
राजस्थान में पाकिस्तान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के सबसे बड़े क्षेत्र वाले रेगिस्तानी जैसलमेर जिले में जासूसी के संदेह में एक और संदिग्ध के पकड़े जाने के साथ यह तय हो गया है कि पड़ोसी देश की खुफिया एजेंसी आइएसआइ की गिद्ध दृष्टि एक बार फिर इस इलाके में गड़ गई हैं। पूर्व में जिस तरह से पहलगाम आतंकी हमले के बाद सरहदी जैसलमेर में पाकिस्तान की आइएसआइ की जासूसी गतिविधियों में तेजी दर्ज की गई थी, कुछ-कुछ वैसे ही हालात ऑपरेशन सिंदूर के बाद बने हुए हैं। 464 किलोमीटर लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र वाला यह जिला सामरिक दृष्टिकोण से अहम है और यही वजह है कि ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान की तरफ से देश के जिन चुङ्क्षनदा स्थानों पर ड्रोन हमले किए गए थे, उनमें जैसलमेर शामिल था। इस साल विभिन्न एजेंसियों ने अब तक जासूसी के संदेह में चार जनों को पकड़ा है। सभी पर लगभग एक समान आरोप हैं कि, वे यहां से पाकिस्तान में बैठे एजेंट्स को फोन पर गोपनीय जानकारियां साझा कर रहे थे।
सीमावर्ती जैसलमेर जिले में जासूसी के लिए आइएसआइ कई तरीकों से स्थानीय युवाओं को फांसती रही है। इनमें लालच सबसे अहम है। उन्हें पैसों के बदले सूचनाएं देने के लिए तैयार किया जाता है। इसके अलावा यह एजेंसी हनी ट्रेप से लेकर ब्लैकमेलिंग के दूसरे हथकंडों को आजमाने के लिए भी कुख्यात है। वैसे जैसलमेर जिले के विशाल क्षेत्रफल और 300 से अधिक प्रतिबंधित गांवों में निगरानी चुनौतीपूर्ण है। यही कारण है कि नाचना, मोहनगढ़, रामगढ़ जैसे क्षेत्रों में बाहरी लोगों के सत्यापन में सक्रियता की जरूरत है। सुरक्षा चौकियों की कमी से चुनौतियां बढ़ी हैं। सेना के ठिकानों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। इसके चलते ही एक के बाद एक जासूसी करने के आरोपी पकड़े जा रहे हैं।
Updated on:
21 Aug 2025 09:02 pm
Published on:
21 Aug 2025 11:32 pm
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