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Video: ‘मार्केट से बाहर होने की आशंका थी, फिर भी गायन शैली को नहीं बदला’

-प्रसिद्ध गायक प्रकाश माली से राजस्थान पत्रिका की खास बातचीत

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Video: 'मार्केट से बाहर होने की आशंका थी, फिर भी गायन शैली को नहीं बदला'

Video: 'मार्केट से बाहर होने की आशंका थी, फिर भी गायन शैली को नहीं बदला'

जैसलमेर. 'हल्दीघाटी में समर लडियो...' गीत के गायन से देश भर में ख्याति अर्जित कर चुके भजन गायक प्रकाश माली का मानना है कि एक ऐसा भी दौर था जब उनकी शैली व विचारधारा को देखते हुए मार्केट से बाहर होने का खतरा भी था। बावजूद इसके संघ के मार्गदर्शकों ने उन्हें लीक को नहीं छोडऩे और संकल्प का निर्वहन करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि मैं संघ का स्वयंसेवक हूं और मेरे जीवन के बड़े निर्णय संघ के पदाधिकारी सोचते हैं। मेरे मन में कोई भाव आ जाता है तो मैं उनसे पूछ लेता हूं। आज समय बदला है, उन्हें पहचान मिली वहीं उनके अंदाज को कई नए भजन गायक अपना रहे हैं। जैसलमेर के एक संगीत संध्या में भाग लेने आए भजन गायक प्रकाश माली ने राजस्थान पत्रिका से खास बातचीत में अपने जीवन से जुड़े अनुभव बयां किए। बाड़मेर क्षेत्र में जन्मे माली ने अपनी शिक्षा व जीवन से जुड़े कई सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में जब महाराणा प्रताप गीत रिकार्ड किया तो म्युजिक कंपनियों का मानना था कि यह तो केवल 15 अगस्त या 26 जनवरी को ही उपयोग में आ सकता हैं, क्योंकि तब इन दो राष्ट्रीय पर्वों को ही देशभक्ति मानी जाती थी। बॉलीवुड में जाने की इच्छा से संबंधित पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि वहां काफी भीड़ है और वे अन्य गायकों की तरह उन्होंने संगीत की वैसी तालीम नहीं ली है। किशोर कुमार ने भी संगीत की तालीम नहीं ली थी, लेकिन वे एक अलग ही शख्सियत थे। संगीत के क्षेत्र में अपने अब तक के सफर से संतुष्ट भजन गायक माली बताते हैं कि बदलते समय के साथ लोगों की विचारधारा बदली है और आज युवा सही पथ पर जा रहा है, उसका चयन सही है। संगीत की परिभाषा के बारे में उन्होंने जवाब दिया कि जो दिल की गहराइयों में उतरे और मन की उथल-पुथल को शांत कर दे वही संगीत है। उनका प्रयास यही रहता है कि श्रोता उस समय बिंदु पर अपनी मानसिक पीड़ा भूल जाए और ईश्वर की भक्ति व देशभक्ति का माहौल उसे आत्मिक सुकून दे सके।