
नाचना गांव में स्थित ब्लॉक स्तरीय प्रथम श्रेणी मवेशी अस्पताल लंबे समय से एक चिकित्सक के भरोसे चल रहा है, जबकि दो कंपाउंडर के पद लंबे समय से रिक्त चलने से पशुपालक आए दिन परेशान हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार पशु अस्पताल नाचना में एक डॉक्टर व दो कंपाउंडर के पद स्वीकृत है, लेकिन एक चिकित्सक ही तैनात है। दूर-दराज ढाणियों से पशुपालक 80 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद बीमार पशु की दवाई लेने के लिए पशु चिकित्सालय नाचना पहुंचते हैं, लेकिन चिकित्सालय में कोई नहीं मिलता है। मजबूरन पशुपालकों को महंगे दामों में बाजार से बीमार पशुओं के लिए दवाई खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में पशुपालकों का आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
मवेशियों में होने वाली बीमारियां गलघोटू, पीपीआर, फड़किया आदि की रोगों की रोकथाम के लिए टीकाकरण किया जाता है, कंपाउंडरों के पद रिक्त होने के कारण मवेशियों का समय पर टीकाकरण नहीं हो पाता। ग्रामीण भंवरलाल ने बताया कि डेयरी एवं पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही है। नाचना क्षेत्र के अभी तक बड़ी संख्या में पशुपालक पशुओं के बीमा से भी वंचित है। अभी तक इन योजनाओं का पशुपालकों को लाभ नहीं मिल रहा है। वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार गुप्ता का कहना है कि नाचना अस्पताल में दो कंपाउंडर के पद रिक्त चल रहे हैं। उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
Updated on:
04 Apr 2025 05:27 pm
Published on:
03 Apr 2025 09:09 pm
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