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धोरों से पहाड़ तक जाने में 20 करोड़ खर्च करेंगे सरहद के बाशिंदे

-भीषण गर्मी के मौसम में जैसाणवासियों को रास आ रही पहाड़ों की ठंडक-जैसलमेर के बाशिंदों में पर्यटन का दिख रहा जबर्दस्त क्रेज

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धोरों से पहाड़ तक जाने में 20 करोड़ खर्च करेंगे सरहद के बाशिंदे

धोरों से पहाड़ तक जाने में 20 करोड़ खर्च करेंगे सरहद के बाशिंदे

जैसलमेर. देश की पश्चिमी सीमा के आखिर में मरुस्थल की गोद में बसे जैसलमेर में इन दिनों भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। यह कम से कम मई और जून दो महीनों में कमोबेश ऐसा ही रहने वाला है। पसीने से भीगते जैसलमेरवासियों को ऐसे में बेसा ता पहाड़ी राज्यों की ठंडकी याद सताने लगी है। पर्यटन के शौकीन जैसाण के बाशिंदे बड़ी तादाद में इन दिनों गर्मी की छुट्टियों में घूमने जाने की योजना बना रहे हैं। वे स्थानीय ट्रेवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स से इस संबंध में मिल रहे हैं और कई जने इंटरनेट पर अपने पसंदीदा स्थलों की जानकारियां खंगाल रहे हैं। गौरतलब है कि राजस्थान के छोटे-से शहर जैसलमेर में औसतन भ्रमण पर जाने वालों की सं या राजधानी जयपुर के औसत को या तो टक्कर देने वाली होगी या उससे भी अधिक ही होगी। इस बार घूमने का मौका भी पूरे दो साल कोरोना काल में गुजारने के बाद मिला है तो पर्यटन की चाहत भी कई गुना तक बढ़ी हुई है। अधिकांश जने मई के प्रथम सप्ताह से लेकर जून के तीसरे सप्ताह के बीच घूमना जाना पसंद करते हैं। वैसे कुछ लोग तो पर्यटन क्षेत्रों में गर्मियों में उमडऩे वाली भीड़ के मद्देनजर अप्रेल में ही घूम कर लौट आए हैं। हालांकि ऐसे लोग तेज गर्मी में पछता भी रहे हैं कि उन्होंने समय पूर्व पहाड़ों की सैर कर ली।
धरती के जन्नत जाने की चाहत
जानकारी के अनुसार जैसलमेर से इस बार सबसे ज्यादा कश्मीर घाटी घूमने जाने वालों की तादाद रहेगी। अधिकांश लोग धरती के जन्नत कहलाने वाले इस क्षेत्र में पर्यटन पर जाना चाहते हैं क्योंकि एक तो वहां का मौसम मई-जून में भी बेहतरीन रहता है। इसके अलावा वहां बर्फ, झील, नदियां, पहाड़, बड़े-बड़े बाग-बगीचे आदि सबकुछ है। धारा ३७० की समाप्ति के बाद इस साल कश्मीर में रिकॉर्ड सं या में सैलानी उमड़ रहे हैं। बताया जाता है कि पिछले दस साल में इतने पर्यटक वहां नहीं पहुंचे जितने इस बार आ रहे हैं। आतंकवाद अथवा अन्य किसी गड़बड़ी की आशंका भी अब वहां न्यूनतम है या यह कहिए कि लोगों को अब वहां जाने में भय नहीं सता रहा। टीवी न्यूज और अन्य माध्यमों से इस सीमांत शहर के लोग भी देख रहे हैं कि, कैसे हजारों-लाखों सैलानी वहां उमड़े हुए हैं। कश्मीर के बाद सदाबहार हिमाचल प्रदेश जाने की इच्छा लोग जता रहे हैं। उनके पसंदीदा क्षेत्र शिमला, मनाली, डलहौजी, धर्मशाला, मैकलॉडगंज आदि हैं। कम संख्या में लोग दक्षिणी राज्यों केरल और कर्नाटक व पूर्वोत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों में भ्रमण का भी मन बना रहे हैं।
धार्मिक स्थलों की यात्रा
-जैसलमेर में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो धार्मिक पर्यटन पर जाना पसंद करेंगे।
-ऐसे में उनकी स्वाभाविक पसंद उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार, ऋषिकेश, बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री हैं।
-इन क्षेत्रों का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है और रास्ते किसी भी पहाड़ी पर्यटन क्षेत्र के जितने ही खूबसूरत हैं। -वहां बर्फ से लेकर ऊंची पर्वत चोटियों का दीदार हो जाता है। कोरोना काल में दो साल तक बहुत कम संख्या में ही लोग वहां जा पाए।
-विशेषकर बदरीनाथ-केदारनाथ तो लगभग समय दर्शनार्थियों के लिए बंद ही रहे।
-अब जम्मू का वैष्णो देवी मंदिर, पश्चिम में द्वारिका, सोमनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पूर्व में जगन्नाथ पुरी आदि तथा उनके आसपास के प्रमुख मंदिर एक पैकेज में दोहरा आनंद दिलाने वाला है।

महंगा हो रहा घूमना-फिरना
-किसी भी पर्यटन स्थल की यात्रा करना अब पहले की अपेक्षा बहुत ज्यादा खर्चीला हो गया है।
-समूचे देश के सैलानी चुनिंदा स्थलों पर ही उमड़ रहे हैं। अधिकांश के घूमने का समय भी एक समान ही है।
-ऐसे में होटलों से लेकर वाहन किराया आदि सब बहुत महंगा हो गया है।
-पहले जहां औसतन एक व्यक्ति १० से १५ हजार रुपए के खर्च में सामान्य तौर पर घूम लेता था। यह राशि अब बढ़कर २० से २५ हजार तक हो गई है।
-कश्मीर से लेकर हिमाचल आदि में होटलों का किराया इन दिनों सामान्य दिनों की तुलना में दोगुना या उससे भी ज्यादा हो चुका है।
-पेट्रोल-डीजल से लेकर अन्य वस्तुओं की महंगाई बढऩे से भी बहुत अंतर आया है। अधिकांश लोग अब आरामदायक यात्रा को भी तरजीह देने लगे हैं। इससे भी खर्च पहले की तुलना में बढ़ा है।

क्या कहते हैं टूर ऑपरेटर्स
जैसलमेर के टूर ऑपरेटर अखिल भाटिया के अनुसार कोरोना के कारण दो साल तक बाहर घूमने नहीं जा सकने वाले लोग इस बार कहीं न कहीं जरूर निकलना चाहते हैं। कश्मीर उनकी पसंदीदा सूची में सबसे ऊपर है। ऐसे ही एक अन्य टूर ऑपरेटर श्रेय भाटिया के मुताबिक प्रतिदिन औसतन १५-२० जने घूमने जाने के संबंध में जरूरी जानकारियां ले रहे हैं। इनमें अधिकांश लोग मई और जून में ठंडक वाले पहाड़ी क्षेत्रों में जाना चाहते हैं।

फैक्ट फाइल -
-२० करोड़ से ज्यादा खर्च पर्यटन पर करेंगे जैसलमेरवासी
- ०२ दशक के दौरान बढ़ा है घूमने जाने का आकर्षण
- ०२ महीने मई-जून सबसे व्यस्त समय