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सरहदी जिले में जगा सा’ब बनने का जज्बा

- 15 हजार से ज्यादा युवा तैयारी में जुटे- 5 साल में तीन हजार युवाओं को मिली सरकारी नौकरी- 20 युवा आरएएस परीक्षा में भी चयनित
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सरहदी जिले में जगा सा'ब बनने का जज्बा

सरहदी जिले में जगा सा'ब बनने का जज्बा

जैसलमेर. शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ेपन का शिकार रहे सीमांत जैसलमेर जिले में परिदृश्य बदल रहा है। पढ़ाई-लिखाई कर सरकारी सेवा में जाने का जज्बा जिले के युवाओं में खूब देखने को मिल रहा है। हाल में आरएएस परीक्षा का अंतिम परिणाम सामने आने पर जिले के करीब डेढ़ दर्जन युवक-युवतियां चयनित होने में कामयाब रही। इनमें ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाएं ज्यादा हैं। इसके अलावा विगत अर्से के दौरान जिले के युवा आरएएस के अलावा यूपीएससी, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, सेना, पुलिस, शिक्षा, लेखा जगत आदि में सफलता के प्रतिमान स्थापित कर चुके हैं। उनसे प्रेरणा पाकर अन्य युवाओं का मनोबल ऊंचा हुआ है और वे भी जैसलमेर शहर के साथ बाहरी शहरों तक में जाकर जरूरी शिक्षा ग्रहण कर राजकीय सेवा में जाने के लिए कमर कस चुके हैं। जानकारों के मुताबिक जिले के 15 हजार से ज्यादा युवा तैयारी में जुटे हुए हैं। वर्तमान में 5 साल में तीन हजार युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। वर्ष 2018 की भर्ती में यहां 15 से 20 युवा आरएएस परीक्षा में चयनित हुए हैं।
हजारों युवा जुटे
वर्तमान में जिले के कम से कम 15 हजार युवक-युवतियां आगामी सितम्बर माह में प्रस्तावित अध्यापक पात्रता परीक्षा के लिए तैयारी में जुटे हैं। इसके अलावा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उनकी ओर से हिस्सेदारी की जा रही है तथा वे दिन में 8 से 12 या कुछ तो इससे भी अधिक समय तक पढ़ाई कर रहे हैं। सबकी मंजिल एक अदद सरकारी नौकरी है। दरअसल कोरोना काल में जिले के सबसे प्रमुख पर्यटन और पत्थर उद्योगों के अलावा अन्य काम-धंधों पर बहुत विपरीत असर पडऩे से भी युवाओं में सरकारी नौकरी पाने की हसरत बढ़ी है। इनमें महिलाओं व बालिकाओं का जोश ज्यादा देखने लायक है। पिछले अर्से के दौरान शिक्षकों की भर्ती में जिले की बहू-बेटियों ने खासी सफलता अर्जित कर दिखाई है। इस समय भी वे तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती के लिए जमीन-आसमान एक किए हुए हैं।
इंटरनेट मोबाइल का सहारा
एक तरफ अभ्यर्थी सरकारी नौकरियों के लिए पात्र बनने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे दूसरी ओर यह भी सच है कि पिछले करीब डेढ़ साल से कोरोना महामारी ने उनकी राह में बहुत से अवरोध उत्पन्न किए हैं। कोरोना की वजह से कोचिंग व अन्य शिक्षण इकाइयां लगभग बंद रही। आवाजाही तक पर प्रतिबंध लगा। इसके बावजूद उन्होंने हौसला नहीं गंवाया है। वे आपस में समूह बनाकर घरों में अध्ययन करने में जुटे हैं। इस समय इंटरनेट सुविधा से लैस उनका मोबाइल फोन सबसे बड़ा मददगार बना हुआ है। यू-ट्यूब चैनल पर परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री प्राप्त कर रहे हैं। गूगल जैसे सर्च इंजन व कोरा आदि प्लेटफार्मों पर उनकी शंकाओं का समाधान हो रहा है। इसके अलावा इसी फोन पर उन्हें देश-प्रदेश के उनके जैसे ही युवाओं की सफलता की कहानियां भी उन्हीं की जुबानी देखने-सुनने को मिल रही हैं। मोबाइल से लाइव क्लासेज से भी उनका जुड़ाव बन गया है। कई नामी कोचिंग संस्थानों ने वर्तमान में यह रास्ता अपनाया हुआ है।
इनकी चल रही तैयारी
मौजूदा समय में राजस्थान सरकार की ओर से आरएएस, रीट, सब इंस्पेक्टर, पटवारी और कॉलेज व्याख्याता प्रतियोगी परीक्षा के लिए तारीखों का ऐलान किया हुआ है। पीटीइटी, बीएसटीसी व पुलिस कांस्टेबल के लिए भी आवेदन पत्र भरे जा चुके हैं।
शिक्षा से जुड़ रहे युवा
पिछले कुछ वर्षों के दौरान जिले के युवा शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादा प्रभावी ढंग से मेहनत कर रहे हैं। विंड पावर, पर्यटन आदि से उनका कहीं न कहीं मोहभंग हुआ है। जैसलमेर में पहले के मुकाबले प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करवाने की सुविधा भी अब ज्यादा बेहतर हुई है।
- तनेसिंह सोढ़ा, व्याख्याता एवं मोटिवेटर।