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पाक सीमा से सटे सरहदी जैसलमेर जिले में सत्यापन को लेकर गंभीरता जरूरी

  रोजगार के खुले मार्ग तो मंडराये आशंका के बादल भी -सैकड़ों की संख्या में रोजगार से जुड़े हैं बाहरी क्षेत्रों से आए लोग  

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पाक सीमा से सटे सरहदी जैसलमेर जिले में सत्यापन को लेकर गंभीरता जरूरी

पाक सीमा से सटे सरहदी जैसलमेर जिले में सत्यापन को लेकर गंभीरता जरूरी

बांग्लादेशी नागरिक के जैसलमेर की एक होटल में नाम बदलकर काम करने का मामला सामने आने और उसके एटीएस के हत्थे चढऩे के बाद एक बार फिर स्वर्णनगरी की आंतिरिक सुरक्षा को लेकर आशंका के बादल गहराने लगे हैं। जैसलमेर शहरी क्षेत्र हो या गांव, विगत वर्षों में यहां रोजगार के मार्ग खुले हैं, वहीं बड़ी संख्या में बाहरी लोगों की आवक ने सुरक्षा को लेकर खतरा भी बढ़ा है। बाहर से आए कई लोगों के बारे में किसी पुख्ता जानकारी ही नहीं है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि हर हादसे की वजह कोई न कोई लापरवाही ही रहती है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता का दौर अभी तक थमा नहीं है।

एजेंसियों के लिए भी चिंता

बाहरी होने पर भी यहां रहने वालीे हजारों लोगों का पुलिस सत्यापन नहीं होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का एक बड़ा कारण बना हुए है। हर वर्ष रोजी-रोटी की आस में बाहर से कई व्यक्ति यहां आए दिन आ रहे हैंं और रोजगार भी प्राप्त कर चुके हैं। इनमें से कई लोगों का पुलिस सत्यापन नहीं होने से सुरक्षा को लेकर चिंता होना लाजमी है। उधर, पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि इस संबंध में संबंधित फर्म, संस्थानों और कंपनियों को नोटिस दिए जाते हैं।

प्रतिबंधों का यह है बंधन

-क्रिमिनल संशोधन एक्ट 1996 के तहत अधिसूचित थाना क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए अनुमति लेना अनिवार्य है।

-जैसमलेर में 2008 में बोर्डर को बेचने के मामले के बाद इस कानून को सख्त किया गया है।

-बिना परमिशन मिलने पर व्यक्ति के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर सकती है।