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पुस्तकें पढऩे का बढ़ गया सुकून, अब चाहिए बस जुनून

सीएसआर मद से अडाणी फाउंडेशन ने 70 लाख खर्च कर संवारा जिला पुस्तकालय- पूर्व कलक्टर आशीष मोदी की सार्थक पहल

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पुस्तकें पढऩे का बढ़ गया सुकून, अब चाहिए बस जुनून

पुस्तकें पढऩे का बढ़ गया सुकून, अब चाहिए बस जुनून

जैसलमेर। आज की युवा पीढ़ी का कड़वा सच यह है कि, वह पुस्तकों की दुनिया से निरंतर दूर होती जा रही है और इंटरनेट से संबद्ध मोबाइल की स्क्रीन पर उनकी अंगुलियां दिन से रात तक रेंगती नजर आती है। लेकिन यह भी इतना ही बड़ा सच है कि जीवन में जिनके इरादे आगे बढऩे के होते हैं, ऐसे सभी आयुवर्ग के लोगों और जीवन को सही मायनों में जीने की समझ के लिए पुस्तकों का महत्व कभी खत्म नहीं हो सकता। इसी सोच के साथ जैसलमेर के सबसे व्यस्त हनुमान चौराहा पर स्थित जिला पुस्तकालय की कायापलट की गई है। इस इमारत को इतने शानदार ढंग से तैयार किया गया है कि आने वाले समय में जब नए कलेवर वाले इस पुस्तकालय का विधिवत उद्घाटन हो जाने के बाद यह आमजन के लिए सुलभ होगा तो निश्चित ही यहां आने वालों की संख्या में संख्यात्मक और गुणात्मक दोनों रूप में भारी अंतर आ जाएगा। जैसलमेर के पूर्व और भीलवाड़ा के वर्तमान कलक्टर आशीष मोदी की पहल पर अडाणी फाडंडेशन ने सीएसआर मद से इस पुस्तकालय पर निर्माण, रंग-रोगन और साज-सज्जा के साथ फर्नीचर पर 70 लाख रुपए खर्च किए हैं। जिससे यह पुस्तकालय अब पूरी तरह से हाइटेक बन गया है और जैसलमेर में इस स्तर का सुविधाओं से युक्त दूसरा पुस्तकालय अथवा लाइब्रेरी सरकारी या निजी क्षेत्र में भी उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में यहां कामकाज पूरा हो गया है। इंतजार किया जा रहा है, इसके बाकायदा उद्घाटन का। संभावना जताई जा रही है कि आगामी दिनों में प्रदेश के मुख्यमंत्री जैसलमेर यात्रा के दौरान इसका उद्घाटन कर सकते हैं।
बदल गई सूरत और सीरत
फाउंडेशन की ओर से करवाए गए कार्यों के तहत पुस्तकालय के पुराने ढांचे को एक तरह से नया आवरण प्रदान किया गया है। जरूरत के हिसाब से नवनिर्माण भी करवाया है। भीतर प्रविष्ट होते ही आरामदायक कुर्सियों, बैंच और सेंट्रल टेबल को रखवाया गया है। मुख्य हॉल में सभी उपलब्ध पुस्तकों को नई अलमारियों में इस तरह से रखा गया है, जिससे वे आसानी से नजर आ सकें। हजारों पुस्तकों को जिनमें से अधिकांश पूर्व में पूर्व में लगभग अंधियारे कमरे में बेतरतीब ढंग से रखने की मजबूरी थी, उन्हें नई अलमारियों में करीने से रखा जा चुका है। सभी विषयों की पुस्तकों और मशहूर लेखकों की पुस्तकों को एक साथ रखने की कोशिश की गई है ताकि जिज्ञासु व्यक्ति को तुरंत नजर आ सके। ऊपरी मंजिल पर दोनों विशाल कक्षों में से एक को हाइटेक बनाया गया है, दूसरे में अपनी पठन सामग्री लाकर पढऩे की सुविधा युवाओं को विशेषकर विद्यार्थियों व प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों को दी जाएगी। उनकी सामग्री को हिफाजत से रखने के लिए लॉकर्स की सुविधा भी मुहैया करवा दी गई है। पूरे परिसर में दूधिया रोशनी का इंतजाम है। आने वाले दिनों में यह जगह कई-कई घंटों तक बैठ कर अध्ययन करने वालों को पूरा सुकून दिलाएगी। जिला पुस्तकालयाध्यक्ष अक्षय कुमार चंदेल ने बताया कि जल्द ही पुस्तकालय की सेवाएं पुस्तक प्रेमियों व युवाओं को विधिवत रूप में मिलने लगेगी।
