
किशनगढ़ रेंज में बम फटने से युवक की उंगलियां उड़ी
जैसलमेर. जिले की भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में स्थित किशनगढ़ फील्ड फायरिंग रेंज में बुधवार को एक दर्दनाक हादसे में युवक के बाएं हाथ का पंजा बुरी तरह से जख्मी हो गया और उसकी उंगलियां उड़ गई। इससे पहले एक तेज धमाका हुआ। युवक को बाद में रामगढ़ के चिकित्सा केंद्र लाया गया और वहां से जैसलमेर के जवाहिर चिकित्सालय पहुंचाया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे जोधपुर रेफर कर दिया। हालांकि यहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही थी।
जानकारी के अनुसार किशनगढ़ निवासी पीराणे खां अपने मामा जुम्मे खां के साथ फायरिंग रेंज में बकरियां चराने गाया हुआ था। संभवत: वहां पड़े बम को स्क्रेप समझकर उठा लिया और इसी दौरान उसके हाथ में जोरदार धमाके के साथ बम फट गया तथा उसका हाथ लहूलुहान हो गया। उसे घायल अवस्था में लेकर जुम्मे खां रामगढ़ चिकित्सा केंद्र पहुंचा, जहां से पीराणे खां को जैसलमेर इलाज के लिए भेजा गया। यहां ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों व सहायकों ने उसका जरूरी उपचार किया। कुछ समय अस्पताल में उसका स्वास्थ्य स्थिर करने के बाद चिकित्सकों ने अग्रिम उपचार के लिए जोधपुर रेफर किया। गौरतलब है कि किशनगढ़ फील्ड फायरिंग रेंज में सीमा सुरक्षा बल की वाहिनियों के जवान अभ्यास करते हैं और यहां कई तरह की शूटिंग प्रतियोगिताएं भी होती रही हैं। गौरतलब है कि जैसलमेर जिले में पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज और किशनगढ़ रेंज में सेना व सीमा सुरक्षा बल के बम-गोलों के स्के्रप चुनते समय पूर्व में कई हादसे घटित होते रहे हैं। जिसमें कई जनों ने अपनी जान भी गंवाई है और अनेक घायल हुए हैं।
जिले की दो फायरिंग रेंजों में बम के धमाकों से अब तक कई दर्दनाक हादसे घटित हो चुके हैं। दरअसल इन रेंजों में थल सेना, वायुसेना व सीसुब के युद्धाभ्यास तथा अभ्यास होते रहते हैं। कई बार तोप व बंदूक से निकली गोलियां रेत में धंस जाती है और जिंदा ही रह जाती है। रेगिस्तानी क्षेत्र होने के कारण यहां वर्षभर आंधियों का दौर चलता रहता है। आंधी से उन पर रेत की चादर चढ़ जाती है। जिसके कारण वे स्क्रेप ठेकेदार को भी नजर नहीं आते और वहीं धरती में दबे रह जाते हैं। ये जिंदा बम कई बार आम लोगों के हाथ लग जाते हैं। इनमें से बारूद के साथ तांबा भी भरा होता है। उसके लालच में लोग इसे खोलने का प्रयास करते हैं। जानकारी के अभाव में खोलने के दौरान बम में विस्फोट हो जाता है और फट जाता है। जिससे उसे खोलने वाले के साथ पास खड़े साथी की जान पर बन आती है अथवा वे गंभीर रूप से जख्मी हो जाते हैं।
पत्रिका व्यू : स्क्रेप नहीं जिंदगी चुने
आमजन को प्रतिबंधित फील्ड फायरिंग रेंज में नहीं जाने तथा स्क्रेप को कतई हाथ नहीं लगाने के लिए समझाइश किए जाने की दरकार है। लोग स्क्रेप के लालच में बम उठा लेते हैं और अपने साथ साथ औरों की भी जिंदगी को दांव पर लगा देते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। पोकरण तथा किशनगढ़ रेंज में स्के्रप की जगह जिंदा बम निकल जाने से कई हादसे हो चुके हैं। प्रशासन व पुलिस के साथ सेना व सीसुब की ओर से लोगों को रेंज में नहीं जाने के लिए पाबंद किया जाता है, लेकिन वे थोड़ेे-से लालच के वशीभूत होकर अपनी जान को खतरे में डाल देते हैं।
पूर्व में रेंज में हुए हादसे
- 6 मई 2020 को रामदेवरा क्षेत्र में जिंदा बम फटने से तीन जनों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
- 7 दिसम्बर 2020 को पोकरण रेंज में स्क्रेप चुनते समय एक बालक की मौत हो गई थी जबकि एक अन्य घायल हुआ था।
- 29 अप्रेल 2021 को पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में जिंदा बम फट जाने से युवक की मौत हो गई थी।
- 21 दिसम्बर 2021 को किशनगढ़ फायरिंग रेंज में अलाव तापने के दौरान नीचे रेत में दबे बम में विस्फोट हो जाने से पंजाब की एक बटालियन के जवान की मौके पर ही मौत हुई और 8 अन्य जवान घायल हो गए थे।
- 5 जनवरी 2022 को किशनगढ़ फायरिंग रेंज में बम फटने से चरवाहे का पंजा उड़ गया था।
- 4 मई 2022 को किशनगढ़ रेंज में बम विस्फोट में युवक का पंजा उड़ा।
Updated on:
05 May 2022 10:49 am
Published on:
04 May 2022 09:35 pm
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