
मौसम के बदलने के साथ विदेशी मेहमान रवाना होने लगे है। गर्मी की शुरुआत के साथ प्रवासी पक्षी भी वतन वापसी कर रहे है। वन्यजीव बाहुल्य लाठी क्षेत्र के जलस्त्रोतों के किनारे पक्षियों का कलरव थमने लगा है। रूस, साइबेरिया, यूरेशिया, यूरोपियन देशों और अन्य एशियाई देशों में सितंबर-अक्टूबर माह मे तेज सर्दी के दौर के साथ बर्फबारी शुरू हो जाती है। ऐसे में कई प्रजातियों के पक्षी भारत, विशेषकर पश्विमी राजस्थान का रुख करते है। यहां की सर्दी उनके लिए अनुकूल रहती है। इस समय में रंग-बिरंगे दुर्लभ प्रजाति के पक्षी प्राकृतिक छटा को और मनोहारी बना देते है। गर्मी की दस्तक के साथ ही इन प्रवासी पक्षियों की वतन वापसी का दौर शुरू हो जाता है।
लाठी क्षेत्र के जलस्त्रोतों पर कुरजां, कॉमन क्रेन, इंडियन कोर्सर, तिलोर, बाज, मैक्विन बस्टर्ड, स्टेपी ईगल, हेरियर, सारस, लग्गर फाल्कन, शेकर फाल्कन, रेड नेक्ड फाल्कन, पेरेग्रीन फाल्कन, रिवरर्टन, यूरोपियन स्पूनबिल, बोनेली ईगल, शिकरा, टोनी ईगल, ऑसप्रे, ईगल आउल, शोर्ट इअर आउल, बार्न आउल, येलो आइड पिजन, सोसिएवल लप्विंग सहित कई प्रजातियों के पक्षी डेरा डालते है।
वन्यजीव व पक्षी बाहुल्य लाठी क्षेत्र के तालाबों पर प्रवासी पक्षी आते है। लाठी सहित धोलिया, भादरिया, खेतोलाई, चाचा, डेलासर, कोजेरी नाडी, गंगाराम की ढाणी सहित सभी जलस्त्रोतों पर प्रवासी पक्षियों का डेरा रहता है। मध्य एशिया, यूरोप, तिब्बत, साइबेरिया, मंगोलिया, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, चीन, कजाकिस्तान, रूस, आस्ट्रेलिया सहित कई देशों के प्रवासी पक्षी अब पुन: रवाना हो चुके है। अब केवल एशियाई देशों से आने वाले कुछ गिद्ध ही यहां ठहरे हुए है। शेष पक्षियों के रवाना हो जाने से जलस्त्रोत सूने होने लगे है।
गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ प्रवासी पक्षियों के वतन वापसी का दौर शुरू हो चुका है। इस बार प्रवासी पक्षियों की आवक बीते कुछ वर्षों की तुलना में कम हुई थी। अब जलस्त्रोत सूने होने लगे है।
- पंकज विश्नोई, वन्यजीवप्रेमी, खेतोलाई
रामगढ़. रामगढ़ के निकट स्थित सोनू गांव में एक चिंकारा भटक कर पहुंच गया। इस दौरान कुछ श्वानों ने उस पर हमला कर दिया, जिससे चिंकारा घायल हो गया। चिंकारा भागकर शिव मंदिर की तरफ गया। सोनू गांव के युवा जगन्नाथसिंह, समुंद्रसिंह, हमीरसिंह, बाबुसिंह, रेवतसिंह, प्रहलादसिंह और अमानसिंह ने मशक्कत कर चिंकारा को श्वानों के चंगुल से बचाया। उन्होंने घायल चिंकारा का पशु चिकित्सक डॉ. विरजेश से उपचार कराया। उपचार के पश्चात, सोनू के इन युवाओं ने चिंकारा को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया।
Published on:
10 Apr 2026 08:07 pm
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