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JAISALMER NEWS- गांव की परम्परा बन गई आर्थिक सहारा, महिलाएं ऐसे बनी हुनरमंद

साढ़े पांच सौ ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार-पत्थर, पवन व पर्यटन के बाद अब रली उद्योग

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पर्यटकों की भी पसंद..... कभी भी परम्परा अब बन गया उद्योग

जैसलमेर. सरहदी जैसलमेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में परम्परा के तौर पर बनाई जाने वाली रली अब उद्योग के तौर पर निर्मित की जाने लगी है। जैसलमेर में रली उद्योग की ओर तीन साल पहले वन विभाग की इगांनप शाखा का ध्यान गया तो उन्होंने इस कार्य से जुड़ी महिलाओं की मदद की। अब यह परम्परा उद्योग के रूप में तब्दील हो गई है। मौजूदा समय में 550 से अधिक महिलाएं रली निर्माण के जरिए रोजगार से जुड़ी है हाथ से बनने वाली बेहद ही खूबसूरत रली को बनाने में महिलाओं को 10 से 12 दिन का समय लगता है। घर के कार्योंे से निवृत होने के बाद महिलाएं हर दिन दो से तीन घंटे का समय रली बनाने के लिए निकालती है और माह में चार से पांच हजार रुपए कमा लेती है। जानकारों की माने तो जैसलमेर की रली यहां आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों को लुभा रही है। सात समंदर पार से आने वाले सैलानी जैसलमेर की नक्काशीदार रली को खरीदना नहीं भूलते। उन्हें यहां हाथों से बनी रली पसंद आ रही है। कॉटन के कपड़ेे की कटिंग कर बनाई गई रली अब परम्परा से ऊपर उठकर व्यवसाय का रुप ले रही है। मांग बढऩे के बाद यहां हेण्डीक्राफ्ट व्यवसाय से जुड़े पर्यटन व्यवसायी गांवों में जाकर घरों में बन रही रली को खरीद रहे है।
ऑनलाइन बिक्री का भी सहारा
-जैसलमेर की रली को बड़ा बाजार उलब्ध करवाने के लिए वन विभाग ने वेबसाइट तैयार की है। जिससे करीब आधा दर्जन से अधिक देश जुड़े हुए है।
-वे इस वेब साइट के माध्यम से भी जैसलमेर रली की खरीदारी करते है।
-वर्तमान में करीब दस से अधिक देश जैसलमेर की रली को पसंद करते है और वहां से ऑनलाइन ऑर्डर मिल रहे है। जैसे-जैसे वेबसाइट का प्रचार हो रहा है, वैसे-वैसे रली की बिक्री भी बढ़ रही है।

फैक्ट फाइल
- 550 से अधिक ग्रामीण महिलाएं वर्तमान में जुड़ी है हरकरघा रली उद्योग से।
- 10 से अधिक देशों में जैसलमेर की रली की होती है ऑनलाइन खरीद
- 2 दर्जन से अधिक पर्यटन व्यवसायी रली को ग्रामीण क्षेत्रों से खरीदकर कर रहे बिक्री

ग्रामीण महिलाओं का रोजगार
परम्परागत रली को आधुनिक लुक देकर आकर्षक बनाया गया है, जिससे जैसलमेर की ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिला है। प्रयास किए जाए तो यहां की सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को रली उद्योग से जोडकऱ रोजगार दिया जा सकता है।
- समीर पर्यटक व्यवसायी, जैसलमेर

मिली अंतरराष्ट्रीय ख्याति
जैसलमेर की रली को अन्तरराष्ट्रीय पहचान मिली है। विभाग ने यहां की रली को एनजीओ के साथ मिलकर ऑनलाइन बिक्री शुरू करवाई है। वर्तमान में सात से अधिक देशों में इसकी बिक्री हो रही है। गत साल जनवरी इण्डो-एशिया की अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में भी जैसलमेर की रली ने धमाल मचाया था।
- सुदीप कौर उप वन संरक्षक, आईजीएनपी, द्वितीय स्टेज जैसलमेर