
पोकरण का रण खत्म, अब परिणाम पर नजर
पोकरण. पंचायतीराज चुनाव के अंतर्गत सरपंचों व वार्डपंचों के निर्वाचन के बाद दूसरे चरण में जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों का निर्वाचन हो रहा है। जिनके लिए चार चरणों में मतदान प्रक्रिया चल रही है। सदस्यों के निर्वाचन के बाद प्रधान व जिला प्रमुख तथा उपप्रधान व उपजिला प्रमुख का निर्वाचन होगा। गांव की सरकार बनने के बाद प्रधान व प्रमुखों के लिए हो रहे सदस्यों के निर्वाचन के अंतर्गत भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से सटे सरहदी जैसलमेर जिले की परमाणु नगरी पोकरण में मतदान संपन्न हो चुका है। पोकरण विधानसभा क्षेत्र से जिला परिषद के नौ तथा तीन पंचायत समितियों में एक प्रत्याशी निर्विरोध होने के बाद 48 सदस्य चुने जाएंगे। ये सदस्य प्रधान व जिला प्रमुख का चुनाव करेंगे। ऐसे में जिले की राजनीति में पोकरण का प्रमुख स्थान माना जाता है। कई मौकों पर नजर डालें, तो पोकरण विधानसभा क्षेत्र से चुने गए सदस्य ही आगे जाकर जिला प्रमुख निर्वाचित हुए है। ऐसे में पोकरण क्षेत्र में कड़ाके की ठंड के मौसम में भी चुनावी हलचल की गर्माहट महसूस की जा रही है। 23 नवम्बर को पंचायत समिति नाचना तथा 27 नवम्बर को पंचायत समिति सांकड़ा व भणियाणा क्षेत्र में मतदान संपन्न हो चुका है। जिसकी मतगणना आगामी आठ दिसम्बर को होगी, लेकिन चुनावी चौपाळों पर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है।
पोकरण में रहेगा दारोमदार
जिला परिषद में कुल 17 वार्ड है। जिसमें से नौ वार्ड पोकरण विधानसभा तथा आठ वार्ड जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र है। हालांकि दोनों विधानसभाओं से वर्तमान में कांग्रेस के विधायक निर्वाचित है, लेकिन पंचायतीराज चुनावों में मतदाताओं का रुझान किस तरफ रहा है, यह अभी तक भविष्य के गर्भ है। पोकरण विधानसभा क्षेत्र से अधिक संख्या में जिस पार्टी के प्रत्याशी विजयी हासिल करेंगे, उस पार्टी के जिला प्रमुख के दावेदार का पलड़ा भारी रहने की संभावना है।
वोटों के धु्रवीकरण की भी आशंका
पोकरण विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम व राजपूत समाज एवं उसके बाद अनुसूचित जाति व जनजाति के मतदाताओं का बाहुल्य है। परंपरागत रूप से राजपूत भाजपा, तो मुस्लिम व एससी एसटी कांग्रेस के माने जाते है। इस बार का पंचायतीराज चुनाव कुछ अलग तरह से रहा है। कांग्रेस में जिला स्तर पर दो गुट हो जाने के कारण एससी एसटी वोटों का बिखराव माना जा रहा है। वहीं, पोकरण क्षेत्र में मुस्लिम लोगों की ओर से कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी खड़ा कर दिए जाने से भी कांग्रेस को नुकसान होता नजर आ रहा है। यदि भाजपा की बात करें, तो इस बार पार्टी की ओर से सभी वार्डों में अपने प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारे गए। कई जगहों पर निर्दलीय प्रत्याशियों को समर्थन दिया गया तथा कुछ जगहों पर कांग्रेस से बगावत कर खड़े हुए मुस्लिम प्रत्याशियों को समर्थन दिए जाने के कारण कार्यकर्ताओं में नाराजगी व मायूसी नजर आई। ऐसे में यदि इस प्रकार वोटों का धु्रवीकरण हुआ है, तो परिणाम चौंकाने वाले भी साबित हो सकते है।
कंधों के सहारे सीटों पर कब्जे का प्रयास
पंचायत समिति सांकड़ा में गत 25 वर्षों से कांग्रेस का कब्जा चल रहा हैै। इस बार सांकड़ा से अलग होकर भणियाणा पंचायत समिति नई बनी है। जैसलमेर पंचायत समिति से अलग कर नाचना को नई पंचायत समिति बनाया गया है। इन क्षेत्रों में प्रत्येक चुनाव में कांग्रेस का दबदबा रहा है। जबकि भाजपा ने कई सीटों पर कांग्रेस के बागियों व निर्दलीयों को समर्थन दिया है। ऐसे में भाजपा ने इन कंधों के सहारे सत्ता हथियाने का प्रयास किया है। जबकि कांग्रेस अपने परंपरागत मतदाताओं के भरोसे मैदान में उतरी तथा जीत को दावे भी कर रही है।
फैक्ट फाइल:-
- 9 जिला परिषद वार्ड है पोकरण विधानसभा क्षेत्र में
- 3 पंचायत समितियों में हुए है चुनाव
- 48 समिति सदस्य के लिए हुआ मतदान
Published on:
29 Nov 2020 07:36 pm
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