महोत्सव में रात भर चली रम्मत, भोर में समापन

-रसिक हुए अभिभूत

By: Deepak Vyas

Published: 25 Feb 2021, 11:07 PM IST


जैसलमेर. राजस्थान पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन जैसलमेर के तत्वावधान में कृष्ण कम्पनी तेज मण्डली रम्मत कला संस्थान जैसलमेर के स्थानीय कलाकारों की ओर से गत रात मरु महोत्सव में तेज कवि लिखित लोकनाट्य रम्मत जोग राजा भतर््ृहरि का ख्याल का सूर्यादय होने तक मंचन किया गया।
उज्जैन के राजा भतर््ृहरि के जीवन प्रसंग पर आधारित लोकनाट्य शैली में लगभग सौ वर्ष पूर्व रचित इस रम्मत का मंचन जिला कलक्टर आशीष मोदी के संरक्षण मे पूरी रात किया गया। जिला कलक्टर मोदी ने लुप्त होती स्थानीय लोक सांस्कृतिक परम्परा के संरक्षण व संवद्र्धन के उद्देश्य से इसे अबकि बार मरु महोत्सव में शामिल किया।
लोकानुरंजन के पारम्परिक माध्यम रम्मत के मंचन प्रोत्साहन को समर्थन व नए खिलाडी कलाकारों के उत्साहवर्धन के लिए सभी पुराने खिलाडऱ, टेरिए, विभिन्न समाजों के मौजिज, रम्मत प्रेमी कलानुरागी, सद्गृहस्थ सपरिवार, मित्र सहित जैसलमेर के रम्मतप्रेमी देखने में पूरी रात जमे रहे। जोधपुर, फलोदी, पोकरण व बीकानेर से बड़ी संख्या में रम्मतप्रेमी इस रम्मत को देखने के लिए पूनम स्टेडियम में रात भर उपस्थित रहे।
सोशल मीडिया व संचार के विभिन्न माध्यमों से देश.विदेश के रम्मत अनुरागी सजीव प्रसारण से जुड़े रहे रहे। जिला कलक्टर आशीष मोदी ने स्वयं अपनी कोर टीम सहित देर रात तक रम्मत का आनंद लिया। संस्कृति प्रेमियों के विभिन्न समूह और महिलाओं के दल शुरू से समापन तक टेर गुनगुनाने में सहभागी बने।
पूनम स्टेडियम के विशाल मुक्ताकाशी मंच पर बुधवार रात मारवाड़ी रंगत की जैसलमेरी शैली के इस लोकनाट्य रम्मत में नए व उदीयमान कलाकारों के साथ.साथ पारम्परिक वरिष्ठ कलाकार प्रमुख किरदारों ने अपने अभिनय की छटा बिखेरीे। वरिष्ठ कलाकारों एवं टेरियों ने प्रस्तुतीकरण में प्रभावी भूमिका अदा की। पुरुषों की ओर से अभिनीत स्त्री पात्रों की अदाकारी ने विशेष रूप से प्रभावित किया। रम्मत का समापन दुर्ग स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर में हुआ।
मंच पर छटा बिखेरने वाले कलाकार
रम्मत में मंच पर अदाकारी करने उतरने वालों में राजा भर्तृहरि कमलकिशोर आचार्य, कोचवान शिवकुमार आचार्य, पटरानी पिंगला, राजेश कुमार बरसा पुरोहित, रानियां मयंक आचार्य, दिनेश व्यास, आदित्य गोपा, गोरखनाथ जयंत पुरोहित खेतपालिया, ब्राह्मण भूपेश खेतपालिया, हलकारा उमेश व्यास, विक्रम अनिरुद्ध बिस्सा, दीवान सौरभ केवलिया, मि_ू मयंक आचार्य, मिठूडी रिंकू व्यास, मृग हीरू सेवक व राजा खेतपालिया, मृगिणी जयेश व्यास व दिनेश व्यास, गणिका पातर आदित्य गोपा, दासी जयेश व्यास, ड्योढीदार बृजवल्लभ व्यास, फराश चमन बरसा पुरोहित व बेटी मितेश जोशी तथा अन्य कलाकार शामिल है। तबला वादन गोविन्दगाोपाल जगाणी व अक्षत जोशी तथा ढोलक वादन बृजमोहन बिस्सा शामिल रहे।
टेर की स्वर लहरियों में शामिल कलाकारÓ
रम्मत मंचन को प्रभावी बनाने में टेरियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस रम्मत की टेर में प्रमुख रूप से उम्मेद व्यास भोपत, हरिवल्लभ शर्मा, राणीदान सेवग, रमेश बिस्सा रामलाल गोपा, भीखचन्द भोपत, हरिवल्लभ बोहरा, घनश्याम चूरा, अनिकेत बिस्सा, गिरधर पुरोहित, प्रवीण गोपा, मयंक व्यास, कमल जोशी, दिलीप शर्मा, महेन्द्र व्यास, नितिन व अन्य कलाकारों ने भाग लिया।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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