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प्रतिवर्ष लगते है जूतों के ढेर, जूता स्टैण्ड के अभाव में हो रही परेशानी

देश के विभिन्न बड़े मंदिरों की तरह बाबा रामदेव मंदिर के बाहर जूता स्टैण्ड नहीं होने के कारण गांव में मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है।

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jaisalmer

प्रतिवर्ष लगते है जूतों के ढेर, जूता स्टैण्ड के अभाव में हो रही परेशानी

रामदेवरा. देश के विभिन्न बड़े मंदिरों की तरह बाबा रामदेव मंदिर के बाहर जूता स्टैण्ड नहीं होने के कारण गांव में मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। गौरतलब है कि प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा रामदेव की समाधि के दर्शनों के लिए आते है तथा वे मंदिर से कुछ दूरी पर जूते चप्पल उतारते है, लेकिन वापिस आने पर उन्हें जूते नहीं मिलते है। जिससे यहां जूतों का अंबार लग जाता है। जिससे गांव में जगह-जगह गंदगी के ढेर लग जाते है, जबकि प्रशासन की ओर से गांव में जूता स्टैण्ड लगाने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रशासन की ओर से मेले की तैयारियों के लिए दो माह पूर्व आयोजित होने वाली बैठकों में श्रद्धालुओं के जूतों को व्यवस्थित करने के लिए जूता स्टैण्ड लगाने को लेकर चर्चा जरूर की जाती है, लेकिन आज तक न तो कभी जूता स्टैण्ड की व्यवस्था की गई है, न ही श्रद्धालुओं के जूतों को एक जगह खुलवाने व उन्हें वापिस सुपुर्द करने को लेकर कोई व्यवस्था की गई है। ऐसे में मंदिर के मुख्य द्वार के आसपास, मंदिर रोड, वीआईपी रोड, करणी द्वार तक जगह-जगह जूते बिखरे देखे जा सकते है।
यह हो व्यवस्था
देश के कई धार्मिक स्थलों पर जूता स्टैण्ड की व्यवस्था होती है। श्रद्धालु वहां जूते उतारते है तथा उन्हें एक टोकन दिया जाता है। दर्शनों के बाद स्टैण्ड पर आकर टोकन दिखाने पर उन्हें अपने जूते मिल जाते है, लेकिन गांव में मेले के दौरान स्टैण्ड की व्यवस्था नहीं किए जाने से श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। ग्राम पंचायत को मेले के दौरान सफाई व्यवस्था को दुरस्त बनाए रखने को लेकर प्रतिदिन सुबह ट्रैक्टर ट्रोलियों में भरकर ऐसे लावारिस जूते चप्पलों को गांव से बाहर फिंकवाना पड़ता है। गांव के आसपास जगह-जगह फैले जूते चप्पलों के ढेर से यहां की सफाई व्यवस्था बिगड़ जाती है।
प्रवेश व निकासी अलग-अलग
मंदिर में दर्शन करने के लिए जहां से लोग प्रवेश करते है। वापसी में उसी स्थान से होने की बजाय रामसरोवर की तरफ बने अलग-अलग निकासी द्वार से लोगों को बाहर निकाला जाता है। दर्शन करने वाला श्रद्धालु मेले के दौरान पुन: अपने चप्पल उतारने वाले स्थान पर पहुंच नहीं पाता है। इस कारण लोग नंगे पांव ही प्रस्थान करते है। बावजूद इसके प्रशासन व मंदिर समिति की ओर से मंदिर के बाहर जूता स्टैण्ड स्थापित करने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।