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थार के सूरज-हवा पर संगठित अपराध की परछाई, सोलर-विंड प्लांट बने अपराधियों का नया निशाना

थार की तपती रेत पर खड़ी हो रही हरित ऊर्जा की नई दुनिया अब अपराधियों की नजर में है।

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जैसलमेर.केस 1- सांगड़ थाना क्षेत्र में पवन ऊर्जा संयंत्र से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चोरी हुए। सांगड़ पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।

केस 2-गत अप्रेल माह में खुहड़ी थाना क्षेत्र में मार्च 2024 में हुई पवन ऊर्जा संयंत्र चोरी का खुलासा हुआ। तकनीकी निगरानी से मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, जो पहले भी ऐसे मामलों में शामिल रहा है।

केस 3- गत वर्ष अप्रेल माह में सांकड़ा क्षेत्र में 300 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट से करीब 22 हजार मीटर केबल चोरी हो गई थी। ऑपरेशन मरु वज्र प्रहार के तहत पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।

जैसलमेर. थार की तपती रेत पर खड़ी हो रही हरित ऊर्जा की नई दुनिया अब अपराधियों की नजर में है। जिले में लगातार सामने आ रही घटनाएं बता रही हैं कि अब सोलर और विंड एनर्जी संयंत्र सिर्फ तकनीकी विकास का केंद्र नहीं, बल्कि संगठित अपराधों के नए निशाने बन चुके हैं। बीते डेढ़ वर्षों में जैसलमेर जिले के सांकड़ा, सांगड़, खुहड़ी सहित कई क्षेत्रों में विंड व सोलर प्लांट्स से बड़ी मात्रा में केबल, बैटरियां, सोलर मॉड्यूल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चोरी होने की घटनाएं सामने आ चुकी है। पुलिस ने कई अभियानों में बड़ी कामयाबी भी हासिल की, लेकिन घटनाओं की पुनरावृत्ति यह संकेत दे रही है कि सुनियोजित नेटवर्क काफी फैला हुआ है।

चोरी का तरीका:

तकनीक के सहारे, सुरक्षा में सेंध- इन घटनाओं की खास बात यह रही है कि चोर आधुनिक तकनीकी संयंत्रों में भी सेंध लगाने में सक्षम नजर आए हैं।

- अधिकतर चोरियां रात के समय हुईं, जब गश्त कमजोर होती है।-आरोपी पहले संयंत्र का रैकी करते हैं, फिर सीमावर्ती हिस्सों से वाहन खड़े कर प्लांट की बाड़ काटते हैं और केबल, बैटरियों या सोलर पैनल्स को व्यवस्थित तरीके से निकालकर भाग जाते हैं।

- पूरा काम बेहद कम समय में अंजाम दिया जाता है, जिससे साफ है कि गिरोह प्रशिक्षित और संगठित हैं।

घटनाओं से स्पष्ट है कि चोरी की सामग्री सिर्फ घरेलू उपयोग या व्यक्तिगत फायदे तक सीमित नहीं रहती। अधिकांश चोरियां सुनियोजित नेटवर्क के माध्यम से चोर बाजार या फिर कबाड़ मंडियों तक पहुंचती हैं।

तकनीकी कंपनियों पर दबाव, संयंत्रों की सुरक्षा पर सवाल

लगातार हो रही इन घटनाओं से निजी कंपनियों पर सुरक्षा बढ़ाने का दबाव बढ़ा है। अधिकांश कंपनियों ने निजी गार्ड, सीसीटीवी और ऊंची बाड़बंदी की व्यवस्था की है, लेकिन संगठित गिरोहों की चालबाजियों के आगे ये उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। कुछ मामलों में प्लांट के भीतर कार्यरत ठेकेदारों और पूर्व कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही है, जिससे अंदरूनी मिलीभगत की आशंका को बल मिलता है।

पुलिस की सतर्कता और अभियानों से खुल रही परतें

जिला पुलिस ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में विशेष टीमें गठित कर "ऑपरेशन क्लीन लाइन", "ऑपरेशन मरु वज्र प्रहार" जैसे नामों से अभियानों की शुरुआत की है। इन अभियानों में तकनीकी मदद, स्थानीय मुखबिरों का सहयोग और सीसीटीवी फूटेज के आधार पर गिरफ्तारी की जा रही है। पुलिस के अनुसार, कुछ मामलों में आरोपी चोरी के लिए मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर ट्रॉली का प्रयोग करते हैं ताकि ट्रेसिंग से बचा जा सके।

भविष्य की राह: निगरानी तंत्र मजबूत करना जरूरी

निवर्तमान पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी के अनुसार ऊर्जा का भंडार भविष्य की जरूरत हैं, लेकिन यदि उनकी सुरक्षा ही कमजोर रहेगी तो निवेशक और कंपनियां क्षेत्र से पीछे हट सकती हैं। जानकारों का मानना है कि प्लांट्स में स्मार्ट अलार्म, लाइव वीडियो मॉनिटरिंग, टैगिंग और मानव आधारित रात्रिकालीन गश्त की व्यवस्था आवश्यक है। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को निगरानी समितियों में शामिल कर समुदाय-आधारित सुरक्षा मॉडल अपनाना होगा।