12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कच्छ से देवी ने आकर पोकरण में किया स्थायी निवास

पोकरण कस्बे का प्रसिद्ध आशापुरा देवी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है। पोकरण ही नहीं बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, फलोदी, बाड़मेर आदि क्षेत्रों से प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु यहां आकर दर्शन करते है।

2 min read
Google source verification

पोकरण कस्बे का प्रसिद्ध आशापुरा देवी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है। पोकरण ही नहीं बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, फलोदी, बाड़मेर आदि क्षेत्रों से प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु यहां आकर दर्शन करते है। पुष्करणा ब्राह्मण समाज में बिस्सा जाति की कुलदेवी आशापुरा का मंदिर कस्बे से पश्चिम की ओर ३ किलोमीटर दूर एक समतल पठारी भूमि पर स्थित है। इस मंदिर की स्थापना विक्रम संवत् १३१५ में माघ शुक्ला तृतीया के दिन देवी के अनन्य भक्त रुद्रनगर लोद्रवा निवासी लूणभानू बिस्सा ने की थी। पौराणिक व प्रचलित मान्यताओं के अनुसार लूणभानू बिस्सा अपनी कुलदेवी आशापूर्णा के अनन्य भक्त थे, जो प्रतिवर्ष गुजरात प्रांत के कच्छ क्षेत्र में स्थित आशापूर्णा मंदिर दर्शनों के लिए जाते थे। जब वे वृद्ध हुए, तब उन्होंने मां आशापूर्णा से पुन: आने में असमर्थता जताते हुए क्षमा मांगी, तभी देवी ने अपने भक्त की पुकार सुनकर कहा कि वे उसकी भक्ति से प्रसन्न है और जो इच्छा हो, वरदान मांगो। उन्होंने कहा कि मैं अपने शेष जीवन में भी आपके चरणों की सेवा करना चाहता हूं, ताकि मैं अपना अंतिम समय भी आपके चरणों में समर्पित कर सकूं। मां आशापूर्णा ने उन्हें वरदान दिया कि वह उसके साथ रुद्रनगर चलेगी, लेकिन तुम रास्ते में किसी भी दशा में पीछे मुड़कर मत देखना और जिस समय वह स्थान पर यह दशा भंग होगी, वे वहीं रुक जाएंगी। इसी शर्त के अनुसार कच्छ से रुद्रनगर जाते समय पोकरण से ३ किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में भक्त बिस्सा को ठहर माता ऐसा शब्द सुनाई दिया, तब उन्होंने अनायास ही पीछे मुड़कर देखा तो मां आशापूर्णा देवी ने कहा कि तुमने मेरी आज्ञा का उल्लंघन किया है। इसलिए अब मैं यहां से आगे नहीं बढ़ सकती। इतना कहकर मां आशापूर्णा भूमि में प्रविष्ट हो गई। उस जगह पर उनका एक दुपट्टा बाहर पड़ा था। उसी स्थान पर बिस्सा ने मां आशापूर्णा देवी के मंदिर का निर्माण करवाया।

समय के साथ विस्तार

समय के साथ-साथ मंदिर का विकास आगे बढ़ता रहा। वर्तमान में इस ऐतिहासिक मंदिर में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने व भोजन की पर्याप्त व्यवस्था है। मंदिर के ठीक सामने आशापुरा धर्मशाला ट्रस्ट बीकानेर पोकरण की ओर से दो मंजिला धर्मशाला का भी निर्माण करवाया गया है। इसमें करीब ५०-६० कमरों में ठहरने, भोजन व गोशाला की व्यवस्था की गई है। इसी प्रकार आशापुरा मंदिर ट्रस्ट की ओर से मंदिर के पास ही एक धर्मशाला बनवाई गई है। यहां भी अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त कमरों, हॉल आदि का निर्माण करवाया गया है।

उमड़ता है आस्था का ज्वार

आशापुरा मंदिर व आसपास का क्षेत्र पोकरण कस्बे के निवासियों के लिए एक प्राकृतिक पिकनिक स्थल भी है। वर्ष में ३ बार चैत्र, आसोज व भादवा महीने में यहां मेले लगते है। जिसमें हजारों की संख्या में यात्री दर्शनार्थ पहुंचकर अमन, चैन, खुशहाली के लिए प्रार्थना करते है। इसके अलावा भी वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है।