46 हजार पुस्तकों का समृद्ध खजाना
भाषा एवं पुस्तकालय विभाग की ओर से संचालित इस पुस्तकालय में पुस्तकों का विशाल संसार सांस लेता है। मौजूदा समय में यहां जीवन और प्रकृति से जुड़े सभी विषयों की 47 हजार से ज्यादा पुस्तकें हंै। कोलकाता के राजा राममोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान की तरफ से सबसे ज्यादा किताबें मुहैया करवाई जा रही है। जैसलमेर में वर्ष 1961 में इस पुस्तकालय की स्थापना की गई। यहां अनेक बहुमूल्य किताबें उपलब्ध हैं। नामी गिरामी संतों और साहित्यकारों में संत तुलसीदास, मुंशी प्रेमचंद, शेक्सपीयर, रबिंद्रनाथ टैगोर, मैक्सिम गोर्की, अज्ञेय, लियो टॉलस्टॉय, निराला, महादेवी वर्मा से लेकर मिर्जा गालिब, सुमित्रानंदन पंत, फिराक गोरखपुरी, रघुवीर सहाय, दुष्यंत कुमार, हरिशंकर परसाई, शरद जोशी, कमलेश्वर, नरेंद्र कोहली आदि के साथ देश-दुनिया के कई प्रसिद्ध हस्तियों और लेखकों की पुस्तकें यहां रखी हुई हैं। पूर्व में इस पुस्तकालय और वाचनालय में रोजाना 200-250 से ज्यादा युवा तथा प्रत्येक आयुवर्ग के लोग पढऩे के लिए पहुंचते रहे हैं। पहले जहां साहित्य से जुड़ी किताबें ज्यादा पढ़ी जाती थी, अब उनकी जगह कैरियर से जुड़ी सामग्री ने ले ली है। इसके अलावा जैसलमेर में आने वाले सभी समाचार पत्र-पत्रिकाओं को भी पाठकों के लिए उपलब्ध करवाया जाता रहा है।
और बढ़ेगा आकर्षण
जिला पुस्तकालय के समीप ही नगरपरिषद जैसलमेर की तरफ से 100 फीट ऊंचे टावर पर 20 गुणा 30 फीट का तिरंगा लगाए जाने की कवायद चल रही है। गत दिनों ट्रायल हो चुका है। आगामी दिनों में प्लेटफार्म का निर्माण कर राष्ट्रीय ध्वज लहराया जाएगा। उससे थोड़ी ही दूरी पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अष्टधातु की प्रतिमा भी पुरानी प्रतिमा की जगह स्थापित की जा चुकी है। जिसका अनावरण भी जल्द किया जाना है। इन दो सौगातों से जिला पुस्तकालय के आसपास का वातावरण भी आकर्षक हो जाएगा।

अधिकाधिक लोग उठाएं लाभ
जैसलमेर में पदस्थापन के दौरान जिला पुस्तकालय के जीर्णोद्धार और उसे साधन संपन्न बनाने का अवसर मिला। संबंधित फाउंडेशन ने भी पूर्ण सहयोग दिया। जैसलमेर एक बहुत प्यारा शहर है। यहां के युवाओं से लेकर सभी आयुवर्ग के अधिकाधिक लोग सुरुचिपूर्ण वातावरण में पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों व पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन करें, यही कामना है।
- आशीष मोदी, पूर्व कलक्टर जैसलमेर एवं वर्तमान जिला कलक्टर भीलवाड़ा

उद्घाटन के लिए लिखा है
जिला पुस्तकालय का जीर्णोद्धार और सौन्दर्यकरण का कार्य पूरा हो चुका है। इस संबंध में राज्य सरकार को सूचित कर दिया गया है। आशा करते हैं कि, जल्द ही इसका उद्घाटन किया जाएगा और लोगों को पुस्तकालय की सेवाओं का लाभ मिलेगा।
- डॉ. प्रतिभा सिंह, जिला कलक्टर, जैसलमेर