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नहीं हुई नहरबंदी…पांच दिन और मिलता रहेगा पानी

- जैसलमेर-बाड़मेर जिलों के लिए रहेगा सुकून- 25 अप्रेल से एक माह के लिए मरम्मत कार्य के लिए पूर्ण नहरबंदी का निर्धारित था कार्यक्रम- नहरबंदी के दौरान बनी रहेगी जलापूर्ति  

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नहीं हुई नहरबंदी...पांच दिन और मिलता रहेगा पानी

नहीं हुई नहरबंदी...पांच दिन और मिलता रहेगा पानी

जैसलमेर. पंजाब के रास्ते देश की पश्चिमी सीमा के अंतिम ठौर जैसलमेर और बाड़मेर जिलों तक हिमालय का मीठा पानी पहुंचाने वाली इंदिरा गांधी नहर परियोजना में 25 अप्रेल से पूर्व निर्धारित पूर्ण नहरबंदी के शुरुआती पांच दिनों में पीने के लिए पानी उपलब्ध होता रहेगा। मरुस्थलीय जैसलमेर और बाड़मेर जिलों के लिए यह अच्छी खबर है। ऐसे में पूर्ण नहरबंदी के बचे हुए 25 दिनों और पंजाब के हरिके बैराज से पानी छोड़े जाने पर पहले पहल 4-5 दिनों तक स्वच्छ पानी नहीं आने की स्थिति में भी जैसलमेर व बाड़मेर शहरों के साथ दोनों जिलों के करीब 400 गांवों की प्यास मोहनगढ़ स्थित परियोजना खंड की डिग्गी व अन्य इलाकों के लिए वहां बने 200 से ज्यादा स्टोरेज से बुझती रहेगी। गौरतलब है कि बीते दिनों पंजाब सरकार के संबंधित उच्चाधिकारियों ने जैसलमेर और बाड़मेर के लिए पीने के लिए पानी उपलब्ध करवाने के लिए पांच दिन अतिरिक्त ढंग से पानी छोडऩे पर सैद्धांतिक तौर पर सहमति जताई थी क्योंकि बीच के दिनों में किसी न किसी कारणवश आपूर्ति प्रभावित हुई थी। यही कारण है कि मंगलवार को भी जिले की नहरों में पीने के लिए पानी मिलता रहा। इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अधिशासी अभियंता रंजन जैन ने बताया कि बुधवार को जिले की नहरों में पीेने के लिए पानी की आपूर्ति हो रही है।
तेज गर्मी में नहीं रहेगा संकट
ऐसे में अब आगामी एक माह में भीषण गर्मी के मौसम में सीमांत जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में पीने के पानी का बड़ा संकट सामने आने की आशंका लगभग नहीं है। मोहनगढ़ लिफ्ट कैनाल परियोजना के मोहनगढ़ स्थित हैडवक्र्स से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जलदाय विभाग की डिग्गियों में पानी का समुचित भंडारण किए जाने का दावा संबंधित विभाग की ओर से किया गया है। उनके अनुसार 35 दिनों तक नहर से पानी नहीं मिला तो भी भंडारित किए गए पानी से लाखों लोगों के साथ मवेशियों के प्यासे कंठों की प्यास बुझाई जा सकेगी। गौरतलब है कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत राजस्थान फीडर में मरम्मत कार्य के लिए 25 अप्रेल से 25 मई तक की अवधि में पूर्ण नहरबंदी प्रस्तावित है। नहरबंदी के मद्देनजर जलदाय विभाग तथा लिफ्ट कैनाल प्रोजेक्ट प्रबंधन ने पिछले अर्से से जल भंडारण पर ध्यान केंद्रित किया। जानकारी के अनुसार मोहनगढ़ स्थित हैडवक्र्स की 7 मीटर गहरी डिग्गी वर्तमान में पानी से लबालब है। करीब एक किलोमीटर के क्षेत्रफल में बनी इस डिग्गी से जैसलमेर और बाड़मेर शहरों के साथ दोनों जिलों के करीब 400 गांवों को 22 दिन तक पीने का पानी मुहैया करवाया जा सकता है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के परियोजना खंड के अधिशासी अभियंता आरके शर्मा ने बताया कि एक माह की नहरबंदी के दौरान जलापूर्ति की पूरी तैयारी है।
शहरी व्यवस्था को डाबला का सहारा
- जहां तक जैसलमेर शहर का सवाल है, यहां मुख्य रूप से मोहनगढ़ हैडवक्र्स से नहरी पानी की आपूर्ति पेयजल के रूप में की जाती है। इसके अलावा जिला मुख्यालय के समीपस्थ और कई दशकों तक प्रमुख पेयजल आपूर्तिकर्ता डाबला के आधा दर्जन नलकूपों से भी शहर को अतिरिक्त पानी मिल रहा है।
- जिले में जलदाय विभाग की करीब 220 डिग्गियां ग्रामीण क्षेत्रों में बनी हुई हैं। जिनमें 21-22 दिन का पानी संग्रहित करने की क्षमता है।
- जिले के नहरी क्षेत्र की दृष्टि से अंतिम छोर पर आए कई गांवों में नहरबंदी के अंतिम दिनों में पेयजल संकट के हालात बनने की आशंका से अब भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे क्षेत्रों में सुल्ताना, राघवा, रामगढ़, सम आदि इलाके आते हैं।
- राज्य सरकार की तरफ से भीषण गर्मी में पेयजल व्यवस्था के लिए कंटीजेंसी प्लान को मंजूरी दी जाती है।

फैक्ट फाइल
- 30 दिन रहेगी पूर्ण नहरबंदी
- 14-15 एमएल है जैसलमेर शहर की मांग
- 22 दिन तक दो जिलों में मोहनगढ़ हैडवक्र्स डिग्गी में पानी

नहरबंदी से चिंता नहीं
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के परियोजना खंड के अधिशासी अभियंता आरके शर्मा ने बताया कि आगामी दिनों में एक माह की नहरबंदी से चिंतित होने की जरूरत नहीं है। जलदाय विभाग के पास मानव आबादी के लिए पेयजल की पूरी व्यवस्था इस अवधि में रहेगी।