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थैलेसीमिया रोगियों का दर्द बांटने आगे आया द विशिंग फैक्ट्री

- जिला चिकित्सालय में आइआरसीटीसी के सहयोग से स्थापित किया वेलनेस सेंटर
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

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Updated: 31 Aug 2021, 9:25 PM IST

थैलेसीमिया रोगियों का दर्द बांटने आगे आया द विशिंग फैक्ट्री

थैलेसीमिया रोगियों का दर्द बांटने आगे आया द विशिंग फैक्ट्री


जैसलमेर. रक्त विकारों से ग्रस्त लोगों विशेषकर बच्चों को नियमित रूप से कष्टदायी प्रक्रिया के सफर और उनके परिवारजनों की घनघोर मानसिक पीड़ा को समझते हुए एक एनजीओ द विशिंग फैक्ट्री ने आइआरसीटीसी के आर्थिक सहयोग से जैसलमेर के जवाहिर चिकित्सालय में वेलनेस सेंटर की स्थापना जन्माष्टमी के पावन पर्व पर की। इस सेंटर से जैसलमेर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के थैलेसीमिया पीडि़तों के जीवन में बेहतरी का नया सवेरा आकार ले सकता है। द विशिंग फैक्ट्री ने जवाहिर चिकित्सालय में आइआरसीटीसी के समर्थन व उसके सीएसआर फंड से बेहद खूबसूरत वेलनेस सेंटर की स्थापना की है। इसका उद्घाटन अतिरिक्त कलक्टर हरिसिंह मीणा और उपखंड अधिकारी रमेश सीरवी ने किया। इस मौके पर आइआरसीटीसी के प्रतिनिधि डॉ. डीजे और रक्तकोष प्रभारी डॉ. दामोदर खत्री मौजूद थे। इस अवसर पर बताया गया कि द विशिंग फैक्ट्री थैलेसीमिया पीडि़तों के जीवन की बेहतरी के लिए काम करने वाला गैर सरकारी संगठन है। जैसलमेर अस्पताल में स्थापित सेंटर द विशिंग फैक्ट्री का सातवां केंद्र है। जिसे आइआरसीटीसी के सहयोग से बनाया गया है। यह संगठन थैलेसीमिया के बारे में जागरूकता पैदा करने और इसे खत्म करने की पहल के क्षेत्र में काम करता है। इसकी अगुआई पार्थ ठाकुर कर रहे हैं।
राहत प्रदान करेगा सेंटर
गौरतलब है कि थैलेसीमिया पीडि़त के लिए ट्रांस यूजन यानी खून बदलने का दिन जो प्रत्येक 15 या 21 दिनों में, चुभन के दर्द के रूप में गुजरने के लिए सबसे दर्दनाक और कठिन होता है। इसके अलावा ओरल आयरन चिलेशन दवाओं की नियमित खुराक और इन्यूजिंग पंपों के जरिए अतिरिक्त आयरन अधिभार प्राप्त करना उनके लिए दोहरी मार है। रक्त की व्यवस्था के लिए बार-बार भागदौड़ और जीवन की निरंतरता के लिए बाहरी स्रोत पर उनकी निर्भरता पूरे परिवार को कठिन जीवन जीने के लिए मजबूर करती है। इसमें इस तरह का एक सेंटर उन्हें राहत देगा और उन्हें इस दर्द से परे जीवन की तलाश करने के लिए प्रेरित करेगा। उक्त सेंटर की स्थापना के लिए कलक्टर आशीष मोदी ने जगह उपलब्ध करवाने के लिए सहमति दी थी। उन्हें पार्थ ठाकुर ने स्वयं के थैलेसीमिया वारियर होने के साथ किए जा रहे कार्यों से अवगत करवाया था।