
मरुस्थल की गर्मी और नहर की नमी ने मिलकर इलाके में नया हेल्थ रिस्क तैयार कर दिया है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे सांपों की स्वछंदता भी तेजी से बढ़ रही है। खेतों में काम करते किसान, चरवाहे और ग्रामीण सबसे ज्यादा एक्सपोज़ हो रहे हैं। जनवरी 2020 से मार्च 2026 तक 375 स्नेक बाइट केस दर्ज हुए हैं, जो इस खतरे की गंभीरता को साफ दिखाते हैं। नहर आधारित खेती ने इलाके की तस्वीर बदली, लेकिन इसके साथ रिस्क भी आया। सिंचाई के दौरान पानी बिलों में भरता है, जिससे सांप बाहर निकलते हैं और फसलों, घास के ढेर और नमी वाले स्पॉट्स में छिप जाते हैं। कटाई के बाद नमी वाली फसलें भी स्नेक हाइडआउट बन रही हैं। यही वजह है कि खेत अब सिर्फ काम की जगह नहीं, बल्कि रिस्क जोन बन चुके हैं।
वर्ष 2022 से 2024 तक गिरावट के बाद 2025 में फिर उछाल दिखा। एक्सपर्ट इसे मौसम और खेती के पैटर्न से जोड़कर देख रहे हैं।
2020: 75 केस
2021: 71 केस
2022: 68 केस
2023: 59 केस
2024: 48 केस
2025: 54 केस
2026 (मार्च तक): 9 केस
ट्रीटमेंट सिस्टम ऑन ट्रैक
मोहनगढ़ सीएचसी में स्नेक बाइट मैनेजमेंट सिस्टम एक्टिव है। एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन फ्री में उपलब्ध हैं। एक इंजेक्शन की कीमत बाजार में करीब 1000 रुपए है, जबकि गंभीर केस में 100 से ज्यादा डोज तक की जरूरत पड़ सकती है। समय पर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की सर्वाइवल रेट काफी बेहतर है।
-खेत में एंकल कवर करने वाले मजबूत जूते पहनें
-रात में बिना टॉर्च बाहर निकलना अवॉयड करें
-फसल उठाने से पहले स्टिक से चेक करें
-नमी वाले एरिया में अलर्ट रहें
-स्नेक बाइट के बाद तुरंत मेडिकल हेल्प लें
क्या बिल्कुल न करें
-कट लगाना या खून निकालना डेंजरस
-टाइट बांधना नुकसानदायक
-झाड़-फूंक में समय गंवाना रिस्की
-स्कॉर्पियन स्टिंग भी अलर्ट
स्नेक बाइट के साथ स्कॉर्पियन स्टिंग केस भी तेजी से बढ़ रहे हैं। सुल्ताना एरिया में पिछले तीन साल में 91 केस सामने आए।
2023: 25
2024: 27
2025: 32
2026 (अप्रेल तक): 7
मोहनगढ़ सीएचसी में हर साल 50+ केस रिपोर्ट हो रहे हैं। पॉजिटिव साइड यह है कि अब लोग सीधे अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिससे जटिलता कम हो रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. मनोहरसिंह भाटी ने बताया कि नहर क्षेत्र और बढ़ती नमी स्नेक बाइट के मुख्य ट्रिगर बन रहे हैं। सिंचाई के दौरान पानी बिलों में भरने से सांप बाहर निकलकर खेतों और आसपास के इलाकों में एक्टिव हो जाते हैं। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। अस्पताल में एएसवी इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और यह पूरी तरह फ्री है। स्नेक बाइट के बाद गोल्डन टाइम बहुत अहम होता है, इसलिए देरी करना खतरनाक साबित हो सकता है। किसी भी तरह के घरेलू नुस्खे या झाड़-फूंक की बजाय सीधे मेडिकल ट्रीटमेंट लेना ही सुरक्षित विकल्प है।
Published on:
29 Apr 2026 05:25 pm
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