
पोकरण क्षेत्र में गत दिनों मानसून की तेज बारिश का दौर चला। इस बारिश से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। जिसके कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ है और बुआई को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। पश्चिमी राजस्थान के सरहदी जिले में पोकरण क्षेत्र के किसान खरीफ व रबी की बुआई करते है। गर्मी के मौसम में खरीफ की बुआई होती है। जिसका समय जून का अंतिम व जुलाई का प्रथम सप्ताह होता है। इसमें मारवाड़ का मुख्य अनाज बाजरा प्रमुख रूप से उत्पादित किया जाता है। इसके अलावा ग्वार, ज्वार, मूंग, मौठ, तिल व मतीरे की फसल होती है। करीब तीन-चार माह बाद अक्टूबर-नवंबर माह में इनकी कटाई होती है और बाजार में नई फसल आती है। जिससे किसानों अच्छी आय हो जाती है। इस वर्ष हुई तेज बारिश के कारण किसानों को हजारों रुपए का नुकसान हो चुका है और अब बुआई का समय निकलता जा रहा है। जिससे उनकी चिंताएं भी बढ़ती जा रही है।
मई-जून माह में हुई छुटपुट बारिश और लंबे समय तक चले भीषण गर्मी के दौर से किसानों को उम्मीद थी कि इस बार मानसून अच्छा रहेगा। भणियाणा उपखंड क्षेत्र में बारिश होने पर किसानों की ओर से बाजरा की बुआई कर दी गई। जबकि पोकरण उपखंड क्षेत्र में पहली बारिश 5 अगस्त को ही हुई। जिसके चलते क्षेत्र में बाजरे की फसल की बुआई नहीं हो सकी। पोकरण व भणियाणा उपखंड क्षेत्र में अगस्त के पहले सप्ताह में तेज बारिश का दौर शुरू हुआ। इस बारिश के दौरान, जिन क्षेत्रों में पूर्व में बुआई की गई थी, उन खेतों में पानी भर जाने के कारण बुआई की गई फसलें नष्ट हो गई। 13 अगस्त को क्षेत्र में फिर बारिश का दौर शुरू हुआ और 5 दिनों तक रुक-रुककर बारिश का दौर चलता रहा। गांवों में 200 से 250 एमएम तक बारिश हुई। इस दौरान खेतों मे पानी भर गया और फसलें पूरी तरह से चौपट हो गई।
ग्वार व ज्वार की बुआई का सही समय 15 से 30 अगस्त तक होता है। मानसून की तेज बारिश से किसानों को आस थी कि बारिश थमने पर वे बुआई कर देंगे, लेकिन तेज बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया। खेतों में पानी इस कदर जमा है कि करीब एक माह तक सूखने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में ग्वार व ज्वार की बुआई का समय भी लगातार निकलता जा रहा है। जिसके कारण उनकी चिंताएं बढऩे लगी है।
क्षेत्र में स्थित खेतों में पानी भर जाने के कारण किसानों की ओर से बुआई करना संभव नहीं हो रहा है। ऐसे में सक्षम किसानों की ओर से बूस्टर लगाकर अपने खेतों में जमा पानी को निकाला जा रहा है, ताकि तेज धूप खिलने पर खेत जल्दी सूख सके और उन्हें खरीफ की फसल की बुआई के लिए जल्दी तैयार किया जा सके। अब बुआई का समय कुछ दिनों का ही रहा है। यदि खेतों में भरा पानी जल्दी नहीं निकाला जाता है और फिर बारिश हो जाती है तो इस बार खरीफ की फसल होने पर संशय हो जाएगा। जिससे किसानों को खासा नुकसान होगा।
सहायक कृषि अधिकारी मदनसिंह चंपावत ने बताया कि जिन खेतों में दो-तीन फीट तक बाजरे की फसल खड़ी थी और उनमें पानी भर गया है, उसके खराब होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि बाजरे की बुआई का समय अब निकल चुका है। किसान 30 अगस्त तक ग्वार की बुआई कर सकते हैं। बाद में उपज कम होने, रोग फैलने की आशंका रहेगी। उन्होंने बताया कि किसानों को अब 31 अगस्त अथवा सितंबर के पहले सप्ताह तक बारानी खेती में ज्वार की ही बुआई करनी चाहिए। ज्वार का चारा पशुओं के लिए लाभदायक होता है। उन्होंने बताया कि जिन खड़ीनों में ज्यादा पानी हो गया है, उनमें गेहूं, तारामीरा, रायड़ा व चने की खेती भी जा सकती है।
खरीफ बुआई का समय निकलता जा रहा है। खेतों में पानी जमा पड़ा है। जिसके कारण बुआई करना संभव नहीं हो रहा है। बूस्टर लगाकर पानी निकासी कर रहे है, ताकि खरीफ फसल ले सके।
Published on:
22 Aug 2024 09:58 pm
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