
विद्यालयों से गायब हुई खेल संस्कृति, कैसे तैयार हो खेल प्रतिभाएं ?
जैसलमेर. हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की याद में 29 अगस्त को देश भर में खेल दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर भी सीमावर्ती जैसलमेर जिले में खेलों के निरंतर हो रहे नुकसान की तरफ जिम्मेदारों का ध्यान जाना मुश्किल ही है। विगत कुछ वर्षों के दौरान स्कूली स्तर पर खेलों की दशा निराशाजनक देखने केा मिली है।कहने को शासन-प्रशासन प्रत्येक गांव में स्थित राजकीय विद्यालय के लिए खेल मैदान की व्यवस्था पर जोर देते हैं लेकिन असलियत यह है कि जैसलमेर जिला मुख्यालय पर भी प्राथमिक स्तर के सरकारी स्कूलों की बात जाने दें, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के स्कूलों के लिए खेल मैदान नहीं है। रियासतकाल में स्थापित अमर शहीद सागरमल गोपा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का बेहद शानदार खेल मैदान विगत वर्षों के दौरान प्रशासन ने अघोषित रूप से छीन ही लिया है। अब यह नगरपरिषद की संपत्ति कहलाता है तथा शिक्षा विभाग व विद्यालय के तत्कालीन प्रशासन की नाकामी की कहानी खुद कह रहा है। वर्तमान कोरोना काल को छोड़ दिया जाए तो कहने को प्रतिवर्ष जिला व राज्य स्तरीय स्कूली खेलकूद प्रतियोगिताओं में जैसलमेर जिले के बालक-बालिकाएं भी भाग लेते हैं लेकिन खेल संस्कृति तथा विद्यालयों में संसाधनों के अभाव में वे उभरकर नहीं आ पाते। जबकि दमखम के मामले में यहां के बच्चे राज्य के अन्य जिलों की भांति किसी लिहाज से कम नहीं हैं।
खेल मैदान के लिए जगह नहीं
अव्वल तो हरियाणा जैसे प्रांत की तुलना में राजस्थान में स्कूली व कॉलेज स्तर पर खेलों को प्रोत्साहित करने की प्रक्रिया बहुत धीमी है लेकिन जो कुछ काम हो भी रहा है, वह सीमांत जैसलमेर तक नहीं पहुंच पा रहा। जैसलमेर शहरी क्षेत्र में राजकीय अमर शहीद सागरमल गोपा उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय और राजकीय माध्यमिक विद्यालय तीन सबसे बड़े सरकारी स्कूल हैं। आबादी के घनत्व के लिहाज से सबसे पीछे आने वाले जैसलमेर में ही विद्यालयों के खेल मैदान के लिए जमीन नहीं है। इसके लिए ना कभी जनप्रतिनिधियों ने प्रयास किए न प्रशासन और शिक्षा विभाग चेता। जबकि बिना खेल मैदान के भी जैसलमेर कई बार राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजक बनता रहा है।
अमर शहीद गोपा विद्यालय का मैदान छिना
शहर के सबसे व्यस्ततम हनुमान चौराहा पर अमर शहीद सागरमल गोपा विद्यालय ऐतिहासिक विद्यालय है। यहां स्थित शहीद पूनमसिंह स्टेडियम पहले इसी विद्यालय के अधीन था, लेकिन तत्कालीन शिक्षा अधिकारी और विद्यालय प्रशासन की बेरुखी के बीच स्थानीय निकाय के पास अब यह आ गया है। प्रशासन व निकाय मिलकर इसका साल भर अपने हिसाब से उपयोग करते हैं। हमेशा से स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर जिलास्तरीय आयोजन इसी मैदान पर होते आए, तब भी यह मैदान सागरमल गोपा विद्यालय के अधीन ही था। उस समय यह जैसलमेर शहर के राजकीय विद्यालयों के लिए एकमात्र खेल मैदान था।
हो रहे दुष्परिणाम
खेल मैदान के अभाव में यहां से खिलाड़ी तैयार नहीं हो पाए। जिले की टीम विगत दशकों में राज्य स्तर पर विद्यालय स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में कबड्डी, खो-खो, फुटबॉल आदि में कभी पदक प्राप्त नहीं कर सकी। यहां के खिलाड़ी औपचारिकता के तौर पर खेलकूद में भाग लेते रहे। इसके चलते जिले में स्थानीय शारीरिक शिक्षकों की भारी कमी रही और विद्यालयों में अधिकांशत: दूसरे जिलों के शारीरिक शिक्षक यहां पदस्थापित रहे। आज आलम यह है कि कई वर्षों से जैसलमेर जिला स्तरीय प्रतियोगिता में राष्ट्रीय खेल हॉकी का कोरम भी पूरा नहीं कर पाता। जबकि इंदिरा इंडोर स्टेडियम में बास्केटबॉल अकादमी बनने के बाद यहां के खिलाड़ी राज्य-राष्ट्र ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे।
राष्ट्रीय खेल की दुर्दशा
जिस मेजर ध्यानचंद की याद में खेल दिवस मनाया जाता है, वे हॉकी के जादूगर थे। वीर प्रसूता भूमि जैसलमेर जिले में हॉकी का एक भी मैच नहीं होता। इस में न जनप्रतिनिधियों ने रुचि ली और न प्रशासन ने। यह प्रत्यक्ष तौर पर खेल दिवस की लिए एक चुनौती है कि जिले में राष्ट्रीय खेल हॉकी का कोरम भी पूरा नहीं होता। किसी भी खेलकूद प्रतियोगिता करवाने के लिए चार टीमों का आना आवश्यक होता है फिर उनमें से राज्य स्तरीय टीम का चयन होता है। उदासीनता का शिकार जैसलमेर जिला हॉकी टीम का कोरम भी पूरा कर नहीं पाता। जानकारी के अनुसार किसी वक्त बडोड़ा गांव जैसे विद्यालय की टीमें हॉकी में अच्छा प्रदर्शन किया करती थी।
फैक्ट फाइल -
- ३०९ पद शारीरिक शिक्षकों के
- २३१ पदों पर लगे हैं शिक्षक
- १८८ राजकीय माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यालय
हमने किए प्रयास
जैसलमेर में स्कूल के खेल मैदान के लिए वर्ष 2017-18 में संघर्ष किया। तत्कालीन शिक्षा मंत्री व सरकार के सामने संघर्ष किया। सांसद को भी घेरा। भविष्य में भी इसके लिए हम संघर्ष करने के लिए तैयार हैं।
-प्रकाश विश्नोई, प्रदेश मंत्री, राज. शिक्षक एवं पंचायती राज कर्मचारी संघ
नगरपरिषद के पास स्वामित्व
पूर्व में पूनम स्टेडियम अवश्य हाई स्कूल का मैदान कहलाता था और बच्चे भी यहां खेलते थे। मैदान के संबंध में विद्यालय के पास कोई कागजात नहीं है और फिलहाल यह नगरपरिषद के पास ही है।
-दलपतसिंह सोलंकी, जिला शिक्षा अधिकारी, जैसलमेर
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Published on:
29 Aug 2021, 8:51 PM IST
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