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10 लाख लीटर नहरी पानी की आपूर्ति, 5 लाख लीटर खारा पानी !

-बाबा की नगरी में 11हजार की आबादी व 50 लाख श्रद्धालु मिनरल वाटर पर निर्भर-वर्षों से मीठे पानी से कंठ तर करने की आस अब तक अधूरी।

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10 लाख लीटर नहरी पानी की आपूर्ति, 5 लाख लीटर खारा पानी !

10 लाख लीटर नहरी पानी की आपूर्ति, 5 लाख लीटर खारा पानी !

दीपक व्यास/राजेन्द्र सोनी
जैसलमेर/रामदेवरा. रेगिस्तानी जिले जैसलमेर की गोद में बसा व धर्म नगरी के तौर पर विख्यात रामदेवरा की आबादी 11 हजार है, वहीं श्रद्धालुओं की आवक भी हर वर्ष 50 लाख है, लेकिन वर्षों से मीठे पानी से कंठ तर करने की आस अभी अधूरी ही है। यहां प्रतिदिन 10 लाख लीटर नहरी पानी की आपूर्ति हो रही है, वहीं जानकारों की मानें तो करीब 5 लीटर खारे पानी की मिलाने की मजबूरी है। निराशाजनक बात यह है कि देश-दुनिया में ख्याति अर्जित करने के बावजूद रामदेवरा क्षेत्र में नहर का मीठा पानी सपना ही बना हुआ है। उधर, देश व प्रदेश से पूरे साल रामदेवरा आने वाले श्रद्धालुओं को भी पीने का मीठा पानी नही मिलता है। मीठे पानी के अभाव में ग्रामीणों और यात्रियों को बोतल बंद पानी या आरओ प्लांट की आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार रामदेवरा कस्बे सहित आसपास के क्षेत्र के लोगो को इंदिरा गांधी नहर के समीप से गुजरने के बावजूद भी पीने को नहर का मीठा पानी नही मिल रहा हैं।
हकीकत यह भी
-रामदेवरा में आम दिनों में भी पीने के मीठे पानी की व्यवस्था नहीं की जाती है।
-भादवा मेले में लाखों श्रद्धालुओं के लिए सीधे पानी के टैंकर से पीने के पानी की व्यवस्था की जाती है।
-मेले के दौरान ट्यूबवेल और पानी की पाइप लाइन से सीधे टैंकर भरकर पानी की आपूर्ति की जाती है।

आबादी का विस्तार, लेकिन नहीं बढ़ी आपूर्ति
-रामदेवरा कस्बे और ढाणियों की आबादी करीब 11 हजार है।
-पेयजल व्यवस्था के नाम पर मात्र ***** महीने में ही अतिरिक्त पेयजल व्यवस्था की जाती है।
-यहां के रामसरोवर तालाब का वर्ष भर स्नान के लिए उपयोग किया जाता है, इसमें मीठा पानी है।
-पेयजल के बिछी पाइप लाइनों में खारा और नहर का मिश्रित पानी की आपूर्ति हो रहा है।

मीठा पानी तो दूर खारा भी पानी भी नहीं पहुंचता
नाचना से शुरू हुई पोकरण-फलसूंड पेयजल परियोजना वर्ष 2005 में मंजूर की गई थी। परियोजना के अंतर्गत नाचना से नहरी पानी पोकरण-फलसूंड होते हुए बालोतरा सिवाना तक पहुंच रहा है। परियोजना के तहत कुल 563 गांव को जोडऩा है, जिसमें बाड़मेर जिले के 386, जैसलमेर जिले के 177 गांव हैं। वर्ष 2009 में योजना पर काम शुरू हुआ। अभी भी योजना में कई गांवो तक नहरी पानी नही पहुंचा है।

बिक रहा है बरसाती पानी भी
रामदेवरा और आस पास में स्थित ढाणियों के रहवासियों के लिए पीने के मीठे पानी का साधन जलाशयों का पानी भी रामदेवरा में स्थित धर्मशालाओं और संस्थाओ को पानी के टैंकर बेच दिए जाते हैं। जानकारों के मुताबिक ऐसे में रामदेवरा के आस पास स्थित जलाशयों में भरा बरसाती पानी भी कुछ माह में ही खत्म हो जाता है। मिनरल पानी बोतलों और आरओ दोनो रूप में बिकता है।

- नहर क्लोजर में तो खारे पानी पर ही निर्भर -
जलदाय विभाग की स्थानीय सप्लाई नहरी पानी पर निर्भर है। चार नलकूप में से अधिकतर दो नलकूप ही चलते है। दो नलकूप अधिकांश खराब रहते है। नहरी पानी की आपूर्ति भी कई बार महीने में लड़खड़ा जाती हैं,तो ग्रामीणों को खारे पानी की ही आपूर्ति होती है। गर्मी के दिनो मे एक से डेढ़ महीने के क्लोजर के समय नहर के पानी की आपूर्ति नहीं होती है। उस दौरान पूरे क्षेत्र में खारे पानी की ही आपूर्ति होती हैं।

फैक्ट फाइल-
-300 होटल और धर्मशाला संचालित हो रहे है रामदेवरा क्षेत्र में
-50 लाख के करीब श्रद्धालु आते है पूरे साल रामदेवरा
-7 जीएलआर मौजूद है रामदेवरा क्षेत्र से जुड़े ग्रामीणों क्षेत्रों में
-3 एस आर व 2 सीडब्लूआर भी स्थित है रामदेवरा क्षेत्र में
-10 लाख लीटर नहरी पानी की आपूर्ति हो रही रामदेवरा में

मजबूरी है..
जिम्मेदार रामदेवरा में नहर का मीठा पानी आपूर्ति करने का प्रयास करें। खारे पानी में नहरी पानी की कम मात्रा होने से ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। ग्रामीणों और यात्रियों को मिनरल पानी मोल मंगवा कर पीना पड़ता है।
-आईरख सिंह तंवर, सामाजिक कार्यकर्ता, रामदेवरा

रामदेवरा में नहरी पानी की जो आपूर्ति मिलती है, इसके साथ स्थानीय नलकूप का पानी मिश्रित कर सप्लाई दी जाती हैं। कई बार नहरी पानी नही मिलने पर स्थानीय नलकूप पानी की आपूर्ति देनी पड़ती है। मिश्रित पानी से कोई परेशानी हो रही है तो जांच करवाएंगे।
- सरिता, कनिष्ठ अभियंता, जलदाय विभाग, रामदेवरा।