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तपती गर्मी से पहले व्यवस्था सुधारने की चुनौती…जैसलमेर में करोड़ों झोंकने के बावजूद भरोसा टैंकरों पर

मरुस्थलीय जैसलमेर में हर साल की तरह इस बार भी भीषण गर्मी और हीट वेव से पहले पेयजल व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने बड़े-बड़े दावे किए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी सवालों के घेरे में है। अप्रैल की शुरुआत के साथ ही जिले में पेयजल संकट गहराने लगा है।

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मरुस्थलीय जैसलमेर में हर साल की तरह इस बार भी भीषण गर्मी और हीट वेव से पहले पेयजल व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने बड़े-बड़े दावे किए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी सवालों के घेरे में है। अप्रैल की शुरुआत के साथ ही जिले में पेयजल संकट गहराने लगा है। जिले के लाठी, भणियाणा और पोकरण के कई ग्रामीण इलाकों में पानी की भारी किल्लत है। अवैध कनेक्शन, पाइपलाइन लीकेज और कम वोल्टेज के कारण जलापूर्ति ठप हो जाती है।

ग्रामीण महंगे टैंकर खरीदने को मजबूर हैं और प्रशासन से अविलंब समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं। करोड़ों रुपए की स्वीकृतियों और योजनाओं के बावजूद हालात ऐसे हैं कि सैकड़ों गांवों में आज भी पानी की सप्लाई टैंकरों के भरोसे चल रही है। ग्रीष्मकालीन आकस्मिक योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में 15 कार्यों के लिए 294 लाख रुपए और शहरी क्षेत्र में 3 कार्यों के लिए करीब 100 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा आपातकालीन स्थिति में 1 करोड़ रुपए के 4 प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है। ट्यूबवेल, पाइपलाइन, मोनोब्लॉक पंप सेट, केबल और वाल्व जैसी व्यवस्थाओं का दावा किया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये तैयारियां समय पर धरातल पर दिखेंगी?

गांवों में जल संकट की आहट

जिले के ग्रामीण इलाकों में 270 गांवों और 2583 ढाणियों तक पानी टैंकरों से पहुंचाया जाना है। वर्तमान अप्रेल से आगामी अगस्त माह तक इसके लिए 10 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। शहरी क्षेत्र में भी हालात बहुत अलग नहीं हैं—जैसलमेर शहर और पोकरण के लिए अलग-अलग प्रस्ताव भेजे गए हैं, जो अभी स्वीकृति के इंतजार में हैं। प्रशासन ने टैंकर से पानी लेने के लिए कार्ड तक जारी कर दिए हैं, जो इस बात का संकेत है कि व्यवस्था स्थायी समाधान के बजाय अस्थायी उपायों पर टिकी हुई है।

21 दिन का भरोसा, उसके बाद क्या ?

30 मार्च से 13 मई तक प्रस्तावित नहरबंदी को लेकर भी तैयारियों के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक पूरी तरह से नहरबंदी नहीं हुई है। जिले के 212 तालाबों में 1039.91 एमएल पानी भरा जा चुका है, जिससे महज 21 दिनों की आपूर्ति संभव बताई जा रही है। अतिरिक्त 10 दिनों के लिए नहर में पानी स्टोर करने की योजना है। नहर बंदी के दौरान 115.56 लाख रुपए के कार्य—जैसे पाइपलाइन रिप्लेसमेंट, डिग्गी मरम्मत, फिल्टर मीडिया बदलाव और पंपिंग मशीनों की मरम्मत—चार चरणों में किए जाएंगे। कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी यही सवाल है कि क्या ये इंतजाम संकट को टाल पाएंगे?

हैंडपंप-ट्यूबवेल की लंबी सूची, फिर भी कंठ प्यासे

जिले में 612 ट्यूबवेल, 5615 हैंडपंप, 80 आरओ प्लांट, 113 सोलर डीएफयू और 53 सोलर ट्यूबवेल संचालित बताए जा रहे हैं। इनके रखरखाव और मरम्मत के लिए रेट कॉन्ट्रेक्ट की व्यवस्था भी है। पटवारियों और ग्राम विकास अधिकारियों के जरिए ट्यूबवेल की मॉनिटरिंग की बात कही जा रही है। इसके बावजूद हर गर्मी में हैंडपंप खराब होने, ट्यूबवेल सूखने और पाइपलाइन लीकेज की शिकायतें आम हो जाती हैं। ऐसे में आंकड़ों की लंबी फेहरिस्त के बीच आमजन को राहत कब मिलेगी, यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।

समस्याग्रस्त गांवों में भेजे जा रहे टैंकर

प्रशासन और विभाग की ओर से तैयारियों और बजट की कमी नहीं है, क्रियान्वयन की गति और प्रभावशीलता की कसौटी पर उतरने के लिए हम तत्पर हैं। पिछले अर्से के दौरान शहर व गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए कई उपाय किए गए हैं। इससे जलापूर्ति व्यवस्था निश्चित रूप से मजबूत होगी। वर्तमान में 72 घंटे के अंतराल में पानी पहुंचाया जा रहा है और समस्याग्रस्त गांवों में टैंकर भेजे जा रहे हैं।

- निरंजन मीणा, अधिशासी अभियंता, नगरखंड, जलदाय जैसलमेर