
सरहद के निगेहबानों की सरहद पर सजेगी कलाइयां,बहेगी देशभक्ति की बयार
जैसलमेर. भाई-बहिन के पवित्र प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन इस बार बेहद खास होने वाला है। कोई दो दशक बाद राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन एक दिन मनाए जाएंगे। सीमाजन कल्याण समिति हर बार की भांति इस बार भी जैसलमेर समेत चारों सरहदी जिलों में सीमा सुरक्षा बल की स्थापित सीमा चौकियों पर जवानों की सूनी कलाइयों पर रक्षासूत्र सजाने पहुंचेगी। इस बार समिति के कार्यकर्ता और उनके साथ जाने वाली बालिकाएं अपने साथ तिरंगी झंडियां भी ले जाएंगी। जिन्हें सीमावर्ती गांवों में वितरित कर देशभक्ति की भावना और जोश जगाने का काम किया जाएगा। एक अनुमान के अनुसार पश्चिमी राजस्थान के चार जिलों में बॉर्डर पर तैनात बल के करीब 10 हजार जवानों की सूनी कलाइयों पर रक्षासूत्र बांधे जाएंगे। रक्षाबंधन पर सीमाजन कल्याण समिति के कार्यकर्ता और संबंधित सीमावर्ती क्षेत्रों के ग्रामीण रक्षासूत्र बांधेंगे।
चार जिलों में फैली सीमा
पश्चिमी राजस्थान के चार जिलों में जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर में भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा करीब 1040 किलोमीटर लम्बी है। इसका सबसे बड़ा ४७२ किमी सीमा क्षेत्र जैसलमेर जिले में आया हुआ है। जानकारी के अनुसार चारों जिलों में 300 से अधिक सीमा चौकियां स्थापित हैं, जिनमें अकेले जैसलमेर जिले में 133 चौकियां बनी हुई हैं। सीमाजन के करीब डेढ़ हजार कार्यकर्ता और चारों जिलों के 150 से ज्यादा सीमावर्ती गांवों के लोग, जिनमें बालिकाएं भी शामिल हैं, रक्षाबंधन पर्व पर अलग-अलग सीमा क्षेत्रों में पहुंचेंगे और इस मुहिम के तहत करीब 10 हजार जवानों की कलाइयों पर रक्षा सूत्र बांधे जाएंगे।
नापते हैं 250 किमी तक दूरी
जिला मुख्यालय से २२५ से २५० किलोमीटर की दूरी पर कुछ सीमा चौकियां ऐसी भी होती हैं, जहां चारों तरफ मरुस्थल के सिवाय कुछ नहीं होता और सडक़ के नाम पर भी केवल बल के वाहनों की आवाजाही के रेत पर बने निशान होते हैं। समिति के पदाधिकारियों ने गत वर्ष से ऐसे रेत के समंदर में आई सीमा चौकियों तक पहुंचकर जवानों को रक्षासूत्र बांधने की शुरुआत की। जिला और तहसील केन्द्रों से जाने वाली रक्षाबंधन टोलियां अपने साथ स्कूलों, कॉलेजों में अध्ययनरत छात्राओं की ओर से जवानों के नाम हस्तलिखित रक्षा बंधन पत्रक और राखियां भी साथ ले जाते हैं। रक्षासूत्र बांधने पर जवान भेंट स्वरूप जो राशि देते हैं, उसे समिति कार्यकर्ता बल के वेलफेयर फंड अथवा सीमा चौकी पर स्थापित मंदिर में चढ़ावा के रूप में सौंप देते हैं।
फैक्ट फाइल-
- 19 साल बाद स्वतंत्रता दिवस पर रक्षाबंधन
- 1040 किमी लंबी सीमा से पाकिस्तान से जुड़ी
- 300 से अधिक सीमा चौकियां सरहदी जिलों में
स्वतंंत्रता दिवस होने से दुगुना हुआ जोश
सीमाजन कल्याण समिति प्रतिवर्ष सीमा प्रहरियों के साथ रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार मनाती है। दो दशक से ज्यादा समय से यह सिलसिला चल रहा है, जो अब उज्ज्वल परम्परा बन चुका है। समिति कार्यकर्ताओं के साथ सीमावर्ती समाज के लोग भी जवानों की सूनी कलाइयों पर रक्षासूत्र सजाने चलते हैं। इस बार स्वतंत्रता दिवस होने से इस पर्व को लेकर जोश दोगुना हो गया है।
- शरद व्यास, जिलामंत्री, सीमाजन कल्याण समिति जैसलमेर
Published on:
04 Aug 2019 05:16 pm
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