
राजस्थान के इस गांव में अज्ञात बीमारी से भेड़-बकरियां बनी काल का ग्रास
सरहदी जिले के एकां गांव में पशुओं में फैली बीमारी से पशुधन असमय काल का ग्रास बन रह है। विगत दिनों आधा दर्जन से अधिक भेड़ों की मौत हो चुकी है, जिससे पशुपालक चिंतित नजर आ रहे है। ग्रामीण जेठूसिंह के अनुसार भेड़ बकरियों में अज्ञात बीमारी फैली हुई है, जिसके कारण पशुओं की अकाल मौत हो रही है। जांच नहीं होने के कारण बीमारी का पता नहीं चल पा रहा है। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह में गांव में कई जगह पर करीब आधा दर्जन से अधिक भेड़ों की मौत हो चुकी है, वहीं तीन दर्जन से अधिक भेड़ें और बकरी बीमार है। उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों से बीमारी की जांच करवाकर उपचार करने की मांग की है।
बीमारी के आगे पशु पालक बेबस
ग्राम पंचायत एका सहित उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को इन दोनों परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के अधिकांश पशुपालक भेड़पालन परिवार का पालन पोषण करते हैं। ग्रामीणों बताते हैं कि गत कुछ दिनों से बाड़े में रह रही भेड़ों में अज्ञात बीमारी लग जाने से वह तड़पने लगती है और उनकी मौत हो जाती है। अब तक 9 से अधिक भेड़ों की मौत हो जाने की सूचना है, वहीं 35 से अधिक भेड़ और बकरियां बीमारी की चपेट में आने से गंभीर रूप से बीमार चल रही है। इसको लेकर इस क्षेत्र के किसान परेशान नजर आ रहे हैं। ग्राम पंचायत एकां क्षेत्र के किसान चनने खां व पीरु खां ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से भेड़ों में उक्त अज्ञात बीमारी फैल रही है। इस संबंध में उन्होंने पशु चिकित्सकों से उनके ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचकर उन भेड़ों की नियमित जांच करने की भी मांग की है।
श्वांस लेने में तकलीफ, गले में सूजन
पशुपालकों ने बताया कि पशुओं में पहले श्वांस लेने में तकलीफ होती है। रुक-रुककर सांस आने, हांफ जाने, गले में सूजन, नाक से खून बहने के तीन-चार दिन में पशु की मौत हो जाती है। इस संबंध में पशु चिकित्सालय में संपर्क किया गया, तो उनकी ओर से दवाइयां देकर उपचार शुरू किया गया, लेकिन पशुओं को कोई आराम नहीं मिल पा रहा है।
पता लगा रहें हैं..जल्दी ही टीम गठित करके बीमारी के बारे में पता किया जाएगा। बीमारी पशुओं के इलाज में कोई कमी नहीं रखी जाएगी।
-अशोक कुमार सुथार, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग, जैसलमेर।
अज्ञात बीमारी से पीडि़त होकर मेरी चार बकरियां काल का ग्रास बन चुकी है। उपचार नहीं मिलने की स्थिति में और भी बीमार पशु मर जाएंगे। अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
-जेठूसिंह, किसान, एकंा गांव
Published on:
25 Feb 2024 08:35 pm
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