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शून्य से सुकून, लेकिन नहीं भूलें गुजरे दिन

-कोरोना कैसेज में ठहराव से लोग फिर बेफिक्र-जिम्मेदार भी नहीं निभा रहे दायित्व
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

•

Updated: 29 Jun 2021, 7:33 PM IST

शून्य से सुकून, लेकिन नहीं भूलें गुजरे दिन

शून्य से सुकून, लेकिन नहीं भूलें गुजरे दिन

जैसलमेर. सीमांत जैसलमेर जिला एक बार फिर बेफिक्री के दौर में पहुंच गया है। अप्रेल और मई माह में कोरोना की दूसरी लहर ने शहर से लेकर गांव-ढाणियों तक लोगों को चपेट में लिया और 200 से 250 जनों को महामारी ने काल का ग्रास बना दिया। इतना होने के बाद जैसे ही जून के दूसरे पखवाड़े में संक्रमण की गति एकदम मद्धम पड़ी। जिला मुख्यालय तक पर लोग मानो पिछले दिनों के जख्मों को पूरी तरह से भुला चुके हैं। सरकार की ओर से अनलॉक का दायरा बढ़ाने के साथ लोग भी पूरी तरह से खुलते जा रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग तो दूर मास्क की अनिवार्यता तक को नजर अंदाज कर रहे हैं। इस सबके बीच प्रशासन व पुलिस ही नहीं चिकित्सा महकमा तक 'रेस्ट मोडÓ में पहुंच गया दिखता है। कोरोना की दूसरी लहर के जख्मों को कोई सबक की तरह याद नहीं रख रहा। ऐसे में आने वाले समय में तीसरी लहर के खतरे की आशंका ही बढ़ी है।
न कोई रोकने वाला, न कोई टोकने वाला
शहर में मास्क तथा गाइडलाइन के अन्य पहलुओं की पालना करवाने के लिए अब न सड़कों पर पुलिस दिखती है और न ही नगरपरिषद व प्रशासन के नुमाइंदे। सरकारी स्तर पर छूट दिए जाने के कारण लोग भी लापरवाह दिखाई देने लगे हैं। हर कोई भूल चुका है कि अप्रेल और मई में जैसलमेर के जिला अस्पताल तक मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ गए थे और ऑक्सीजन तक का टोटा हो गया था। और तो और बाहरी शहरों में भी जगह नहीं होने की खबरों के चलते लोगों ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स का नाम पहली बार सुना था। दूसरी लहर के पीक पर होने के दौरान अगर सड़क पर कोई मास्क बिना नजर आता तो पुलिस की कार्रवाई के साथ.साथ अन्य जने भी ऐसे लोगों को टोक देते थे। अब वह सब बीते समय की बातें हो गई हैं। शहर के प्रमुख चैराहों व बाजारों में सुबह से भारी भीड़ उमड़ी नजर आती है। न तो दुकानदार गाइडलाइन की पालना कर रहे हैं और न ही ग्राहक। इसके अलावा कई जनों के मास्क या तो हाथों में झूलते दिखते हैं अथवा जेबों में ठुंस कर रखे रहते हैं। ज्यादा से ज्यादा बीस फीसदी लोग ही अब कायदे से मास्क को लगाकर रखते हैं। जून के पहले सप्ताह से कोरोना संक्रमण में कमी आई और दूसरे पखवाड़े में लगातार यह इकाई की संख्या तक होते-होते गत रविवार को शून्य पर पहुंच गया।
डेल्टा प्लस वेरिएंट का खतरा
-इस बीच कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट का खतरा सामने आ चुका है।
-राज्य सरकार के कान राज्य के बीकानेर में इसका पहला केस मिलने से खड़े हो गए।
-बीकानेर तो जैसलमेर का पड़ोसी शहर है और यहां के लोगों का वहां से रोटी-बेटी का दशकों पुराना संबंध है।
-वेरिएंट की तरफ से आंखें मूंदना भयावह गलती होने की आश्ंाका से इनकार नहीं किया जा सकता।