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Video: जिन्होंने दिलाई आजादी, उनकी राष्ट्रीय पर्व पर भी सुध नहीं !

-उपेक्षा का दंश झेल रहे शहीदों व महापुरुषों के स्मारक

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जिन्होंने दिलाई आजादी, उनकी राष्ट्रीय पर्व पर भी सुध नहीं !

जिन्होंने दिलाई आजादी, उनकी राष्ट्रीय पर्व पर भी सुध नहीं !

जैसलमेर. स्वाधीनता दिवस महज एक कदम की दूरी पर है और जैसलमेर में देश को आजादी दिलाने वाले नायकों को याद करने की समझ और फुर्सत सरकारी तंत्र में अब तक देखने को नहीं मिल रही है। स्वतंत्रता दिवस से पूर्व पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि यहां अमर शहीद सागरमल गोपा से लेकर जैसलमेर स्थित अन्य शहीदों व महापुरुषों के स्मारकों की दुर्दशा को दूर करने की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया है। पत्रिका टीम की ओर से जायजा लिए जाने पर राष्ट्र नायकों के प्रति सरकारी उदासीनता साफ तौर पर नजर आई।
मिट रहा इतिहास
सर्वोच्च बलिदान देने वाले सागरमल गोपा के गड़ीसर प्रोल स्थित स्मारक गत दशकों से एक जैसी अवस्था में है। उसे और विकसित करना तो दूर सार.संभाल कर मौजूदा स्वरूप को भी बरकरार रखने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है। यहां गोपाजी की प्रतिमा के नीचे अंकित इतिहास अब आसानी से पढऩे में नहीं आता। वहां पूर्व के वर्षों में बनाया गया तिरंगा मिट गया है। रियासतकाल में ष्जैसलमेर का गुंडाराजष् पुस्तक लिखने वाले सागरमल गोपा को कारावास में डाल दिया गया था। जहां उनकी शहादत हुई। उनके स्मारक के चारों तरफ गंदगी की भरमार है। स्मारक के एक तरफ नगरपरिषद ने कचरा संग्रहण केंद्र बना रखा है तो दूसरी ओर सड़क बुरी तरह से टूटी है। जहां हर समय गंदगी का आलम रहता है। यहां आज भी चार दशक पुरानी प्रतिमा ही लगी हुई है। यह प्रतिमा वक्त के थपेड़ों और जिम्मेदारों की उपेक्षा से अपना नूर खो चुकी है। शिलापट्ट पर लिखी पंक्तियां अब आसानी से दृष्टिगोचर नहीं होती।
दुरूस्त नहीं हो रहा टूटा चश्मा
स्वतंत्रता सेनानी सत्यदेव व्यास की स्मृति में बनाए पार्क में उनकी प्रतिमा लगी है। प्रतिमा का चश्मा पिछले कई सालों से टूटा हुआ है। उसे सुधरवाने या नई प्रतिमा लगाने की कोई पहल नहीं हो रही। पार्क में साफ-सफाई का स्तर पिछले अर्से के दौरान अवश्य सुधरा है। हाई मास्ट लाइट भी लगी हैए लेकिन इसे और भी ढंग से विकसित किया जाना अभी शेष है। शहर की प्रमुख सड़क पर बनाए गए इस पार्क में आमजन को छाया जरूर मिल जाती है।
कब पूरा होगा काम
1960 के दशक में जैसलमेर जिले में डाकुओं से मुठभेड़ करते हुए प्राणों का बलिदान करने वाले तत्कालीन पुलिस उपअधीक्षक जगन्नाथ शर्मा का पंचायत समिति सम चैराहा पर बनवाया जा रहा स्मारक का काम लम्बे समय से पूरा नहीं हो पाया है। पूर्व में शर्मा की प्रतिमा जवाहर चिकित्सालय के बाहर सड़क किनारे थी। जिसे बाद में यहां शिफ्ट कर दिया गया। कायदे से उनके शहीद स्मारक का कार्य अब तक पूरा हो जाना चाहिए थाए लेकिन नगरपरिषद के कामकाज की सुस्त चाल से यह पूरा नहीं हो पाया है। टूरिस्ट बंगलो के पास 1971 में पाकिस्तान पर भारत की ऐतिहासिक जीत के उपलक्ष्य में स्थापित किए गए विजय स्तम्भ के चारों तरफ लगाए गए फव्वारे भी यदा-कदा ही चलाए जाते हैं।