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आशियानों को छू रही बिजली की लाइनें, हर पल मंडरा रहा हादसे का खतरा

पोकरण. कस्बे के गली-मोहल्लों में वर्षों पूर्व लगाई गई विद्युत लाइनों के घरों के पास से गुजरने के कारण हादसे की आशंका बनी हुई है।

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पोकरण. कस्बे के गली-मोहल्लों में वर्षों पूर्व लगाई गई विद्युत लाइनों के घरों के पास से गुजरने के कारण हादसे की आशंका बनी हुई है। गौरतलब हैै कि वर्षों पूर्व कस्बे की आबादी कम थी, तब डिस्कॉम की ओर से विद्युतीकरण करते हुए कस्बे में विद्युत पोल व तारें लगाई गई थी। इस दौरान मकान ज्यादा नहीं थे। समय के साथ हुए बदलाव के चलते मकानों की संख्या भी बढ़ गई और नए मकानों के निर्माण के साथ आवश्यकता के चलते ऊंची एवं दो व तीन मंजिला इमारते भी बनने लगी है। साथ ही मकानों की ऊपरी इमारतों के आगे बालकॉनी का भी निर्माण करवाया जा रहा है। ऐसे में विद्युत तारें मकानों को छूती हुई निकल रही है। जिससे किसी व्यक्ति या बच्चे के तारों की चपेट में आ जाने से हादसा होने की आशंका बनी रहती है।

यहां सबसे ज्यादा खतरा

कस्बे में सर्वाधिक समस्या सूरजप्रोल के पास, चौधरियों की गली, गांधियों की गली, भास्कर मोहल्ला, एको की प्रोल, जोधनगर, जटावास, मंगलपुरा, पुरोहितों की गली, गणेश मंदिर के पास बनी हुई है। यहां घरों से छूकर विद्युत लाइनें निकली हुई है। जिसके कारण हर समय दुर्घटना का अंदेशा बना हुआ है।

आंधी व बारिश में बढ़ जाता है भय

तेज बारिश या आंधी के मौसम में यहां हालात और भी विकट हो जाते है। घरों को छूकर निकल रही तारों के हवा, आंधी व बारिश के दौरान आपस में टकरा जाने और चिंगारियां निकलने से मकानों की दीवारों में करंट आने का भय बना रहता है। ऐसे में बारिश के दौरान नमी के कारण मकानों में करंट फैल जाने और किसी बड़े हादसे से भी इनकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि इन दिनों मौसम में बदलाव हो रहा है और गर्मी ने दस्तक दे दी है। दो माह बाद आंधियों का दौर शुरू होगा और इसके बाद बारिश का सीजन शुरू हो जाएगा। ऐसे में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। बावजूद इसके डिस्कॉम की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

अपने स्तर पर कर रहे व्यवस्था

डिस्कॉम की ओर से वर्षों पूर्व तारेंं लगाकर छोड़ दी गई है। मकानों के निर्माण अथवा तारों के बिल्कुल नजदीक आ जाने पर मकान मालिकों को अपने स्वयं के स्तर पर हादसे से बचाव के उपाय करने पड़ रहे है। मकान मालिकों की ओर से निजी इलेक्ट्रिशियन को बुलाकर तारों पर प्लास्टिक के पाइप लगाकर संभावित हादसे को रोका जा रहा है। प्लास्टिक के पाइप लगाने के दौरान भी कई बार हादसे का भय रहता है।