
किशोर वय से नसों में उतर रहा तम्बाकू का जहर
जैसलमेर.
केस 1- नौकरीपेशा विजय कुमार (परिवर्तित नाम) गत वर्ष कोरोना से पहले पान मसाले में तम्बाकू मिलाकर उसका सेवन करता था। जब लॉकडाउन लगा और तम्बाकू उत्पाद बहुत महंगे दामों पर चोरी-छिपे मिलने लगे तो उसने इस व्यसन से तौबा कर ली। आज एक साल से भी ज्यादा समय से वह तम्बाकू मुक्त जीवन गुजार रहा है।
केस 2 युवा मनोहर सिंह (परिवर्तित नाम) को बीड़ी पीने की बुरी लत लगी हुई थी। इस साल कोरोना की दूसरी लहर में जैसलमेर जिले में फेफड़ों में संक्रमण से लोगों को गंभीर रूप से बीमार और कइयों की मौत तक हो जाने के बाद उसने धूम्रपान छोड़ दिया।
तम्बाकू चबाना और उसे बीड़ी, सिगरेट, हुक्का आदि के जरिए फूंकना मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक होने के बावजूद सीमावर्ती जैसलमेर जिले के शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण इलाकों में इसका चलन दिन दोगुनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है। इसकी तलब कितनी गहरी है, इसका पता पिछले साल के लॉकडाउन में चला जब तम्बाकू उत्पादों की जमकर कालाबाजारी हुई और लोगों ने 10 रुपए की जर्दे की पुडिय़ा को 100 से 150 रुपए देकर खरीदी। यही हालात कमोबेश बीड़ी, सिगरेट व गुटखा आदि के रहे थे। राज्य सरकार की ओर से नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचना गैरकानूनी किया हुआ है, लेकिन जैसलमेर में इस तरह की पाबंदी का कोई असर धरातल पर देखने को नहीं मिलता। स्कूली बच्चे तथा अन्य किशोर जहां-तहां गुटखा व जर्दा चबाते और धूम्रपान करते दिखाई दे जाते हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अंतर्गत आने वाले तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ की तरफ से बीच-बीच में कानून तोडऩे वाले ठेले-केबिन संचालकों व दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाइयां भी की गई, लेकिन उनकी धार बहुत कम होने से हालात में बदलाव नहीं दिखा और अब कुछ महीनों से तो तम्बाकू नियंत्रण करने वाले अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता ही यहां तबादला करवाकर जा चुके हैं। फिलहाल कामचलाऊ व्यवस्था के तहत एक अन्य कार्मिक को इसका अतिरिक्त प्रभार दिया हुआ है।
तम्बाकू निषेध केंद्र पर ताला
सरकारी निर्देशानुसार जिला मुख्यालय स्थित राजकीय जवाहिर चिकित्सालय में भी तम्बाकू निषेध केंद्र, टीसीसी गत अर्से के दौरान स्थापित किया गया। एक महिला कार्मिक पदस्थापित की गई लेकिन महीनों पहले वह भी स्थानांतरित हो गई तथा यह केंद्र वर्तमान में बंद है। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि जब तक केंद्र था, तब तक कुछ लोगों को तम्बाकू की लत छुड़वाने के लिए परामर्श व आवश्यक उपचार दिया जाता था। जानकारी के अनुसार तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ व पुलिस ने साझा तौर पर कार्रवाइयां करते हुए जिले में वर्ष 2020 में 116 चालान किए थे। अस्पताल व स्कूलों के निकट ठेले-केबिन वालों को तम्बाकू उत्पाद बेचने से भी रोका गया था। इसके बाद पहले लॉकडाउन और बाद में प्रकोष्ठ के प्रभारी व कार्यकर्ता का तबादला हो जाने से जुर्माने आदि की गतिविधियां लगभग ठप ही है। अभी जिनके पास प्रकोष्ठ का चार्ज है, वह कार्मिक विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर चिकित्सा मंत्री की होने वाली वर्चुअल बैठक की तैयारी में जुटे हैं।
बढ़ रहे कैंसर रोगी
तम्बाकू सेवन से जैसलमेर जिले में मुख और गले के कैंसर रोगियों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जवाहिर चिकित्सालय में कैंसर वार्ड के प्रभारी डॉ. वीके वर्मा ने बताया कि तम्बाकू चबाना बेहद खतरनाक है। यह मुंह से शुरू होकर गले से होता हुआ पेट तक में तकलीफ पैदा कर सकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मुख व गले के कैंसर के रोगियों का उपचार चल रहा है। वहीं जैसलमेर में सार्वजनिक स्थानों पर थूकने वालों के खिलाफ शायद ही कभी कार्रवाई हुई हो और तो और खुले में धूम्रपान करते भी लोग इफरात में देखे जा सकते हैं। पास बैठे लोग भी उनसे रोक-टोक नहीं करते, जबकि यह माना हुआ तथ्य है कि सिगरेट-बीड़ी का धुआं धूम्रपान नहीं करने वालों के लिए भी हानिकारक है।
Published on:
31 May 2021 08:25 pm
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