
पूरे शहर को बना डाला ‘इश्तिहार घर’,इस अधिनियम की सर्वत्र हो रही अवहेलना
जैसलमेर. जिस जैसलमेर को निहारने के लिए सैलानी देश-विदेश से बड़े उत्साह के साथ पहुंचते हैं, यहां उन्हें ऐतिहासिक महत्व की इमारतों व उसके आसपास बेशुमार प्रचार सामग्री देखकर मायूसी हाथ लगती है और तो और जैसलमेर के मुख्य सडक़ मार्गों से लेकर बाजारों और सूचना पट्टों तक पर कोई न कोई पोस्टर, पम्फलेट, हॉर्डिंग, बैनर आदि चिपकाया अथवा लगाया हुआ दिखाई दे जाता है। इसके बावजूद नगरपषिद की ओर से ऐसा करने वालों के खिलाफ संपत्ति विरूपण अधिनियम के प्रावधानों के तहत कोई कार्रवाई नहीं करवाई जा रही है, जिससे उनके हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। महाविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के चलते तो पूरे शहर को पोस्टरों से बदरंग कर दिया गया।
ऐतिहासिक इमारतों को भी नहीं बख्श रहे
स्वर्णनगरी में सोनार दुर्ग, पटवा हवेलियां, गड़ीसर सरोवर, नथमल और सालमसिंह की हवेली आदि दर्शनीय स्थल है। उनके आसपास के क्षेत्रों में तो प्रचार सामग्री लगाई ही जाती है, उन स्थलों की प्राचीरों को भी नहीं बख्श जाता। विश्व विख्यात सोनार दुर्ग का मुख्य द्वार अखे प्रोल तथा बैरिसाल बुर्ज के पास की विषाल प्राचीन दीवार पर आए दिन व्यावसायिक हॉर्डिंग तथा विभिन्न आयोजनों से संबंधित फ्लेक्स बैनर्स लगाना तो अब हो चुका है। जबकि किसी जमाने में प्रशासन की सख्ती से दुर्ग की प्राचीर पर एक छोटा-सा पेम्पलेट तक नहीं लगाया जा सकता था।अब कोई देखने वाला नहीं है। दुर्ग की फोटोग्राफी करने वाले सैलानी इन सामग्रियों को देखकर हैरान हो जाते हैं।सम्पत्ति विरूपण का कोई मामला अब तक संबंधित लोगों के खिलाफ नहीं बनाया गया। हाल में मुख्यमंत्री की यात्रा के बाद अवश्य नगरपरिषद ने महाविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के सिलसिले में लगाए गए पोस्टरों के बाद तीन छात्रों के खिलाफ मामला बनाया।
यहां भी नहीं चूकते
विभिन्न कोचिंग संस्थान संचालक, होटल-रेस्टोरेंट वाले, गैर सरकारी संस्थाएं, व्यापारिक प्रतिष्ठान व संगठन ही नहीं सामान्य दुकानदार आदि भी सार्वजनिक सम्पत्तियों को बदरंग करने से बाज नहीं आते। और तो और सैलानियों व अन्य लोगों की सुविधा के लिए लगाए जाने वाले सूचना पट्टों, सरकारी कार्यालयों के साइन बोर्ड आदि पर भी पोस्टर-पम्फलेट चिपके हुए नजर आ जाते हैं।जिससे वे न केवल बदरंग होते हैं बल्कि उनके लगाए जाने का औचित्य ही खत्म हो जाता है। शहर में मुख्यमंत्री की गौरव यात्रा से ठीक पहले नगरपरिषद की ओर से करवाए गए रंग-रोगन व चित्रकारी तक पर प्रचार सामग्री चस्पा की जा चुकी है। चौराहों व वहां स्थापित घुमटियों को भी नहीं छोड़ा जा रहा।
सख्त किया गया कानून
-राजस्थान सम्पत्ति विरूपण निवारण (संषोधन) विधेयक 2015 के जरिए सम्पत्तियों को बदरंग करने वालों के खिलाफ अर्थदंड व कारावास की अवधि बढ़ाई जा चुकी है।
-इसके तहत अधिनियम 13 की धारा 3 का संषोधन कर प्रथम बार अपराध करने पर 5 हजार से ज्यादा और 10 हजार तक और पुन: अपराध की दशा में ऐसी अवधि के कारावास की अवधि 2 साल या जुर्माना 10 से ज्यादा 20 हजार रुपए तक किया गया है।
फैक्ट फाइल -
-2006 में बना संपत्ति विरूपण अधिनियम
-05 किलोमीटर के दायरे में फैला जैसलमेर
-99 बुर्जों वाला सोनार दुर्ग प्रमुख आकर्षण केंद्र
Published on:
09 Sept 2018 11:04 am
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