
अनार को रास आई जैसलमेर की मरुभूमि
पोकरण. दूर-दूर तक रेगिस्तानी क्षेत्र में बसे भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय बोर्डर से सटे सरहदी जिले जैसलमेर की मरुभूमि, जहां वर्षों पूर्व पानी के लिए ग्रामीणों को मशक्कत करनी पड़ती थी, आज अनार जैसे फलों की खेती होने लगी है। जिससे किसानों को प्रतिवर्ष लाखों रुपए की आमदनी हो रही है। समय के साथ किसानों का रुझान अनार की खेती की तरफ बढऩे लगा है। गौरतलब है कि पश्चिमी राजस्थान के विस्तृत भू-भाग में फैले जैसलमेर जिले की सबसे बड़ी विधानसभा पोकरण क्षेत्र में अनार की खेती की तरफ किसानों का रुख बढ़ रहा है। क्षेत्र में करीब 200 हेक्टेयर में अनार के पौधे लहलहा रहे है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत अनुदान मिलने से भी किसानों का रुझान बढ़ रहा है। हालांकि अनार विक्रय करने के लिए किसानों को उचित प्लेटफार्म व बाजार नहीं मिल रहा है, लेकिन किसान अनार की खेती की तरफ बढ़ रहे है।
40 रुपए का पौधा, तीन साल की मेहनत
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अनार की खेती करने वाले किसानों को 40 रुपए में पौधा उपलब्ध हो जाता है। एक बार पौधा लगाने के बाद तीन साल तक किसान को मेहनत करनी होती है। पौधे को बूंद-बूंद सिंचाई से जोड़कर उसकी देखभाल करना आवश्यक है। तीन साल के बाद पौैधा फल देना शुरू करता है तथा 15 से 20 साल तक फल देता है। जिससे किसानों को खासा लाभ होता है।
एक हेक्टेयर में 800 पौधे, 150-200 क्विंटल पैदावार
खेत में एक हेक्टेयर में 800 पौधे लगाए जा सकते है। एक से दूसरे पौधे में 14 से 10 फीट की दूरी आवश्यक है। पौधा लगाने और तीन साल तक उसकी देखभाल करने के बाद जब फल देने की शुरुआत होती है, तब एक हेक्टेयर से 150 से 200 क्विंटल तक पैदावार होती है। एक पौधे पर 20-25 किलो तक पैदावार होती है। सीजन के दौरान अनार के 20 रुपए प्रतिकिलो तक भाव मिल जाते है। जिससे किसानों को अच्छी आमदनी होती है।
यह है अनुदान योजना
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत अनार की खेती करने पर पौधे पर 40 प्रतिशत तक अनुदान मिल जाता है। इसके लिए कृषि विभाग की पंजीकृत पौधशाला से पौधे खरीदना आवश्यक होता है। पौधा लगाने व उसके तैयार होने तक तीन किस्तों में रख रखाव के लिए किसान को प्रतिहेक्टेयर 28 हजार रुपए की राशि भी दी जाती है। साथ ही बूंद-बूंद सिंचाई का प्लांट लगाने पर भी 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।
पोकरण में 30 हजार क्विंटल अनार हो रहे उत्पादित
पोकरण क्षेत्र के कई गांवों में किसानों की ओर से अनार की खेती की जा रही है। जिसके अंतर्गत राजमथाई व बांधेवा में 150 हेक्टेयर, पदरोड़ा में पांच हेक्टेयर, छायण में 10 हेक्टेयर, सादा में चार हेक्टेयर, आसकंद्रा में आठ हेक्टेयर तथा नहरी क्षेत्र नाचना व मदासर में 25 हेक्टेयर में अनार की खेती की जा रही है। एक अनुमान के अनुसार कुल 200 हेक्टेयर में करीब 30 हजार क्विंटल तक प्रतिवर्ष अनार उत्पादित हो रहे है।
मार्केट मिले, तो बढ़ेगा रुझान
अनार की खेती के लिए चिकनी, दोमट, रेतीली जमीन तथा मीठे पानी की आवश्यकता होती है। पोकरण क्षेत्र की मिट्टी अनार की खेती के लिए उपयुक्त है तथा कई किसान खेती कर भी रहे है। यदि अनार बेचने के लिए उन्हें बाजार उपलब्ध हो जाता है, तो किसानों का रुझान भी बढ़ सकता है।
- राधेश्याम नारवाल, सहायक उपनिदेशक उद्यान कृषि विभाग, जैसलमेर।
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Published on:
31 May 2021, 8:22 PM IST
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