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मनरेगा की हाजिरी में हेराफेरी! कहीं एक समय की उपसि्थति तो कहीं फोटो की जगह अंगुली

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को पारदर्शी बनाने और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए ऑनलाइन उपस्थिति शुरू की गई है, लेकिन सरहदी जिले में इस ऑनलाइन उपस्थिति में अनियमितता बरतने के मामले सामने आ रहे हैं।

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मनरेगा की हाजिरी में हेराफेरी! कहीं एक समय की उपसि्थति तो कहीं फोटो की जगह अंगुली

मनरेगा की हाजिरी में हेराफेरी! कहीं एक समय की उपसि्थति तो कहीं फोटो की जगह अंगुली

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को पारदर्शी बनाने और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए ऑनलाइन उपस्थिति शुरू की गई है, लेकिन सरहदी जिले में इस ऑनलाइन उपस्थिति में अनियमितता बरतने के मामले सामने आ रहे हैं। हकीकत यह भी है कि जिम्मेदारों की ओर से पर्यवेक्षण बढ़ाने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जानकारी के अनुसार मनरेगा के तहत नरेगा मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम एनएमएमएस नाम से एप जारी किया गया है, जिसमें मनरेगा कार्यस्थल पर मेट को कार्य शुरू होने और खत्म होने पर दो अलग-अलग फोटो के साथ उपस्थिति लगानी होती है। इस एप में उपस्थिति लगाने के बाद ही श्रमिकों को उनकी मजदूरी का भुगतान मिल पाता है। सरहदी जिले में कई ग्राम पंचायतों में कार्यरत मेटों की ओर से इस ऑनलाइन उपस्थिति में अनियमितता बरती जा रही है। ऐसे में एनएमएमएस एप का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है।

दो बार फोटो अपलोड कर लगानी है उपस्थिति

मनरेगा के तहत कार्य स्वीकृत होने पर मस्टररोल जारी किए जाते है। इसके साथ ही मेट की नियुक्ति की जाती है। मेट की ओर से प्रतिदिन कार्य शुरू होने और शाम को कार्य समाप्त होने पर दो अलग-अलग फोटो लेकर एप में अपलोड करने होते है। इसी से श्रमिकों की उपस्थिति लगाई जाती है।

पड़ताल में मिली अनियमितताएं

- पत्रिका की ओर से एनएमएमएस पोर्टल की पड़ताल में यह बात सामने आई कि सरहदी जिले की सभी सातों पंचायत समितियों में अलग-अलग ग्राम पंचायतों में चल रहे मनरेगा कार्यों में 11 मार्च की उपस्थिति की जांच की गई। पंचायत समिति सांकड़ा, भणियाणा, नाचना, मोहनगढ़, फतेहगढ़, जैसलमेर व सम की ग्राम पंचायतों में उपस्थिति देखी गई। अधिकांश मेटों की ओर से एक समय का फोटो ही अपलोड किया गया है। कार्य समाप्ति का फोटो ही नहीं लगाया गया है। कई ग्राम पंचायतों में फोटो धुंधले होने के कारण श्रमिकों के चेहरे ही नजर आ रहे है। यही नहीं कई ग्राम पंचायतों में फोटो लेने के दौरान कैमरे के आगे अंगुली लगा दी गई तो कुछ फोटो पूरी तरह से काले है।जिनमें कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में कार्य कहां चल रहा है और श्रमिक कितने कार्यरत है, इसकी जानकारी नहीं हो रही है। कुछ जगहों पर खाली जमीन का फोटो लगाया गया है, जिसमें एक भी श्रमिक नहीं दिख रहा। जबकि सभी श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की गई है।

कैसे होगी जांच और पारदर्शिता

मनरेगा के तहत फर्जीवाड़े को खत्म कर पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए एनएमएमएस एप्प जारी किया गया है। जबकि कार्यस्थलों पर इस प्रकार फोटो अपलोड करने और श्रमिकों की उपस्थिति लगाने के बावजूद किसी भी तरह की मॉनीटरिंग नहीं हो रही है। जिम्मेदारों की ओर से पर्यवेक्षण को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

फैक्ट फाइल:-

- 125 दिन मिलता है मनरेगा में रोजगार

- 2 फोटो करने होते है एप्प पर अपलोड

- 7 पंचायत समितियां है जैसलमेर जिले में

- 206 ग्राम पंचायतें है जिले में