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जिंदगी की हारी जंग… मौत के बाद भी 8 जनों की जिंदगी रोशन करेगी प्रशिक्षु पायलट चेष्टा

पुणे के एक इंस्टीट्यूट में कॉमर्शियल पायलट का प्रशिक्षण लेने गई जिले की होनहार युवती ने मंगलवार को दुनिया से अलविदा कह दिया, लेकिन उसने 8 लोगों की जिंदगी भी रोशन कर दी।

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पुणे के एक इंस्टीट्यूट में कॉमर्शियल पायलट का प्रशिक्षण लेने गई जिले की होनहार युवती ने मंगलवार को दुनिया से अलविदा कह दिया, लेकिन उसने 8 लोगों की जिंदगी भी रोशन कर दी। खेतोलाई गांव के प्रतिष्ठित परिवार एवं वर्षों तक सरपंच रहे भैराराम विश्नोई की पड़पोती और स्थानीय निवासी सुषमा व ज्योतिप्रकाश विश्नोई की 21 वर्षीय पुत्री ट्रेनी पायलट चेष्टा विश्नोई महाराष्ट्र के पुणे स्थित एक इंस्टीट्यूट में कॉमर्शियल पायलट का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही थी। गत 9 दिसंबर को एक सडक़ दुर्घटना में अपने सहपाठियों के साथ वह भी गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे पुणे के अस्पताल में भर्ती करवाया गया। मंगलवार को जीवन-मृत्यु से संघर्ष करते हुए अपनी जिंदगी की जंग हार गई। होनहार युवती के निधन से खेतोलाई सहित आसपास गांवों व जिले भर में शोक की लहर छा गई। बुधवार अपराह्न 4 बजे उसका शव हवाई मार्ग से जैसलमेर पहुंचा और यहां से सडक़ मार्ग से पैतृक गांव खेतोलाई लाया गया। यहां उसका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम शव यात्रा में शामिल सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से होनहार युवती को विदाई दी।

अंगदान कर दिया मानवता का संदेश

लगातार नौ दिन तक जीवन-मृत्यु से संघर्ष करती चेष्टा खुद अपनी जिंदगी की जंग हार गई, लेकिन उसके माता-पिता ने अपने जिगर के टुकड़े के अंग किसी जरुरतमंद की जिंदगी बचाने के लिए दान कर समाज को मानवता का बहुत बड़ा संदेश दिया है। जब चेष्टा के जीवन को बचाने की उम्मीद कम होने लगी तो उसकी माता सुषमा विश्नोई ने चिकित्सकों के साथ सलाह कर किसी अन्य की जिंदगी रोशन करने के लिए अपनी लाडली के अंग दान करने का निर्णय लिया। इसके बाद अपने पति ज्योतिष प्रकाश एवं परिवार के अन्य लोगों से भी चर्चा की और अंगदान करने जैसा का बड़ा फैसला लिया। मंगलवार को चेष्टा ने अंतिम सांस ली। जिसके बाद उसके ह्रदय, लिवर, किडनी, अग्नाशय सहित कुल 8 अंग दान कर दिए, जो अन्य जरुरतमंद मरीजों को जीवनदान देने में सहायक होंगे।जिले में इस प्रकार से एक साथ 8 अंग दान करने का संभवतया यह पहला मामला है।