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600 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गड़ीसर का सौंदर्य आज भी जवां

-कोरोना का दर्द झेलकर स्वर्णनगरी पहुंचे सैलानियों को रास आ रहा प्राकृतिक माहौल-कलात्मक सौन्दर्य के बीच रेगिस्तान में नखलिस्तान की हो रही अनुभूति

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600 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गड़ीसर का सौंदर्य आज भी जवां

600 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गड़ीसर का सौंदर्य आज भी जवां


जैसलमेर. निर्माण के सैकड़ों वर्ष बाद भी ऐतिहासिक गड़ीसर तालाब में मौजूद जलराशि, विशाल प्रवेश द्वार टीलों की प्रोल, मध्य में बनी जालीदार पत्थर की बड़ी-बड़ी बंगलियां और छतरियां इसके आकर्षण को आज भी जवां बनाए हुए हैं। सरहदी के समीप रेगिस्तानी क्षेत्र में सैलानियों के लिए करीब 600 साल पुराना गड़ीसर तालाब अजूबे से कम नहीं है। इन दिनों गड़ीसर के मनोहारी वातावरण में सैलानी इन दिनों जमकर नौकायन का लुत्फ भी उठा रहे हैं। नौका की पतवार थामे नाविक उन्हें यहां के इतिहास से रु-ब-रु करवा कर उनके उत्साह व उल्लास को दुगुना कर देते हैं। स्वर्णनगरी का गड़ीसर सरोवर केवल इस कारण से ही ख्यातनाम नहीं हैं कि यह रेगिस्तान में अपार जलराशि को खुद में समाए हुए है, बल्कि हकीकत यह भी है कि ऐतिहासिक माने जाने वाले सरोवर के बीचोबीच सैकड़ों वर्ष प्राचीन बंगलियां कलात्मक सौन्दर्य के कारण हर किसी को अभिभूत कर देती है। कोरोना महामारी का दर्द झेलने के बाद यहां देश भर से आए पर्यटकगड़ीसर तालाब को निहारने अल सुबह पहुंचते हैं। मौसम में घुली ठंडक के बीच प्राकृतिक माहौल का भ्रमण करने के बाद वे घंटों यहां शांति व सुकून की अनुभूति हासिल करने को बैठे रहते हैं। कोरोना महामारी की कृदृष्टि से जैसलमेर का पर्यटन भी अछूता नहीं रहा। ऐसे में विदेशी मेहमानों की गैर मौजूदगी के बावजूद देश भर के सैलानियों के मेले ने गड़ीसर के सौन्दर्य को द्विगुणित कर दिया है।
कलात्मक सौन्दर्य व सांस्कृतिक गौरव की साक्षी बंगलियां
शिल्प सौंदर्य, बेजोड़ कला व सांस्कृतिक गौरव की साक्षी कलात्मक बंगलियां विश्वस्तरीय ख्याति अर्जित कर चुकी है। रेगिस्तान में नखलिस्तान की तस्वीर बने इस तालाब का निर्माण 14वीं शताब्दी में महारावल घड़सीसिंह ने करवाया गया। सरोवर के बीचोबीच सिर उठाए खड़ी बंगलियों व छतरियों का अपना महत्व है। वैसे, गड़ीसर सरोवर हमेशा से आनंद और शांति के पल बिताने का मनपसंद स्थल है। गड़ीसर सरोवर के आसपास के स्थान पिकनिक के ठिकाने रहे हैं।
फिल्मकारों की भी चहेती
-कलात्मक बंगलियों का ही आकर्षण है कि बॉलीवुड फिल्मों व लोकप्रिय धारावाहिकों के फिल्मांकन के लिए इनका चयन किया जाता है।
-हिन्दी फिल्म रेशमा शेरा, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो, नन्हें जैसलमेर, कृष्णा, टशन, अलादीन, टेल मी ए खुदा, तेलुगू फिल्म केका जैसी चर्चित फिल्मों, भूतनाथ व किस देश में होगा चांद जैसे धारावाहिकों का फिल्मांकन भी यहीं हो चुका है।
-विभिन्न एलबमों के गानों का फिल्मांकन भी इन बंगलियों में हुआ है। इन दिनों प्री वेडिंग शूटिंग करवाने वाले युवा जोड़े गड़ीसर आकर बेहद खुश हो जाते हैं।

फैक्ट फाइल -
-1373 संवत् में बना ऐतिहासिक गड़ीसर तालाब
-1913 संवत् में गड़ीसर को काक नदी से जोड़ा गया
-2 वर्ष तक तालाब में रहता है पानी
-20 फीट अधिकतम गहराई भी मानी जाती है सरोवर में