल में भिजवाकर निस्तारण के लिए कार्य किया जा रहा है।
Published on:
13 Mar 2026 08:29 pm
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