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सैलानियों के बूम में टैक्सियों की धूम

- जिम्मेदार कर रहे किसी हादसे का इंतजार?- पर्यटकों और स्थानीय बाशिंदों की परेशानी से किसी को नहीं सरोकार

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सैलानियों के बूम में टैक्सियों की धूम

सैलानियों के बूम में टैक्सियों की धूम

जैसलमेर। जैसलमेर में इन दिनों पर्यटन सीजन चरम पर चल रहा है। हजारों की तादाद में देशी सैलानी स्वर्णनगरी निहारने के लिए खींचे चले आ रहे हैं और उनके आकर्षण का केंद्र बना हुआ है जैसलमेर का ऐतिहासिक सोनार दुर्ग। दुर्ग भ्रमण के समय उन्हें टैक्सियों की बेरोकटोक आवाजाही तथा जमघट से बेजा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पैदल भ्रमण करने वाले पर्यटकों को चीरते हुए दुर्ग की घुमावदार घाटियों में एक के बाद एक टैक्सियां दनदनाती हुई जब आवाजाही करती है तो वे यकायक घबरा जाते हैं और उनके होश फाख्ता हो जाते हैं। यह सब पिछले कई दिनों से लगातार चल रहा है। दूसरी तरफ दुर्ग के दशहरा चौक में टैक्सियों तथा ठेलों-रेहडिय़ों की भीड़ से सैलानियों को पांव रखने की कई बार जगह नहीं मिलती।
सीजन में तो दिखाएं सख्ती
कई वर्षों पहले से जिला प्रशासन के निर्देशानुसार तीन पहिया टैक्सियों व चार पहिया वाहनों के दुर्ग में प्रवेश पर सुबह से अपराह्न पश्चात तक रोक लगती रही है। खासकर पर्यटन सीजन के दिनों में पुलिस इस दिशा-निर्देश की पालना करती रही है लेकिन इस बार ऐसा नजर नहीं आता। ऐसे में हालात यह है कि सुबह के समय भी टैक्सियों की रुक-रुककर आवाजाही चलती रहती है। दोपहर बाद तो वहां रैला निकलने लगता है। जबकि देशी पर्यटक दिन से देर शाम तक दुर्ग भ्रमण के लिए पहुंच रहे हैं। और तो और टैक्सियों की आवाजाही और दशहरा चौक से लेकर दुर्ग की घाटियों में यातायात की व्यवस्था को संभालने के लिए यातायात शाखा या पुलिस के कार्मिक नजर नहीं आते। ऐसे में सबकुछ राम भरोसे छोड़ा हुआ दिखाई देता है। पहले कई बार घाटियों में हादसे होते रहे हैं, उनसे भी सबक नहीं लिया जा रहा।
कैसे करें दुर्ग का दीदार
दुर्ग की अखे प्रोल के भीतर से लेकर दशहरा चौक तक में यातायात व्यवस्था इस कदर चरमराई हुई है कि सैलानियों को कई बार रुक कर ऐतिहासिक किले का स्थापत्य को जी भर निहारने और फोटोग्राफी करने तक की सुविधा नहीं मिलती। वहां से गुजर रहे वाहनों विशेषकर टैक्सियों की चिल्ल-पौं से सैलानी घबरा जाते हैं। दुर्ग के भीतर प्रविष्ट करने पर अखे प्रोल में भी विभिन्न सामान बेचने वालों ने काफी जमीन घेर रखी है। दशहरा चौक में तो हालात किसी व्यस्त बस स्टेंड जैसे नजर आते हैं। यहां प्रत्येक समय पांच-सात टैक्सियां और करीब एक दर्जन हाथ ठेले-रेहडिय़ों की वजह से सैलानियों के साथ स्थानीय बाशिंदों को भारी असुविधाओं से दो-चार होना पड़ रहा है। पूर्व में दशहरा चौक और हवा प्रोल आदि में भी पुलिसकर्मी तैनात रहकर व्यवस्थाओं को संभालते रहे हैं, इस बार ऐसी कोई तैनाती दिखाई नहीं दे रही है।