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पूनम स्टेडियम में आज रात भर झरेगा रम्मत का अमृत

-शताब्दी से अधिक समय से प्रचलित है यह मनोहारी लोकनाट्य

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पूनम स्टेडियम में  आज रात भर झरेगा रम्मत का अमृत

पूनम स्टेडियम में आज रात भर झरेगा रम्मत का अमृत

जैसलमेर. राजस्थान पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन की ओर से आयोजित मरु महोत्सव के इतिहास में पहली बार जैसलमेर की 108 वर्ष पुराना लोकनाट्य रम्मत- जोगराजा भर्तृहरि का ख्याल का बुधवार को रात 10 बजे पूनम स्टेडियम के मुक्ताकाशी मंच पर मंचन होगा। यह भोर होने तक चलेगा। तेज कवि रचित लोकनाट्य रम्मत जोग राजा भर्तृहरि ख्याल का मंचन रसिकों को रात भर मंत्रमुग्ध किए रखकर आनंद के ज्वार में नहला देने वाला है। मारवाड़ी रंगत की जैसलमेर शैली के इस लोकनाट्य रम्मत के मंचन में एक और जहां परम्परागत प्रतिष्ठित प्रमुख किरदार अपने अभिनय की छाप छोड़ेंगे वहीं नवोदित कलाकारों का भी इसमें समावेश है। स्थानीय लोक संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण-संवर्धन के लिए जिला कलक्टर आशीष मोदी की पहल पर इसे मरु महोत्सव में शामिल किया गया है। यह लोकनाट्य अपनी अनूठी गायन प्रधान पारस्परिक संवाद शैली की वजह से प्रसिद्ध है जिसमें कलाकार पद्यमय संवादों को नृत्य के साथ भावपूर्ण अभिनय से प्रदर्शित करते हैं। इनकी भाव-भंगिमाएंए मुद्राएं और परिधान भी पारंपरिक लोक संस्कृति की झलक दिखाते हुए जीभर कर लोकानुरंजन करते हैं। इसमें महिला पात्रों की भूमिका का निर्वहन भी पुरुषों द्वारा किया जाता है। कलाकारों को सम्बल देने के लिए टेरियों का समूह पूरी रात लोकवाद्यों की संगत पर ऊंचाइयां देता है।
यह है कथानक
उज्जैन के राजा भतर््ृहरि के जीवन प्रसंग पर आधारित लोकनाट्य शैली में लगभग सौ वर्ष पूर्व रचित इस रम्मत का सफल मंचन पूर्व में कई बार जैसलमेर अखाड़े के साथ ही अन्य स्थानों पर भी होता रहा है। इनमें दिल्लीए उदयपुरए पोकरण एवं फलोदी आदि प्रमुख हैं। रम्मत का कथानक राजा भर्तृहरि के शृंगार से वैराग्य तक की सम्पूर्ण यात्रा का शब्द एवं भाव चित्र प्रस्तुत करता है। इसमें प्रमुख रूप में राजा भर्तृहरि, रानी पिंगला, विक्रम, गोरखनाथ, कोचवान, वैश्या, बेटी, ब्राह्मण आदि पात्र अपने-अपने अभिनय को बखूबी जीते हैं।
कलक्टर की पहल
स्थानीय लोक कलाओं के संरक्षणए विकास एवं प्रोत्साहन के लिए रम्मत को मरु महोत्सव में शामिल किए जाने की पहल जिला कलक्टर आशीष मोदी की है। इस बार रम्मत के पूर्ण मंचन को शामिल करवाया है। बुधवार पूरी रात पूनम स्टेडियम में यह रम्मत खेली जाएगी। हालांकि पहले के वर्षों में कुछेक बार रम्मत को शामिल जरूर किया गया था, लेकिन उनमें रम्मत के केवल आंशिक व संपादित अंशों का ही मंचन हो पाया था।
मरु महोत्सव में ऐसा पहली बार
मरु महोत्सव के इतिहास में यह पहला अवसर है कि जब रसिक समुदाय पूरी रात पूर्ण रम्मत का आनंद पाएगा। जिला कलक्टर मोदी की इस पहल से लुप्त होती स्थानीय सांस्कृतिक परम्पराओं को सम्बल प्राप्त होगा। लोक संस्कृतिकर्मियों ने जिला कलक्टर की पहल को सराहा है। जैसलमेर अखाड़े में इसका परम्परागत मंचन दशकों से होता रहा है।
तैयारियां पूर्ण
संस्थान के अध्यक्ष गोविन्द गोपाल जगाणी एवं सचिव हरिवल्लभ बोहरा ने बताया कि मरु महोत्सव के दौरान कृष्ण कंपनी तेज मण्डली रम्मत कला संस्थान की ओर से मंचित होने वाले रम्मत लोकनाट्य को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं।
स्क्रीन पर होता रहेगा कथ्य प्रदर्शन
टॉप प्रमुख हरिवल्लभ शर्मा व राणीदान सेवक के अनुसार दर्शकों की सुविधा के लिए कथानक का लिखित स्वरूप बड़ी स्क्रीन पर कथ्य की साझा समझ के निमित प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि आमजन भी सहज एवं सरल सुबोधगम्य भाषा शैली में समझ सके तथा रम्मत में दर्शक के रूप में शामिल होकर रसिकजन टेर व गेयता में एकमेक होकर आनन्द के सहभागी बन सकें।