
राजनीतिक हलचल: संकट में भी एकजुट नहीं जैसलमेर कांग्रेस !
जैसलमेर. पार्टी में अंदरूनी फूट की वजह से प्रदेश की कांग्रेस सरकार अभी तक संकट में है। पार्टी की लड़ाई राज्यपाल बनाम मुख्यमंत्री और राज्य बनाम केंद्र में बदल चुकी है। इसके बावजूद सीमावर्ती जैसलमेर जिले में सत्ताधारी पार्टी दो धाराओं में अब भी बंटी हुई नजर आ रही है। यह इसके बावजूद है कि जिले की राजनीति के दोनों ध्रुव पोकरण विधायक तथा केबिनेट मंत्री शाले मोहम्मद और जैसलमेर विधायक रूपाराम धणदे प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खेमे में शामिल हैं। शाले मोहम्मद तो पहले से ही मुख्यमंत्री के साथ थे लेकिन रूपाराम धणदे की गिनती पूर्व में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के समर्थकों में होती थी। निर्णायक संकट में जैसलमेर विधायक ने बहुमत वाले गहलोत गुट का दामन थाम लिया। इस तरह से जैसलमेर में कांग्रेस के दोनों अलंबरदारों का जयपुर में एक नेतृत्व के साथ आ जाने के बावजूद जिला कांग्रेस में धड़ेबाजी मिटने का नाम नहीं ले रही।
साफ नजर आई दूरी
मंत्री और विधायक समर्थकों के बीच की दूरी गत शनिवार को प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर जिला कांग्रेस कार्यालय में किए गए धरना.प्रदर्शन में भी साफ दिखाई दी। एक जाजम पर बैठने के बावजूद दोनों खेमों के नेता और उनके समर्थक खांचों में बंटे नजर आए। विधायक गुट के लोगों ने प्रदर्शन से एक दिन पहले ही जिला कांग्रेस संगठन पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा था कि फिलहाल पार्टी का कोई जिलाध्यक्ष या कार्यकारिणी नहीं रह गई है। धरना स्थल यानी पार्टी कार्यालय में हाल में बगावत के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए गए सचिन पायलट के फोटो को हटाए जाने के मुख्यमंत्री समर्थकों के कदम की भी दबी जुबान में दूसरे खेमे ने आलोचना की। हालांकि विधायक के मुख्यमंत्री गुट में शामिल हो जाने की वजह से वे खुलकर सचिन पायलट का समर्थन भी नहीं कर पा रहे हैं।
हकीकत यह भी
कोरोना तथा राज्य स्तर पर चल रहे संकट की वजह से जमीन पर तो कांग्रेस के कार्यकर्ता कम ही इक_ा हो पा रहे हैं लेकिन उनकी अंतर्कलह सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर खूब नजर आती है। मंत्री व विधायक के समर्थक किसी न किसी बहाने एक दूसरे को नीचा दिखाने में अब भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे। गत दिनों जैसलमेर जिले में 10 नए चिकित्सकों की नियुक्ति के सरकारी आदेश का श्रेय दोनों खेमों ने अपने.अपने नेता को देने का पूरा प्रयास किया। कांग्रेस से जुड़े वॉट्सएप गु्रपों के साथ फेसबुक पर दोनों खेमों के कार्यकर्ताओं की तनातनी की स्थिति पहले की भांति अब तक बनी हुई है। पार्टी के ये कार्यकर्ता इतने अधिक बंटे हुए हैं कि उनके निशाने पर विपक्षी भाजपा से ज्यादा अपनी ही पार्टी का दूसरा धड़ा रहता है।
Published on:
27 Jul 2020 09:57 am
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